
मई में हुए चुनावों के दौरान केरल में राजनीतिक हिंसा चरम पर थी
कन्नूर:
केरल के कन्नूर में भड़की राजनीतिक हिंसा में सोमवार रात को एक सीपीएम और एक बीजेपी कार्यकर्ता की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। इससे राज्य में एक बार फिर राजनीतिक गहमागहमी का माहौल बन गया है।
हिंसा के दौरान तीन बाइकों पर सवार होकर आए हमलावरों ने सीपीएम नेता धनराज को पय्यानूर में उनके र के बाहर ही मार डाला। सीपीएम नेता को उस समय मारा गया, जब वह रात 10.30 बजे अपने घर के भीतर की ओर जा रहे थे। सीपीएम ने आरोप लगाया है कि ये हमलावर बीजेपी के समर्थक थे।
इसके लगभग एक घंटे बाद ही 6 लोगों ने उसी क्षेत्र में एक ऑटोरिक्शा ड्राइवर की हत्या कर दी, जो बीजेपी समर्थक बताया जा रहा है। ऑटोरिक्शा ड्राइवर सीके रामचंद्रन को चाकू घोंपकर मारा गया।
पुलिस का कहना है कि यह बदले की भावना से की गई हत्या है और हत्यारों की पहचान हो गई है। दोनों ही आरोपी युवा है। इस बीच सीपीएम ने कन्नूर में हड़ताल का आह्वान किया है। पिछली रात जिले में संघर्ष की खबरें थीं, जिनमें सीपीएम-बीजेपी समर्थकों के घरों पर हमले किए गए।
गौरतलब है कि मई में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान कन्नूर और केरल के अन्य भागों में राजनीतिक हिंसा चरम पर थी। राज्य में मतदान से जुड़ी हिंसा के एक हजार से अधिक मामले सामने आए थे, जिनमें से अधिकांश कन्नूर से थे। केरल में 2011 से 2016 के बीच विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 30 कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है।
हिंसा के दौरान तीन बाइकों पर सवार होकर आए हमलावरों ने सीपीएम नेता धनराज को पय्यानूर में उनके र के बाहर ही मार डाला। सीपीएम नेता को उस समय मारा गया, जब वह रात 10.30 बजे अपने घर के भीतर की ओर जा रहे थे। सीपीएम ने आरोप लगाया है कि ये हमलावर बीजेपी के समर्थक थे।
इसके लगभग एक घंटे बाद ही 6 लोगों ने उसी क्षेत्र में एक ऑटोरिक्शा ड्राइवर की हत्या कर दी, जो बीजेपी समर्थक बताया जा रहा है। ऑटोरिक्शा ड्राइवर सीके रामचंद्रन को चाकू घोंपकर मारा गया।
पुलिस का कहना है कि यह बदले की भावना से की गई हत्या है और हत्यारों की पहचान हो गई है। दोनों ही आरोपी युवा है। इस बीच सीपीएम ने कन्नूर में हड़ताल का आह्वान किया है। पिछली रात जिले में संघर्ष की खबरें थीं, जिनमें सीपीएम-बीजेपी समर्थकों के घरों पर हमले किए गए।
गौरतलब है कि मई में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान कन्नूर और केरल के अन्य भागों में राजनीतिक हिंसा चरम पर थी। राज्य में मतदान से जुड़ी हिंसा के एक हजार से अधिक मामले सामने आए थे, जिनमें से अधिकांश कन्नूर से थे। केरल में 2011 से 2016 के बीच विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 30 कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है।
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