
कसाब की फांसी के फौरन बाद सबको अफ़ज़ल का खयाल आया जिसे संसद पर हमले के जुर्म में फांसी की सज़ा सुनाई गई है। इत्तेफाक से बुधवार को ही अफ़ज़ल की फाइल कुछ आगे भी बढ़ी।
कसाब की फांसी के फौरन बाद बीजेपी के तमाम बड़े नेताओं ने अफ़ज़ल का सवाल उठाया।
नरेंद्र मोदी ने भी इस मसले पर ट्वीट किया और दिग्विजय सिंह ने भी अफज़ल के मामले में जल्दी फ़ैसले की बात कही।
दोपहर तक यह खबर भी चली आई कि राष्ट्रपति ने गृह मंत्रालय की राय के लिए अफ़ज़ल की फाइल भेज दी है। गृह मंत्री ने कहा कि इसपर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
दरअसल, बुधवार को राष्ट्रपति ने 16 लोगों की 12 अर्ज़ियां गृह मंत्रालय को भेजीं।
कानून मंत्री का कहना है कि यह राष्ट्रपति का विशेषाधिकार है कि वह कब फ़ैसला करें।
एनडीटीवी से बातचीत में अश्विनी कुमार ने कहा कि राष्ट्रपति सही वक्त पर सही फैसला करेंगे।
वैसे, कसाब के मामले में इतनी जल्दी फ़ैसला यह सवाल उठा रहा है कि बाकी मामलों में इतनी तेज़ी क्यों नहीं दिखाई गई। हालांकि कसाब की दया याचिका पर दो महीने के अंदर फैसला करके राष्ट्रपति ने एक नई सोच की ओर इशारा किया है... अब सबको उम्मीद है कि राष्ट्रपति दूसरी दया याचिकाओं पर जल्दी ही फैसला करेंगे।
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