जाति जनगणना पर 9 दलों के नेताओं संग हेमंत सोरेन ने की अमित शाह से मुलाकात, सौंपा संयुक्त ज्ञापन

सभी नेताओं ने अमित शाह को एक ज्ञापन भी सौंपा है, जिस पर सभी नेताओं के हस्ताक्षर भी हैं. ज्ञापन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित किया गया है. तीन पन्ने के ज्ञापन में लिखा गया है कि आजादी के बाद से आज तक की कराई जनगणना में जातिगत आंकड़े नहीं रहने से विशेषकर पिछड़े वर्ग के लोगों को विशेष सुविधाएं पहुंचाने में कछिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.

जाति जनगणना पर 9 दलों के नेताओं संग हेमंत सोरेन ने की अमित शाह से मुलाकात, सौंपा संयुक्त ज्ञापन

नौ दलों के नेताओं के प्रतिनिधिमंडल के साथ हेमंत सोरेन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की.

नई दिल्ली:

झारखंड (Jharkhand) के मुख्य मंत्री हेमंत सोरेन (CM Hemant Soren) के नेतृत्व में राज्य के सभी दलों के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) से मिलकर जातिगत जनगणना (Caste Census) कराने की मांग की और इस सम्बंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा. प्रतिनिधिमंडल में मुख्य विपक्षी दल बीजेपी समेत कुल नौ दलों के नेता शामिल थे.

हेमंत सोरेन ने केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात करने के बाद मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की हैं और लिखा है, "झारखण्ड से सर्वदलीय शिष्टमंडल के सदस्यों के साथ दिल्ली में माननीय गृह मंत्री आदरणीय श्री @AmitShah जी से मुलाकात कर उन्हें जाति आधारित जनगणना कराने हेतु माँग पत्र सौंपा.. जाति आधारित जनगणना समय की माँग है.."

सभी नेताओं ने संयुक्त रूप से अमित शाह को एक ज्ञापन भी सौंपा है, जिस पर सभी नेताओं के हस्ताक्षर भी हैं. ज्ञापन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित किया गया है. तीन पन्ने के ज्ञापन में लिखा गया है कि आजादी के बाद से आज तक की कराई जनगणना में जातिगत आंकड़े नहीं रहने से विशेषकर पिछड़े वर्ग के लोगों को विशेष सुविधाएं पहुंचाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.

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ज्ञापन में आगे लिखा गया है, "वर्ष 2021 में प्रस्तावित जनगणना में युगों-युगों से उत्पीड़ित, उपहासित, उपेक्षित और वंचित पिछड़े एवं अति पिछड़े वर्गों की जातीय जनगणना नहीं कराने की सरकार द्वारा संसद में लिखित सूचना दी गई है जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है. पिछड़े-अति पिछड़े वर्ग युगों से अपेक्षित प्रगति नहीं कर पा रहे हैं. ऐसे में यदि अब जातिगत जनगणना नहीं करायी जाएगी तो पिछड़ी/ अति पिछड़ी जातियों की शैक्षणिक, सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक स्थिति का ना तो सी आंकलन हो सकेगा, ना ही उनकी बेहतरी व उत्थान संबंधित समुचित नीति निर्धारण हो पाएगा और ना ही उनकी संख्या के अनुपात में बजट का आवंटन हो सकेगा."

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