
नई दिल्ली:
आज सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह की बरेली में आयोजित होने जा रही रैली आगामी विधानसभा चुनावों के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है. ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें ही वह कांग्रेस के साथ गठबंधन के मसले पर अपनी राय जाहिर कर सकते हैं.
दरअसल सपा के भीतरखाने, कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर अलग-अलग सुर उठते रहे हैं और तस्वीर साफ नहीं दिख पाने के कारण कार्यकर्ता भी बेचैन हो गए हैं क्योंकि अब चुनाव की घोषणा के लिए ज्यादा दिन का वक्त नहीं बचा है. ऐसे में टिकट की बाट जोह रहे कार्यकर्ताओं में बेचैनी का होना लाजिमी है.
चुनावों के लिहाज से यह सपा की दूसरी रैली है. मुलायम सिंह की पहली रैली 23 नवंबर को गाजीपुर में हुई थी. उसमें गठबंधन पर बने असमंजस के खत्म होने के आसार थे लेकिन मुलायम ने चुप्पी साधे रखी. हालांकि लखनऊ में एक प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा था कि वह किसी दल के साथ गठबंधन नहीं करेंगे और कोई अन्य दल चाहे तो सपा में अपना विलय कर सकता है. उस दौरान कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के मुलायम सिंह और बाद में अखिलेश से मिलने के बाद गठबंधन के कयास लगाए जा रहे थे लेकिन मुलायम की उस घोषणा के बाद मामला थम सा गया.
लेकिन पहली और दूसरी रैली के एक पखवाड़े के भीतर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दिल्ली, फीरोज़ाबाद और लखनऊ में तीन बार कहा है कि सपा वैसे तो अकेले ही सत्ता में आ जाएगी लेकिन कांग्रेस से गठबंधन होने की स्थिति में 300 सीटें जीतेंगे. इसके साथ ही हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि नेताजी ही इस मामले में अंतिम रूप से फैसला करेंगे. इस तरह की बातों के बीच फिर से गठबंधन की अटकलें लगाई जाने लगी हैं लेकिन दोनों पार्टियों के प्रयासों का खुलासा नहीं होने के कारण कार्यकर्ता गठबंधन को लेकर असमंजस में हैं.
सपा में टिकट के दावेदार पहले ही टिकट बंटवारे पर परिवार के तीन सदस्यों के दावे से बेचैन हैं. वहीं दूसरी ओर गठंबधन होने की स्थिति में अपनी सीट दूसरे दल के खाते में जाने की संभावना के मद्देनजर अपनी चुनावी तैयारियां भी ठीक से शुरू नहीं कर पा रहे हैं. अब इन परिस्थितियों में आज बरेली के राजकीय कॉलेज में होने वाली रैली में सबकी निगाहें मुलायम के रुख पर टिकी हैं.
दरअसल सपा के भीतरखाने, कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर अलग-अलग सुर उठते रहे हैं और तस्वीर साफ नहीं दिख पाने के कारण कार्यकर्ता भी बेचैन हो गए हैं क्योंकि अब चुनाव की घोषणा के लिए ज्यादा दिन का वक्त नहीं बचा है. ऐसे में टिकट की बाट जोह रहे कार्यकर्ताओं में बेचैनी का होना लाजिमी है.
चुनावों के लिहाज से यह सपा की दूसरी रैली है. मुलायम सिंह की पहली रैली 23 नवंबर को गाजीपुर में हुई थी. उसमें गठबंधन पर बने असमंजस के खत्म होने के आसार थे लेकिन मुलायम ने चुप्पी साधे रखी. हालांकि लखनऊ में एक प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा था कि वह किसी दल के साथ गठबंधन नहीं करेंगे और कोई अन्य दल चाहे तो सपा में अपना विलय कर सकता है. उस दौरान कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के मुलायम सिंह और बाद में अखिलेश से मिलने के बाद गठबंधन के कयास लगाए जा रहे थे लेकिन मुलायम की उस घोषणा के बाद मामला थम सा गया.
लेकिन पहली और दूसरी रैली के एक पखवाड़े के भीतर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दिल्ली, फीरोज़ाबाद और लखनऊ में तीन बार कहा है कि सपा वैसे तो अकेले ही सत्ता में आ जाएगी लेकिन कांग्रेस से गठबंधन होने की स्थिति में 300 सीटें जीतेंगे. इसके साथ ही हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि नेताजी ही इस मामले में अंतिम रूप से फैसला करेंगे. इस तरह की बातों के बीच फिर से गठबंधन की अटकलें लगाई जाने लगी हैं लेकिन दोनों पार्टियों के प्रयासों का खुलासा नहीं होने के कारण कार्यकर्ता गठबंधन को लेकर असमंजस में हैं.
सपा में टिकट के दावेदार पहले ही टिकट बंटवारे पर परिवार के तीन सदस्यों के दावे से बेचैन हैं. वहीं दूसरी ओर गठंबधन होने की स्थिति में अपनी सीट दूसरे दल के खाते में जाने की संभावना के मद्देनजर अपनी चुनावी तैयारियां भी ठीक से शुरू नहीं कर पा रहे हैं. अब इन परिस्थितियों में आज बरेली के राजकीय कॉलेज में होने वाली रैली में सबकी निगाहें मुलायम के रुख पर टिकी हैं.
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