MP में ऑक्सीजन का संकट? शिवराज सिंह सरकार ने औद्योगिक उपयोग पर लगाया बैन

ऑक्सीजन के औद्योगिक उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय सबले पहली बार इंदौर में 3 दिनों पहले वहां के कलेक्टर द्वारा लिया गया था.

MP में ऑक्सीजन का संकट? शिवराज सिंह सरकार ने औद्योगिक उपयोग पर लगाया बैन

खास बातें

  • कोविड-19 संकट के बीच मध्य प्रदेश में गहराया ऑक्सीजन संकट?
  • केंद्र राज्य को रोजाना करेगा 50 टन ऑक्सीजन सप्लाय
  • राज्य सरकार ने ऑक्सीजन के औद्योगिक इस्तेमाल पर लगाई पाबंदी
भोपाल:

मध्य प्रदेश के अस्पतालों में ऑक्सीजन का संकट हो सकता है, पिछले हफ्ते एनडीटीवी की इस रिपोर्ट के बाद हरकत में आई राज्य सरकार ने फौरन कार्रवाई की है. पड़ोसी राज्यों से ऑक्सीजन सप्लाई सुनिश्चित की गई है. राज्य सरकार ने एक विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि मध्य प्रदेश को प्रति दिन 110 टन ऑक्सीजन की आवश्यकता है. इस बीच केंद्र सरकार मध्य प्रदेश को प्रतिदिन 50 टन ऑक्सीजन की आपूर्ति करने पर लिए सहमत हो गया है, इससे राज्य में ऑक्सीजन की उपलब्धता अब प्रतिदिन 180 टन हो गई है.

हालांकि, इन आंकड़ों के बीच भी राज्य में ऑक्सीजन सप्लाय पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. इसे देखते हुए राज्य सरकार ने ऑक्सीजन के औद्योगिक उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है. मध्य प्रदेश में अब 90,000 से अधिक कोरोना संक्रमण के मामले हैं और पिछले पांच दिनों से, औसतन 2000 मरीज हर दिन सामने आ रहे हैं. राज्य में अक्टूबर तक अस्पतालों में क्षमता तीन गुना करने की योजना है - 3,600 ऑक्सीजन बेड और 564 आईसीयू बेड जोड़े जाएंगे, ऐसे में साफ है कि अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता होगी.      


राज्य के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कहा, "फिलहाल हमने तात्कालिक आवश्यकता को देखते हुए राज्य में सभी औद्योगिक ऑक्सीजन की आपूर्ति करने वाली इकाइयों से इसका इस्तेमाल मेडिकल सिलेंडर को रिफिल करने के लिये कहा है. ऑक्सीजन के औद्योगिक उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय सबले पहली बार इंदौर में 3 दिनों पहले वहां के कलेक्टर द्वारा लिया गया था. इसके बाद राज्य सरकार ने इसे पूरे राज्य में लागू कर दिया है.

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