हरियाणा में किसानों के व्यापक विरोध प्रदर्शन के बाद जेजेपी विधायक ने माफी मांगी

किसान पिछले साल जून से केंद्र के कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं, आज संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्यों ने आंदोलन का एक साल पूरा होने पर संपूर्ण क्रांति दिवस मनाया

हरियाणा में किसानों के व्यापक विरोध प्रदर्शन के बाद जेजेपी विधायक ने माफी मांगी

हरियाणा के टोहाना में मार्च करते हुए किसान.

खास बातें

  • जेजेपी के विधायक देवेंद्र सिंह बबली से किसानों की झड़प हुई
  • किसानों ने चेतावनी दी थी कि माफी नहीं मांगी तो सभी थानों को घेरेंगे
  • प्रदर्शनकारियों के खिलाफ तीन मामले दर्ज किए गए
चंडीगढ़:

जेजेपी के हरियाणा के विधायक देवेंद्र सिंह बबली, जिनकी पार्टी का सत्तारूढ़ भाजपा के साथ गठबंधन है,  ने मंगलवार को राज्य के टोहाना शहर में किसानों के एक समूह पर अभद्र टिप्पणी करने के लिए माफी मांगी है. किसान केंद्र के विवादास्पद कृषि कानूनों का विरोध कर रहे थे. बबली ने शनिवार की शाम को प्रदर्शनकारी किसानों के नेताओं के साथ एक बैठक के बाद कहा, "मैं उन लोगों को माफ करता हूं जो एक जून को हुई घटना में शामिल थे और उन शब्दों का इस्तेमाल करने के लिए माफी मांगता हूं जो एक जन प्रतिनिधि को शोभा नहीं देते. मुझे खेद है और मैं माफी मांगता हूं." 

राकेश टिकैत किसानों के विरोध के प्रभावशाली चेहरे के रूप में उभरे हैं. उन्होंने आज इससे पहले टोहाना पुलिस स्टेशन तक सैकड़ों किसानों के मार्च का नेतृत्व किया. उन्होंने विधायक बबली की माफी स्वीकार कर ली है. उन्होंने कहा कि 'यह अच्छा है कि विधायक ने माफी मांग ली है. अब (किसान) समिति विधायक के साथ बातचीत कर रही है और आगे का फैसला करेगी.'

इससे पहले हरियाणा के टोहाना में शनिवार को सैकड़ों किसानों ने पुलिस की छापेमारी और जेजेपी विधायक देवेंद्र सिंह बबली के साथ एक विवाद के बाद अपने तीन सहयोगियों की गिरफ्तारी के विरोध में मार्च निकाला. किसानों का राकेश टिकैत और गुरनाम सिंह चढूनी जैसे शीर्ष नेताओं ने नेतृत्व किया. किसानों का संगठन संयुक्त किसान मोर्चा केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ साल भर से आंदोलन कर रहा है. बताया जाता है कि देवेंद्र बबली ने टोहाना में विरोध प्रदर्शन करने वाले किसानों के प्रति अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया.

हरियाणा में प्रदर्शनकारी किसानों ने बुधवार को कहा था कि यदि जननायक जनता पार्टी (JJP) के विधायक देवेन्द्र सिंह बबली फतेहाबाद के टोहाना में एक प्रदर्शन के दौरान कथित रूप से उन्हें गालियां देने को लेकर छह जून तक माफी नहीं मांगते हैं तो वे राज्य में सभी थानों का घेराव करेंगे.

बबली ने पहले किसानों के आरोपों से इनकार किया था और इसके बजाय किसानों के एक समूह पर उनकी "हत्या का प्रयास" करने का आरोप लगाया था. वे एक सरकारी अस्पताल में टीकाकरण शिविर का उद्घाटन करने जा रहे थे, तभी यह विवाद हुआ था.

आज देवेंद्र बबली ने टोहाना के बलियाला रेस्ट हाउस में किसान नेताओं के साथ बातचीत की. गुरुवार को किसानों ने विधायक का पुतला फूंका था और अपनी "टिप्पणियों" के लिए माफी मांगने की मांग की थी.

मंगलवार को टोहाना में हुई झड़प के सिलसिले में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज की गई हैं. इस झड़प के दौरान किसानों ने देवेंद्र बबली के वाहन को घेर लिया था. विधायक के साथ मारपीट करने के आरोप में किसानों पर मामला दर्ज किया गया है. अगले दिन किसानों द्वारा उनके घर को घेरने के बाद एक तीसरा मामला दर्ज किया गया.

किसानों ने कहा था कि अगर विधायक माफी नहीं मांगते हैं तो वे पूरे हरियाणा के पुलिस थानों को घेर लेंगे. किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने की अपील की है. उन्होंने कहा, "हमें ऐसा कोई कदम नहीं उठाना है जो इस आंदोलन को तोड़ दे. यह आंदोलन उस स्तर पर है कि एक छोटी सी चूक भी हमें भारी पड़ सकती है. इसे हमें शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखना होगा."

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने गुरुवार को कहा कि उन्हें किसानों द्वारा विरोध प्रदर्शन शुरू करने से कोई समस्या नहीं है, लेकिन उन्हें "कानून और व्यवस्था को अपने हाथ में न लेने" के लिए आगाह किया गया है.  पीटीआई के मुताबिक उन्होंने कहा कि, "... अगर कोई विरोध शांतिपूर्ण तरीके से होता है, तो सरकार को उस पर कोई आपत्ति नहीं है. हालांकि, अगर कोई कानून-व्यवस्था को अपने हाथ में लेता है, तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा."

उन्होंने कहा, "और उन मामलों में कानून के अनुसार जो भी कार्रवाई करने की जरूरत है, उपायुक्तों को कहा गया है कि वे संकोच न करें और कार्रवाई करें."


बीजेपी नेताओं के घरों के बाहर किसानों का विरोध प्रदर्शन, कृषि कानूनों की प्रतियां जलाईं

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इससे एक दिन पहले हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने भी ऐसी ही चेतावनी जारी की थी. किसान पिछले साल जून से कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं. वे कहते हैं कि उन्हें कॉर्पोरेट हितों की दया पर छोड़ दिया जाएगा. सरकार का कहना है कि तीनों कानून किसानों के हित में हैं. कई दौर की वार्ता इस गतिरोध को तोड़ने में विफल रही है.