रुद्रप्रयाग / पिथौरागढ़ / पौड़ी-श्रीनगर हाईवे:
उत्तराखंड में आई भारी बारिश के बाद आई बाढ़ की विनाशलीला का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि करीब 12 हजार फुट की ऊंचाई पर बने केदारनाथ मंदिर के आसपास सब कुछ बह गया है।
केदारनाथ मंदिर के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने बताया कि मंदिर को छोड़ यहां सब कुछ तबाह हो चुका है। मंदिर में कई फीट मलबा जमा हुआ है। मंदिर के अंदर कई लोगों ने शरण ले रखी है। केदारनाथ में 1,500 से 2,000 लोग फंसे हुए हैं, जिन्हें सुरक्षित निकालने के लिए दो हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं।
यह मंदिर सैकड़ों साल से जिस जगह पर बना है, वह सुरक्षित मानी जाती रही है, लेकिन इस बार मंदिर के ठीक पीछे पहाड़ों से सैलाब आया और उसके साथ आए मलबे में मंदिर का चबूतरा दब गया। मंदिर का एक हिस्सा मलबे में दब गया है और आसपास पानी की धारा बहती हुई दिख रही है।
मंदिर सुरक्षित है, लेकिन मंदर परिसर में पानी और मलबे का ढेर लगा है। पास के इलाके में कम से कम 50 शव देखे गए हैं। 700 से ज्यादा खच्चर वाले भी लापता हैं। आसपास बने ढांचों में से अधिकतर गायब हैं। मंदिर परिसर के पास चहल-पहल वाले राम बाड़ा के वजूद पर सवालिया निशान लग गया है। हेलीकॉप्टर से ली गई तस्वीरों में नजर आ रहा है कि यह इलाका पानी में डूबा हुआ है। यहां बड़ी संख्या में यात्री लापता हैं।
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ के धारचुला तहसील में भी हालात बदतर हैं। जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, उसमें यहां के काली नदी का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। नदी ने धारचुला में भारत−नेपाल सीमा के गांवों में भयानक तबाही मचाई है। कई घर नदी के तेज बहाव की चपेट में आ चुके हैं।
यहां के सोबला गांव का नामोनिशान मिट गया है। गांव के तकरीबन सौ घर पूरी तरह से तबाह हो गए हैं, जबकि दर्जनों लोग लापता बताए जा रहे हैं। गौरतलब है कि काली नदी ही आगे उत्तर प्रदेश में जाकर शारदा के नाम से जानी जाती है और यहां पानी के तेज बहाव की वजह से उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जैसे इलाकों में बहने वाली शारदा नदी का जलस्तर भी काफी बढ़ गया है।
केदारनाथ मंदिर के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने बताया कि मंदिर को छोड़ यहां सब कुछ तबाह हो चुका है। मंदिर में कई फीट मलबा जमा हुआ है। मंदिर के अंदर कई लोगों ने शरण ले रखी है। केदारनाथ में 1,500 से 2,000 लोग फंसे हुए हैं, जिन्हें सुरक्षित निकालने के लिए दो हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं।
यह मंदिर सैकड़ों साल से जिस जगह पर बना है, वह सुरक्षित मानी जाती रही है, लेकिन इस बार मंदिर के ठीक पीछे पहाड़ों से सैलाब आया और उसके साथ आए मलबे में मंदिर का चबूतरा दब गया। मंदिर का एक हिस्सा मलबे में दब गया है और आसपास पानी की धारा बहती हुई दिख रही है।
मंदिर सुरक्षित है, लेकिन मंदर परिसर में पानी और मलबे का ढेर लगा है। पास के इलाके में कम से कम 50 शव देखे गए हैं। 700 से ज्यादा खच्चर वाले भी लापता हैं। आसपास बने ढांचों में से अधिकतर गायब हैं। मंदिर परिसर के पास चहल-पहल वाले राम बाड़ा के वजूद पर सवालिया निशान लग गया है। हेलीकॉप्टर से ली गई तस्वीरों में नजर आ रहा है कि यह इलाका पानी में डूबा हुआ है। यहां बड़ी संख्या में यात्री लापता हैं।
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ के धारचुला तहसील में भी हालात बदतर हैं। जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, उसमें यहां के काली नदी का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। नदी ने धारचुला में भारत−नेपाल सीमा के गांवों में भयानक तबाही मचाई है। कई घर नदी के तेज बहाव की चपेट में आ चुके हैं।
यहां के सोबला गांव का नामोनिशान मिट गया है। गांव के तकरीबन सौ घर पूरी तरह से तबाह हो गए हैं, जबकि दर्जनों लोग लापता बताए जा रहे हैं। गौरतलब है कि काली नदी ही आगे उत्तर प्रदेश में जाकर शारदा के नाम से जानी जाती है और यहां पानी के तेज बहाव की वजह से उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जैसे इलाकों में बहने वाली शारदा नदी का जलस्तर भी काफी बढ़ गया है।
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