
दिल्ली विधानसभा में शुक्रवार को दोपहर 2 बजे स्वास्थ्य विभाग की CAG रिपोर्ट पेश (CAG Report On Delhi Health Servicies) होनी है. यह रिपोर्ट एक बार फिर से अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की परेशानी बढ़ा सकती है. दरअसल दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं पर CAG की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. जिसे लेकर आज विधानसभा में एक बार फिर से हंगामे के आसार हैं. इस रिपोर्ट में सरकारी सेवाओं और स्वास्थ्य विभाग की बदहाल स्थिति को उजागर किया गया है. रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि केंद्र ने जितना फंड स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दिया, उतना खर्च ही नहीं किया गया. जबकि अस्पतालों में बेड और मेडिकल स्टाफ की भारी कमी है. रिपोर्ट में और क्या बताया गया है, यहां जानें.
CAG की रिपोर्ट में क्या-क्या है?
- भारत सरकार ने कोरोना महामारी के दौरान 787 करोड़ रुपए जारी किए थे, लेकिन खर्च केवल 582 करोड़ रुपए किए गए.
- दिल्ली सरकार ने कोरोना महामारी से लड़ने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों के लिए दिए गए 52 करोड़ में से सिर्फ 30 करोड़ ही खर्च किए.
- कोरोना की दवा और PPE kit के लिए 119 करोड़ रुपए जारी किए गए थे, लेकिन खर्चा सिर्फ 83 करोड़ रुपए का हुआ.
- दिल्ली सरकार को 2016 से 2021 तक अस्पतालों में बेडों की संख्या 32000 करनी थी. लेकिन 1357 बेड ही बढ़ाए गए. इसकी वजह से या तो एक बेड पर कई मरीज़ों का इलाज हुआ या फिर मरीजों का इलाज फर्श पर किया गया.
- दिल्ली सरकार ने सिर्फ 3 नए अस्पताल बनाए या फिर उन अस्पतालों का आधारभूत ढांचा बढ़ाया, जिनको पिछली सरकारों ने शुरू करवाया था.
- इंदिरा गांधी अस्पताल, बुराड़ी अस्पताल और MA डेंटल अस्पताल की लागत छह साल विलंब होने से बढ़ गई
- दिल्ली के स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े पैमाने पर खाली पद भरे ही नहीं गए, जिससे आधारभूत ढांचा ख़राब हुआ. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में 3268 पद DGHS में 1532 पद स्टेट हेल्थ मिशन में 1036 पद ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट में 75 पद ख़ाली हैं.
- भर्तियां नहीं होने की वजह से दिल्ली के मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज में 503 पद, लोक नायक अस्पताल में 581 पद, RGSSH में 579 पद ख़ाली रह गए.
- पद ख़ाली होने से मरीज़ों के इलाज में देरी होने लगी सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी और जलने वाली सर्जरी में लोकनायक जय प्रकाश जैसे अस्पताल में 12 महीने की वेटिंग है जबकि बच्चों की सर्जरी में साल भर की वेटिंग चाचा नेहरु बाल चिकित्सालय में है
- CAT की एंबुलेंस बिना जरूरी सुविधाओं के चल रही है.
- 21 मोहल्ला क्लीनिकों में शौचालय, 15 मोहल्ला क्लिनिकों में पॉवर बैकअप, 6 मोहल्ला क्लिनिकों के पास चेकअप के लिए मेज़ तक नहीं हैं.
- लोक नायक अस्पताल के सर्जरी विभाग और बर्न और प्लास्टिक सर्जरी विभाग में अहम सर्जरी के लिए वेटिंग टाइम 2-3 महीने और 6-8 महीने है.
- CNBC में, बाल चिकित्सा सर्जरी के लिए वेटिंग टाइम 12 महीने है. चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय में करीब 10 अहम उपकरण काम नहीं कर रहे हैं.
CAG की रिपोर्ट में खुली AAP के दावों की पोल
आम आदमी पार्टी मोहल्ला क्लीनिकों की तारीफ करते नहीं थकती है. लेकिन सीएजी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इन मोहल्ला क्लीनिकों में डॉक्टर ज्यादातर मरीजों को पूरा एक मिनट भी नहीं देखते हैं. जरूरी मेडिकल इक्विपमेंट्स की भी कमी है. CAG रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में, 6 मॉड्यूलर और सेमी-मॉड्यूलर ओटी, स्टोन सेंटर, ट्रांसप्लांट आईसीयू और वार्ड, किचन, 77 प्राइवेट, विशेष कमरे, 16 आईसीयू बेड, 154 सामान्य बेड और रेजिडेंट डॉक्टर्स हॉस्टल काम नहीं कर रहे.
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