
लोकसभा चुनाव (Election 2019) बीएसपी सुप्रीमो मायावती सोमवार को दिल्ली में सोनिया गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकाक करेंगी. मायावती पहले भी कह चुकी हैं कि अगर उनको प्रधानमंत्री बनने का मौका मिला तो वह उत्तर प्रदेश की अंबेडकरनगर सीट से चुनाव लड़ेंगी. हालांकि इस पद की एक और दावेदार बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी मायावती की इस महात्वाकांक्षा से ज्यादा खुश नहीं हो सकती.हैं खबर यह भी है कि पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) , बीएसपी सुप्रीमो मायावती (Mayawati) और एसपी प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) वोटिंग खत्म होने से पहले दिल्ली में होने वाली मीटिंग को टाल सकते हैं. इस मीटिंग का नेतृत्व कांग्रेस (Congress) द्वारा किया जाना है. सूत्रों का कहना है, ‘आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू बीते हफ्ते बंगाल गए थे और उन्होंने ममता बनर्जी से मुलाकात की थी. लेकिन जब उन्होंने मीटिंग के बारे में बात की तो ममता ने उनसे कहा, ‘जब तक 23 मई को नतीजे नहीं आ जाते तब तक मीटिंग की कोई जरूरत नहीं है. मायावती की तरफ से भी नकारात्मक जवाब ही मिला.' पीएम पद की रेस में अगर मायावती और ममता बनर्जी की बात करें तो भले ममता बनर्जी ने गैर कांग्रेस और गैर बीजेपी का नारा देकर बाकी दलों का नेता बनने की कोशिश कर रही हों लेकिन अब मायावती भी सधे पांव समीकरणों को साधने में जुटी हुई हैं.
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मायावती के लिए क्यों बढ़ रहा है समर्थन
मायावती के लिए समर्थन भी बढ़ रहा है. बीएसपी ने विधानसभा चुनाव से पहले ही कर्नाटक में एचडी देवगौड़ा की पार्टी जनता दल सेक्युलर के साथ गठबंधन किया था और फायदा यह रहा कि उसके कोर वोटरों ने जेडीएस का भरपूर साथ दिया साथ ही बीएसपी एक सीट निकालने में कामयाब हो गई. कर्नाटक का सीएम बनते ही कुमारस्वामी ने कहा हालात बनने पर वह पीएम पद के लिए मायावती का समर्थन करेंगे. इसके बाद हरियाणा के और कद्दावर नेता अभय चौटाला ने भी मायावती को समर्थन की बात कही.
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क्या कांग्रेस करेगी समर्थन?
अगर एनडीए- यूपीए को बहुमत के आसपास सीटें नहीं मिलती है तो कांग्रेस अन्य दल जो यूपीए में साथ नही हैं उनको साथ लेकर देश का पहला दलित पीएम बनाने के लिए मायावती को समर्थन दे सकती है. कांग्रेस के पास दलितों वोटरों का दिल जीतने का भी मौका मिल जाएगा. वैसे भी कांग्रेस नेता सीना ठोक कहते हैं कि उनकी पार्टी ने ही सबसे पहले किसी दलित को कमान सौंपी थी. पहले दलित राष्ट्रपति (केआर नारायणन) बनाया, फिर पहली दलित महिला स्पीकर (मीरा कुमार) को बनाया. सुशील कुमार शिंदे देश के पहले दलित गृहमंत्री बने और कांग्रेस के कार्यकाल में ही देश को पहला दलित प्रधान न्यायाधीश (जस्टिस केजी बालकृष्णन) मिले.
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कहां है मायावती की ताकत
मायावती के पास कम से कम 18 राज्यों में ठीक समर्थन है. उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में उनके पास इतना तो वोट है जो किसी भी गठबंधन को साथी फायदा पहुंचा सकता है. हालांकि बीएसपी की पहुंच अभी उत्तर-पूर्व राज्यों में नहीं हुई है. लेकिन मायावती पीएम की कुर्सी तक पहुंचने के लिए समीकरण ही नहीं अंकगणित भी बहुत कुछ तय करेगा. एनडीए अगर 240 के आसपास सिमट जाए और उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन की 50 सीटें आती हैं तो हो सकता है यूपीए और अन्य दल मिलाकर एक मायावती की अगुवाई में नई सरकार बन सकती है. लेकिन उस परिस्थिति में यूपीए को 100 और अन्य के पास 150 सीटें होनी चाहिए.
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मध्य प्रदेश और राजस्थान है कांग्रेस का सिरदर्द
मध्य प्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस ने सरकार जरूर बनाई है लेकिन वह बीएसपी और अन्य दलों को समर्थन से ही सत्ता में टिकी हुई है. अगर हालात बनने के बाद भी कांग्रेस मायावती का समर्थन नहीं करती है तो बीएसपी सुप्रीमो इन दोनों को सरकारों को अस्थिर करने में ज्यादा देर नहीं लगाएंगी.
क्या बीजेपी दे सकती है मायावती को समर्थन
अगर 150 सीटों के आसपास सिमटती है और एनडीए को कुल 200 सीटें आती हैं तो और यूपी में सपा-बसपा गठबंधन 50 सीटें जीतती है तो इस परस्थिति में बीजेपी भी कांग्रेस को किसी भी कीमत में रोकने के लिए मायावती को पीएम पद का ऑफर दे सकती है. हालांकि ऐसी सरकार कितनी दिन तक चलेगी इसका आकलन भी पुराने इतिहास से तय किया जा सकता है.
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