दिल्ली सरकार खाद्य सुरक्षा योजना में बदलाव की बजाय नई स्कीम लाए तो हमें आपत्ति नहीं, राशन योजना पर केंद्र का जवाब

केंद्र सभी राज्यों में खाद्य सुरक्षा कानून के तहत समान बर्ताव कर रहा है. लेकिन दिल्ली सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना (National Food Security Act) में बदलाव कर राज्य के उपभोक्ताओं के हितों की कीमत पर ज्यादा दाम वसूलना चाहती है.

दिल्ली सरकार खाद्य सुरक्षा योजना में बदलाव की बजाय नई स्कीम लाए तो हमें आपत्ति नहीं, राशन योजना पर केंद्र का जवाब

केंद्र सरकार ने कहा है कि दिल्ली सरकार को उसकी इच्छानुसार राशन वितरण से नहीं रोका है.

नई दिल्ली:

केंद्र सरकार ने दिल्ली में 72 लाख राशन कार्डधारकों को फायदा पहुंचाने वाली डोर टू डोर राशन स्कीम (Home Delivery of Ration Scheme) को रोकने के आप सरकार के आरोपों को गलत औऱ राजनीति से प्रेरित बताया है. खाद्य मंत्रालय ने दिल्ली सरकार के आऱोपों पर एक विस्तृत बयान जारी किया. लिहाजा यह कहना गलत है कि केंद्र सरकार उसे ऐसा कुछ करने से रोक रही है. सरकार भला अपने देश के नागरिकों को किसी कल्याणकारी योजना से वंचित क्यों करेगी. आप सरकार नई योजना लेकर आए और उसे कुछ भी नाम दे. केंद्र सरकार उसके लिए राशन मुहैया कराने को तैयार है. लेकिन मौजूदा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून (NFSA) की मौजूदा योजना को वह क्यों बिगाड़ना चाहती है?

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केंद्र सभी राज्यों में खाद्य सुरक्षा कानून के तहत समान बर्ताव कर रहा है. लेकिन दिल्ली सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना (National Food Security Act) में बदलाव कर राज्य के उपभोक्ताओं के हितों की कीमत पर ज्यादा दाम वसूलना चाहती है. इसमें कहा गया कि केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार को उसकी इच्छानुसार राशन वितरण से नहीं रोका है. वे किसी भी अन्य योजना के तहत ऐसा कर सकते हैं. केंद्र सरकार उसके लिए राशन मुहैया कराएगी. इसमें समस्या कहां है? दिल्ली सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत अपना 37,400 टन का पूरा अनाज का कोटा उठाती रही है और उसका 90 फीसदी तक बांटती रही है. जहां तक प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना की बात है तो दिल्ली सरकार 63,200 मीट्रिक टन राशन उठाया है, जो मई में उसके आवंटन का 176 फीसदी है. इसमे से 73 फीसदी बांटा भी गया है.

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भारत सरकार ने उन्हें केवल नियम की स्थिति के बारे में सूचित किया था. आगे यह नोट किया जा सकता है कि दिल्ली सरकार ने भारत सरकार के कई प्रयासों के बावजूद गरीब और कमजोर नागरिकों-ओएनओआरसी के लाभ के लिए है, इस पर कार्रवाई नहीं की है. इससे दिल्ली सरकार को बिना कोट के दिल्ली के दस लाख से अधिक प्रवासी कामगारों और एनएफएसए के तहत केंद्रीय आवंटन की कीमत पर सेवा मिल सकती थी. जीएनसीटीडी (GNCTD) ने अपने लगभग 2000 एफपीएस (FPS) में अप्रैल 2018 में ईपीओएस (EPOS) मशीनों के उपयोग को निलंबित कर दिया था. कई दौर के अनुनय के बाद, हाल ही में केवल 2000 से अधिक एफपीएस (FPS) पर ईपीओ स्थापित किए गए हैं, लेकिन इनका उपयोग ऑनलाइन पीडीएस (PDS) लेनदेन के लिए पूरी तरह से नहीं किया गया है. यह सीधे तौर पर एनएफएसए (NFSA) और पीएमजीकेए (PMGKA) के तहत पारदर्शिता और सही लक्ष्यीकरण को कमजोर करता है.

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जबकि पीडीएस (PDS) लेनदेन के आधार प्रमाणीकरण का राष्ट्रीय औसत लगभग 80 प्रतिशत है, यह दिल्ली में शून्य है. यह सीधे तौर पर दिल्ली में लाखों प्रवासियों को पोर्टेबिलिटी के लाभों से वंचित करता है और साथ ही साथ खाद्यान्नों के डायवर्जन को प्रोत्साहित करता है. ईपीओ (EPO) के काम नहीं करने के कारण दिल्ली का खाद्यान्न वितरण डेटा दैनिक आधार पर उपलब्ध नहीं है, जिससे निगरानी करना मुश्किल हो जाता है, जबकि यूपी, बिहार जैसे राज्य नियमित टीपीडीएस (TPDS) और पीएमजीकेएवाई (TMGKAY) दोनों के तहत ईपीओ (EPO) के साथ-साथ 95 प्रतिशत से अधिक आधार प्रमाणित लेनदेन कर रहे हैं. जैसा कि ऊपर बताया गया है, जीएनसीटीडी (GNCTD) के खाद्य विभाग ने स्थिति की तात्कालिकता पर सक्रिय और सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी है.

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