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This Article is From Oct 06, 2021

मध्यप्रदेशः माननीय अपना ही संकल्प भूल गए, नहीं दे रहे संपत्ति का ब्योरा

विधानसभा की तरफ से विधायकों को कई बार पत्र भी लिखा जा चुका है, लेकिन लगता है माननीयों को ज्यादा फर्क नहीं पड़ता.

मध्यप्रदेशः माननीय अपना ही संकल्प भूल गए, नहीं दे रहे संपत्ति का ब्योरा
मध्यप्रदेश के विधायकों ने अब नहीं दी संपत्ति की जानकारी. (फाइल फोटो)
भोपाल:

2019 में मध्यप्रदेश विधानसभा ने एक संकल्प पारित किया था कि वो अपनी और अपने परिवार की संपत्ति की जानकारी 30 जून तक विधानसभा के प्रमुख सचिव को दे देंगे. हालांकि अब माननीय अपना ही संकल्प भूल गए हैं. विधानसभा सचिवालय ने खत लिखकर कई बार विधायकों को संकल्प याद दिलाया है लेकिन हुआ कुछ नहीं. कुछ दिनों पहले मध्यप्रदेश विधानसभा में हमने माननीयों का नया रूतबा देखा था, लाल बत्ती की जगह हूटर जबकि मोटर व्हीकल एक्ट के तहत ये प्रतिबंधित हैं, खबर आने के बावजूद बदला कुछ नहीं, बदले भी तो कैसे जब माननीय सदन में किया वायदा भूल जाते हैं. 

इसी विधानसभा में 8 दिसंबर 2019 को मध्य प्रदेश विधानसभा ने विधायकों को हर साल अपनी संपत्ति की जानकारी विधानसभा को देने का संकल्प सर्व सम्मति से पारित किया था...वक्त बदला, सत्ता बदली ... तारीख बदली. लेकिन 230 सदस्यों वाली मध्यप्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम सहित सिर्फ 15 सदस्यों ने संपत्ति की जानकारी विधानसभा सचिवालय को भेजी.

विधानसभा की तरफ से विधायकों को कई बार पत्र भी लिखा जा चुका है, लेकिन लगता है माननीयों को ज्यादा फर्क नहीं पड़ता. कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग कहते हैं, कोई कोताही नहीं है, वैसे भी सभी विधायक चुनाव लड़ते वक्त संपत्ति का ब्यौरा देते हैं. वहीं पूर्व कानून मंत्री और कांग्रेस विधायक पीसी शर्मा का कहना था कि लगातार कोरोना का वक्त रहा, इसलिये थोड़ी देर हुई होगी लेकिन मैं समझता हूं सबको ब्यौरा देना चाहिये. इस संकल्प का मकसद था कि विधायकों-मंत्रियों और उनके रिश्तेदारों की संपत्ति की जानकारी जनता के बीच जाएगी तो पारदर्शिता आएगी और लोगों के बीच उनको लेकर भ्रम नहीं फैलेगा. 

जिस वक्त ये संकल्प पारित हुआ कांग्रेस सत्ता में थी, उस वक्त बीजेपी का सुझाव था संकल्प के बजाय विधेयक लाया जाता, सज़ा का प्रावधान होता. अब बीजेपी सत्ता में है तो कह रही है कि वो तो चुनावी हलफनामें में संपत्ति का ब्यौरा देते ही हैं, हालांकि हलफनामा तो 5 साल में दिया जाता है लेकिन देखा गया है कि माननीयों की संपत्ति दिनों दूनी, रात चौगुनी तरक्की पर रहती है, ये प्रगति भी सर्वदलीय होती है.

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