ड्रग्स पर लगाम लगाने वाले कड़े कानून में गलती को 7 साल बाद किया गया ठीक, सरकार ने बताया 'चूक'

नारकोटिक ड्रग्स और नशीली पदार्थों पर नियंत्रण के लिए नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट को 1985 में अमल में लाया गया था. 

ड्रग्स पर लगाम लगाने वाले कड़े कानून में गलती को 7 साल बाद किया गया ठीक, सरकार ने बताया 'चूक'

15 हजार करोड़ की हेरोइन जब्त होने के बाद हुआ गलती का खुलासा (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नई दिल्ली:

ड्रग्स रोधी सख्त कानून 'नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट (NDPS Act) में एक त्रुटि सामने आई. सरकार ने इसे "चूक" बताया है और सात सालों बाद एक अध्यादेश के माध्यम से इस भूल को ठीक किया गया. जिस पर गुरुवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने हस्ताक्षर किए. 

साल 2014 में, कानून के सबसे कड़े प्रावधानों में से एक -धारा 27 A- में संशोधन के बाद एक अहम सब-सेक्शन को शामिल नहीं किया गया था,  जिसमें ड्रग्स की अवैध तस्करी के वित्तपोषण के लिए 10 साल की सजा की बात कही गई है. इस प्रावधान का इस्तेमाल  एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े ड्रग्स केस में एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती की गिरफ्तारी समेत कई अन्य हाईप्रोफाइल केस में हुआ है. 

हाल ही में गुजरात के मुंदड़ा बंदरगाह पर 15,000 करोड़ रुपये की तीन टन हेरोइन की जब्ती के बाद इस त्रुटि का पता चला और इसे ठीक किया गया, जहां अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के लिए प्रावधान लागू किया गया है. 

रिया चक्रवर्ती के वकील सतीश मानशिंदे ने जोर दिया कि इस बदलाव को पूर्व की तिथि (Retrospective) से लागू नहीं किया जा सकता है. उन्होंने एनडीटीवी से कहा, "यह अध्यादेश उस गलती को ठीक करने के लिए है, जो पहले की गई थी. हालांकि यह कानून और गलती को ठीक करने के लिए किया गया है. यह 30 सितंबर से पहले लंबित मामलों पर रेट्रोस्पेक्टिव तरह से लागू नहीं किया जा सकता क्योंकि यह उन लोगों के लिए एक नई सजा का प्रावधान करता है जो संशोधन के दायरे में आ सकते हैं. दंडात्मक कानून किसी भी परिस्थिति में पूर्व से प्रभावी नहीं हो सकते हैं..."

नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस के परिचालन से जुड़े नियंत्रण और विनियमन के वास्ते कड़े प्रावधान करने के लिए नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट को 1985 में अमल में लाया गया था. 

एक साल बाद, गृह मंत्रालय के अधीन नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की स्थापना की गई थी. 1985 के कानून को कम से कम तीन बार संशोधित किया गया है- 1989, 2001 और 2014. 

हालांकि, 2014 में कानून की धारा 2 में एक सब सेक्शन के रूप में (viiia) एसेंशियल नारकोटिक्स ड्रग्स नाम का एक नया टर्म जोड़ा गया. एसेंशियल नारकोटिक्स ड्रग्स  में चिकित्सा और वैज्ञानिक इस्तेमाल के लिए केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित ड्रग्स को परिभाषित किया गया. 

इस संशोधन के साथ ड्रग्स (दवाओं) की "अवैध तस्करी" से जुड़ा सब सेक्शन का क्रम बदलकर सब सेक्शन (viiib) हो गया, जो कि  पहले क्लॉज (i से v) के साथ सब सेक्शन (viiia) के रूप में वर्णित था.

कानून के मुताबिक, एनडीपीएस अधिनियम में ड्रग्स की अवैध तस्करी एक महत्वपूर्ण धारा है क्योंकि यह नारकोटिक्स ड्रग्स के "उत्पादन, निर्माण, अपने पास रखने, बिक्री, खरीद, परिवहन, भंडारण, छुपाना, उपयोग या उपभोग, एक से दूसरे राज्य भेजना, भारत में आयात, भारत से निर्यात के अलावा इन गतिविधियों के वित्तपोषण से भी जुड़ा है.

एनडीपीएस अधिनियम का सबसे कठोर प्रावधान धारा 27 A है, जिसमें "ड्रग्स के अवैध परिवहन के लिए वित्तपोषण और ऐसे अपराध में लिप्त अपराधियों को शरण देने से जुड़े दंड" का विवरण दिया गया है.

एनडीपीएस अधिनियम की धारा 27 ए कहती है कि, "जो कोई भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, धारा 2 के क्लॉज (viiia) के सब-क्लॉज (i) से (v) में निर्दिष्ट गतिविधियों के वित्तपोषण में या इन गतिविधियों में शामिल लोगों को शरण देता है उसे कठोर सजा होगी, जो कि 10 साल से कम नहीं होगी और इसे 20 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है. साथ ही एक लाख रुपये कम का जुर्माना भी होगा, जिसे दो लाख रुपये तक बढ़ाया जा सकता है."


2014 के संसोधन में ड्रग्स की अवैध तस्करी से जुड़े नियम की नंबरिग सब-सेक्शन (viiia) से (viiib) कर दी गई, लेकिन इसी बदलाव को एनडीपीएस एक्ट की धारा 27 ए में शामिल नहीं किया गया.  

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