
पेगासस जासूसी कांड को लेकर देश में सियासी भूचाल मचा हुआ है. इजरायली स्पाइवेयर के जरिये जासूसी की बात सामने आने के बाद से विपक्ष हमलावर है. संसद के मानसूत्र सत्र में भी इसको लेकर हंगामा हो रहा है. विपक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग पर अड़ा है. इस बीच, पेगासस मामले (Pegasus Spyware Scandal) की जांच एसआईटी से कराने को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में दूसरी याचिका दाखिल की गई है. यह याचिका CPM के राज्यसभा सांसद जॉन बृट्टास ने दाखिल की है.
याचिका में कहा गया है कि सरकार तो इस पूरे प्रकरण पर पर्दा डालने में जुटी है. संसद तक को सही जवाब नहीं दिया जा रहा है. पारदर्शी तरीके से बताया नहीं जा रहा कि जासूसी का ये तरीका अधिकृत कैसे है? जबकि आरोप तो जजों, चुनाव आयुक्तों, वकीलों, नौकरशाहों, जांच और खुफिया एजेंसियों के आला अधिकारियों और राजनीतिक हस्तियों के फोन टेप करने तक के हैं. बिना समुचित जांच के इस पूरे प्रकरण के पीछे की सच्चाई का पता कैसे चलेगा?
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता मोहन लाल शर्मा ने भी इस मामले में एसआईटी जांच के आदेश देने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी. याचिका में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी जांच की मांग की गई है और कहा गया है कि इस मामले में शामिल लोगों पर आईपीसी और अन्य कानूनी प्रवाधानों के तहत कार्रवाई की जाए. याचिका में कहा गया है कि क्या पीएम और उनके मंत्री भारत के नागरिकों की जासूसी कर सकते हैं? यह भारतीय लोकतंत्र, न्यायपालिका और देश की सुरक्षा पर गंभीर हमला है.
बता दें कि केंद्र पर पेगासस स्पाइवेयर के जरिए कई नेताओ, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की जासूसी का आरोप लग रहा है. पेगासस स्पाइवेयर को इजरायली कंपनी NSO द्वारा बनाया गया है. कंपनी का दावा है कि इस फर्म का काम इसी तरह के जासूसी सॉफ्टवेयर बनाना है और इन्हें अपराध और आतंकवादी गतिविधियों को रोकने और लोगों के जीवन बचाने के एकमात्र उद्देश्य के लिए सरकारों की खुफिया एजेंसियों को बेचा जाता है.
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