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This Article is From Jun 20, 2012

मोदी के समर्थन में बागी हुआ नीतीश का एक मंत्री

मोदी के समर्थन में बागी हुआ नीतीश का एक मंत्री
पटना: बिहार के पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री गिरिराज सिंह ने अपने कड़े तेवर बरकरार रखते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपना समर्थन दोहराया और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को चुनौती दी कि असहज महसूस करने की स्थिति में वह उन्हें बर्खास्त कर दें।

प्रधानमंत्री पद के लिए धर्मनिरपेक्ष उम्मीदवार की चर्चा नीतीश कुमार द्वारा छेड़े जाने के बाद गिरिराज ने मंगलवार को बिहार के मुख्यमंत्री के खिलाफ परोक्ष रूप से हमला बोला था। अपने आक्रामक तेवर को गिरिराज सिंह ने आज भी जारी रखा।

भाजपा के कोटे के इस मंत्री ने कहा, ‘‘मैं गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन करना जारी रखूंगा। वह एक धर्मनिरपेक्ष नेता हैं और गुजरात के लोगों का पूरा समर्थन उन्हें प्राप्त है। मेरे समर्थन को लेकर यदि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार असहज महसूस कर रहे हैं तो मुझे मंत्री पद से हटा दें।’’ उन्होंने कहा, ‘‘नीतीश कुमार यदि मोदी के समर्थन को लेकर मेरी बात से असहमत हैं तो वह मुझे मंत्री पद से बर्खास्त कर दें।’’ पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति चुनाव के समय में राजग के लिए प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का मुद्दा छेड़ने का प्रकरण समझ में नहीं आ रहा है।

गिरिराज ने कहा, ‘‘लोकसभा चुनाव को लेकर प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का मुद्दा इस समय छेड़ना बिन बादल बरसात की तरह है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘नरेंद्र मोदी सहित भाजपा का प्रत्येक नेता और कार्यकर्ता धर्मनिरपेक्ष हैं। धर्मनिरपेक्षता पर किसी का एकाधिकार नहीं है।’’

मंत्री ने कहा, ‘‘गुजरात की जनता वोट देकर मोदी को सत्ता में लायी है। समाज के सभी वर्ग का उन्हें समर्थन प्राप्त है। सांप्रदायिक कहकर आरोप लगाना गलत है। जनसंघ और भाजपा पर भी इस प्रकार के आरोप लगे लेकिन पार्टियों की सरकार बनी।’’ गिरिराज ने नीतीश कुमार पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए मंगलवार को उन्हें ‘छद्म धर्मनिरपेक्ष' करार दिया था। अपनी नाराजगी का इजहार करते हुए वह नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में भी शामिल नहीं हुए थे।

बहरहाल जदयू के प्रवक्ता और विधान पार्षद नीरज कुमार ने कहा, ‘‘भाजपा यदि नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करती है तो जदयू राजग गठबंधन को ‘टाटा’ और ‘गुडबाय’ कह देगा।’’ कुमार ने कहा कि ऐसा होता है तो जदयू को अपना समर्थन वापस लेने से भी गुरेज नहीं होगा।

जदयू के एक अन्य नेता और पंचायती राज मंत्री भीम सिंह ने कहा, ‘‘भाजपा एक सांप्रदायिक पार्टी के नाम पर अछूत बनी हुई थी। 1996 में जदयू के गठजोड़ करने से उसकी (भाजपा) स्वीकार्यता बढ़ी। जब तक जदयू का साथ नहीं था केवल शिवसेना ही भाजपा की सहयोगी थी।’’ सिंह ने कहा कि जदयू को साथ लेकर चलने के कारण ही भाजपा को अपना सांप्रदायिक एजेंडा छोड़ना पड़ा। यही कारण है कि इसकी स्वीकार्यता बढ़ी।

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