Mann Ki Baat: जल संरक्षण का संदेश दे PM मोदी ने शुरू की 'मन की बात', बोले- 'पारस से भी बढ़कर है पानी'

Mann Ki Baat: PM मोदी ने संत रविदास का जिक्र कर कहा, "युवा कोई भी काम करने के लिए पुराने तरीकों में ना बंधें." उन्होंने कहा, आज भी, संत रविदास जी के शब्द, उनका ज्ञान, हमारा पथप्रदर्शन करता है." उन्होंने कहा कि संत रविदास ने कहा था हम सभी एक ही मिट्टी के बर्तन हैं, हम सभी को एक ने ही गढ़ा है.

नई दिल्ली:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने अपने मासिक कार्यक्रम 'मन की बात' (Mann Ki Baat) में जल संरक्षण का संदेश दिया है. उन्होंने माघ मेला से अपने मासिक कार्यक्रम मन की बात की शुरुआत की और कहा कि अब गर्मियों के दिन शुरू होने जा रहे हैं. इसलिए जल संरक्षण का यह सही अवसर है. पीएम मोदी ने कहा, "जल हमारे लिए जीवन, आस्था और विकास की धारा है. पानी एक तरह से पारस से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण है. पानी के संरक्षण के लिए हमें अभी से ही प्रयास शुरू कर देने चाहिए, 22 मार्च को विश्व जल दिवस भी है."

उन्होंने कहा, “माघे निमग्ना: सलिले सुशीते, विमुक्तपापा: त्रिदिवम् प्रयान्ति,अर्थात, माघ महीने में किसी भी पवित्र जलाशय में स्नान को पवित्र माना जाता है. दुनिया के हर समाज में नदी के साथ जुड़ी हुई कोई-न-कोई परम्परा होती ही है. नदी तट पर अनेक सभ्यताएं भी विकसित हुई हैं. हमारी संस्कृति क्योंकि हजारों वर्ष पुरानी है, इसलिए, इसका विस्तार हमारे यहां और ज्यादा मिलता है.

संत रविदास का जिक्र कर पीएम मोदी ने कहा, "युवा कोई भी काम करने के लिए पुराने तरीकों में ना बंधें." उन्होंने कहा, आज भी, संत रविदास जी के शब्द, उनका ज्ञान, हमारा पथप्रदर्शन करता है." उन्होंने कहा कि संत रविदास ने कहा था हम सभी एक ही मिट्टी के बर्तन हैं, हम सभी को एक ने ही गढ़ा है. पीएम ने कहा, "यह मेरा सौभाग्य है कि मैं संत रविदास जी की जन्मस्थली वाराणसी से जुड़ा हुआ हूं. संत रविदास जी के जीवन की आध्यात्मिक ऊंचाई को और उनकी ऊर्जा को मैंने उस तीर्थ स्थल में अनुभव किया है."

पीएम मोदी ने अपने मासिक कार्यक्रम में संस्कृत की दो ऑडियो क्लिप भी सुनाए जिसमें एक टूरिस्ट संस्कृत में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के बारे में दर्शकों को बता रहे हैं. दूसरे ऑडियो में एक शख्स संस्कृत में क्रिकेट की कमेंट्री कर रहा है. वह शख्स वाराणसी के संस्कृत केंद्र से संबंधित है. पीएम ने कहा कि क्रिकेट के अलावा अन्य खेल की कमेंट्री भी शुरू होनी चाहिए. इसके लिए उन्होंने खेल मंत्रालय और निजी क्षेत्र से भी भागीदारी की अपील की.

पीएम ने कहा, "आज राष्ट्रीय विज्ञान दिवस है. यह वैज्ञानिक डॉ. सीवी रमन द्वारा रमन प्रभाव की खोज के लिए समर्पित है. हमारे युवाओं को भारतीय वैज्ञानिकों के बारे में बहुत कुछ पढ़ना चाहिए और भारतीय विज्ञान के इतिहास को समझना चाहिए." उन्होंने कहा, "आत्मानिर्भर भारत में विज्ञान का योगदान बहुत बड़ा है. हमें विज्ञान को 'लैब टू लैंड' के मंत्र के साथ आगे ले जाने की जरूरत है. उदाहरण के लिए, लद्दाख के उर्जैन फुंटसोग नवाचार तकनीकों के साथ काम कर रहे हैं और चक्रीय पैटर्न मके तहत 20 विभिन्न फसलों को व्यवस्थित रूप से विकसित करने के लिए काम कर रहे हैं."

पीएम मोदी ने आगामी परीक्षा के बारे में भी चर्चा की और छात्रों का मनोबल बढ़ाया. उन्होंने शिक्षकों और छात्रों से माय गॉव पोर्टल पर संपर्क करने की सलाह दी और कहा कि वहां परीक्षा के टिप्स दिए गए हैं. जिसका लाभ उठाना चाहिए. 


पीएम ने बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच फिर से लोगों को सचेत रहने को कहा है और कहा है कि परीक्षा के मौकों से लेकर त्योहारों तक सभी को कोरोना वायरस के बीच सतर्क रहना है और जरूरी सुरक्षात्मक कदम उठाने हैं.

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उनका यह मासिक कार्यक्रम है जो महीने के आखिरी रविवार की सुबह 11 बजे आकाशवाणी पर प्रसारित किया जाता है. आज उनके लोकप्रिय कार्यक्रम का 74वां संस्करण है.  इस महीने की शुरुआत में ही पीएम मोदी ने ट्विटर पर लोगों से इस एपिसोड के लिए मन की बात कार्यक्रम में अलग-अलग विषयों पर सुझाव मांगे थे.