नई दिल्ली:
- सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र और आरबीआई का प्रतिनिधित्व करते हुए कहा, "मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि यह विचाराधीन है और यह बहुत ही उन्नत अवस्था में है."
- मामले पर फैसला 2-3 दिनों में होने की संभावना है और 1 अक्टूबर तक उपस्थित वकील को ईमेल किया जाएगा, उन्होंने शीर्ष अदालत को बताया.
- अपने 10 सितंबर के आदेश में शीर्ष अदालत ने सरकार को निर्देश दिया था कि चक्रवर्ती ब्याज वसूलने और उसका उधारकर्ताओं की क्रेडिट रेटिंग पर कोई भी परिणामी प्रभाव पड़ने के बारे में एक योजना प्रस्तुत करने का था, यह बताते हुए कि योजना को 28 सितंबर की सुनवाई में प्रस्तुत किया जाना चाहिए.
- केंद्र ने COVID-19 महामारी के कारण स्थगन अवधि के दौरान स्थगित किस्तों पर बैंकों द्वारा लिए जा रहे ब्याज के मुद्दे को देखने के लिए पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) राजीव महर्षि के अधीन एक विशेषज्ञ पैनल का गठन किया है.
- तनावग्रस्त कर्जदारों को कुछ राहत देने के लिए, सुप्रीम कोर्ट ने इस महीने की शुरुआत में फैसला सुनाया था कि कर्जदारों के ऋण खातों की रोक - या ऋण चुकाने में देरी - अगले आदेश तक खराब ऋण (Bad loans) के रूप में घोषित नहीं की जाएगी.
- शीर्ष अदालत ने कहा था कि उधारकर्ताओं को संरक्षित करने की आवश्यकता है और बैंकों को उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं करनी चाहिए.
- बैंकों और रियल एस्टेट डेवलपर्स जैसे क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले कई संघ सुनवाई का हिस्सा हैं.
- जबकि याचिकाकर्ता ब्याज पर ब्याज की माफी की मांग करते हैं (COVID-19 के कारण EMI को निलंबित करने के विकल्प का उपयोग करने के लिए ब्याज),सरकार का विचार है कि ब्याज बंद करने से बैंक कमजोर होंगे और आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी.
- केंद्र और भारतीय रिजर्व बैंक ने शीर्ष अदालत से कहा है कि कोरोनोवायरस-संबंधी स्थिति के कारण ऋण स्थगन को दो साल तक बढ़ाया जा सकता है.
- कोरोना और लॉकडाउन की वजह से आरबीआई ने मार्च में लोगों को मोरेटोरियम यानी लोन की ईएमआई 3 महीने के लिए टालने की सुविधा दी थी. बाद में इसे 3 महीने और बढ़ाकर 31 अगस्त तक के लिए कर दिया गया. आरबीआई ने कहा था कि लोन की किश्त 6 महीने नहीं चुकाएंगे, तो इसे डिफॉल्ट नहीं माना जाएगा. लेकिन, मोरेटोरियम के बाद बकाया पेमेंट पर पूरा ब्याज देना पड़ेगा.
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