नई दिल्ली:
भारत दुनिया के शीर्ष 10 संपदा बाजारों (वेल्थ मार्केट) की सूची में इस साल छठे पायदान पर आ सकता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 2011 में भारत ने स्पेन को पछाड़कर संपदा बाजार में 10वां स्थान हासिल किया था।
डाटामॉनिटर 2012 की वैश्विक संपदा बाजार रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरो के भविष्य को लेकर अनिश्चितता और यूरोप के ऋण संकट की वजह से समस्याएं बनी रहेंगी, पर इन सबके बीच कुछ उभरते बाजारों के आगे बढ़ने की संभावना है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि संपदा बाजार का रुख अब उभरते बाजारों की ओर झुक रहा है। आगे चलकर उभरते बाजार इस मामले में पश्चिमी यूरोपीय देशों को पीछे छोड़ सकते हैं। 2011 के अंत तक शीर्ष अरबपतियों के हिसाब से शीर्ष दस संपदा बाजार क्रमश: अमेरिका, जापान, चीन, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, कनाडा, फ्रांस, ब्राजील और भारत थे।
इसके अलावा ब्राजील, चीन और भारत जैसे उभरते बाजारों के अरबपतियों के पास मौजूद तरल परिसंपत्तियां 2015 में बढ़कर 4,600 अरब डॉलर पर पहुंच जाने का अनुमान है, जो 2006 में 1,500 अरब डॉलर थीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अपनी बेहतर वृद्धि दर के बूते 2012 के अंत तक इस सूची में छठे पायदान पर पहुंच सकता है।
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2015 में इस सूची में अमेरिका पहले स्थान पर होगा, जबकि चीन दूसरे नंबर पर होगा। उसके बाद जापान, ब्रिटेन, जर्मनी, भारत, ब्राजील, इटली, कनाडा और फ्रांस का नंबर आएगा।
डाटामॉनिटर 2012 की वैश्विक संपदा बाजार रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरो के भविष्य को लेकर अनिश्चितता और यूरोप के ऋण संकट की वजह से समस्याएं बनी रहेंगी, पर इन सबके बीच कुछ उभरते बाजारों के आगे बढ़ने की संभावना है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि संपदा बाजार का रुख अब उभरते बाजारों की ओर झुक रहा है। आगे चलकर उभरते बाजार इस मामले में पश्चिमी यूरोपीय देशों को पीछे छोड़ सकते हैं। 2011 के अंत तक शीर्ष अरबपतियों के हिसाब से शीर्ष दस संपदा बाजार क्रमश: अमेरिका, जापान, चीन, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, कनाडा, फ्रांस, ब्राजील और भारत थे।
इसके अलावा ब्राजील, चीन और भारत जैसे उभरते बाजारों के अरबपतियों के पास मौजूद तरल परिसंपत्तियां 2015 में बढ़कर 4,600 अरब डॉलर पर पहुंच जाने का अनुमान है, जो 2006 में 1,500 अरब डॉलर थीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अपनी बेहतर वृद्धि दर के बूते 2012 के अंत तक इस सूची में छठे पायदान पर पहुंच सकता है।
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2015 में इस सूची में अमेरिका पहले स्थान पर होगा, जबकि चीन दूसरे नंबर पर होगा। उसके बाद जापान, ब्रिटेन, जर्मनी, भारत, ब्राजील, इटली, कनाडा और फ्रांस का नंबर आएगा।
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