केरल में कोरोना के 32 हजार से ज्यादा नए मामले, 112 मरीजों की मौत

केरल (Kerala) में बुधवार को कोरोनावायरस (Coronavirus) के 32,762 नए मरीजों की पुष्टि हुई, जिसके बाद कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 22,03,413 पर पहुंच गई.

केरल में कोरोना के 32 हजार से ज्यादा नए मामले, 112 मरीजों की मौत

केरल में कोरोना के 3,31,860 एक्टिव केस हैं. (फाइल फोटो)

खास बातें

  • केरल में कोरोना के 32,762 नए मामले
  • 24 घंटों में 112 कोविड मरीजों की मौत
  • केरल में कोरोना के 3,31,860 एक्टिव केस
तिरुवनंतपुरम:

केरल (Kerala) में बुधवार को कोरोनावायरस (Coronavirus) के 32,762 नए मरीजों की पुष्टि हुई, जिसके बाद कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 22,03,413 पर पहुंच गई. जबकि संक्रमण से 112 और मौतें होने के बाद मृतक संख्या 6724 पहुंच गयी है. मुख्यमंत्री पी विजयन (P Vijayan) ने यहां पत्रकारों को बताया कि 48,413 लोग संक्रमण से उबरे हैं, जिसके बाद संक्रमण मुक्त होने वाले मरीजों की संख्या 18,94,518 हो गई है, वहीं 3,31,860 संक्रमितों का इलाज चल रहा है.

पिछले 24 घंटों में 1,40,545 कोविड-19 नमूनों की जांच की गई है और जांच संक्रमण दर 23.3 प्रतिशत है. एर्नाकुलम जिले में सबसे ज्यादा 4282 मामले आए हैं. इसके बाद मलप्पुरम में 4212 मरीज मिले. तिरुवनंतपुरम और कोल्लम में तीन-तीन हजार मामले सामने आए हैं.

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वहीं केरल के तिरूर में कोविड-19 से मुक्त हो चुका एक मरीज ब्लैक फंगस से संक्रमित हो गया, जिसके बाद उनकी एक आंख निकालनी पड़ी. स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने इसकी जानकारी दी. सूत्रों ने बताया कि डॉक्टरों को फंगस को मस्तिष्क तक पहुंचने से रोकने के लिए उनकी एक आंख निकालनी पड़ी. उन्होंने बताया कि मरीज को कोविड-19 से संक्रमित होने के बाद 25 अप्रैल को मंजेरी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

तिरूर के पास एलूर के रहने वाले 62 वर्षीय मरीज को निमोनिया भी हो गया था लेकिन वह हाल में इससे ठीक हो गए थे.
बहरहाल, कोविड के बाद वह घर पर स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे, तब उनके सिर और चेहरे पर तेज दर्द हुआ. उन्हें पांच मई को कोट्टक्कल के आंखों के क्लीनिक ले जाया गया और बाद में पिछले हफ्ते कोझीकोड के एमआईएमएस रेफर कर दिया गया.

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एमआईएमएस अस्पताल के सीईओ फरहान ने बताया कि ब्लैक फंगस से संक्रमित मरीज को एक हफ्ते पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था और संक्रमण को उनके मस्तिष्क तक पहुंचने से रोकने के लिए डॉक्टरों को उनकी बाई आंख निकालनी पड़ी. वह लंबे समय से मधुमेह से पीड़ित थे.

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(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)