असम में को-वैक्सीन की कमी खड़ी कर रही है बड़ी समस्या, दूसरी डोज से चूक रहे हैं लोग

असम में उन लोगों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है जिन्हें कोरोना रोधी टीका के तौर पर को-वैक्सीन की पहली डोज दी गई थी.

असम में को-वैक्सीन की कमी खड़ी कर रही है बड़ी समस्या, दूसरी डोज से चूक रहे हैं लोग

Assam में Covaxine की दूसरी डोज के लिए भटक रहे हैं लोग

असम:

Covaxin Shortage in Assam: असम में उन लोगों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है जिन्हें कोरोना रोधी टीका के तौर पर को-वैक्सीन की पहली डोज दी गई थी. अब दूसरी डोज के लिए लोग अस्पताल दर अस्पताल भटक रहे हैं. स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने पहली डोज के तौर पर को-वैक्सीन की खुराक देने पर रोक लगा दी है ताकि जिन लोगों को इसकी दूसरी खुराक की जरूरत है, उनकी आवश्यकता पूरी हो सके. को-वैक्सीन के लिए अस्पताल के चक्कर लगा रहे है 48 वर्षीय बैसिष्ठ डेका ने NDTV से बात करते हुए कहा राज्य में वैक्सीन की भारी कमी है, मैं पिछले 5 दिनों से गुवाहाटी के हेंगराबारी मेडिकल यूनिट वैक्सीन सेंटर के चक्कर लगा रहा हूं, यहां हर रोज सिर्फ 100 लोगों को टीका लगाया जाता है, और पूरे शहर का इकलौता सेंटर जहां को-वैक्सीन की खुराक लगाई जाती है. 

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उन्होंने बताया कि वैक्सीन लेने की मेरी 42 दिनों की समय सीमा खत्म हो चुकी है. बकौल बैसिष्ठ, आज मेरा 43वां दिन है, पहले मैं सोनापुर गया जहां मुझे पहली खुराक मिली थी. अब उन्होंने बताया है कि उनके पास को-वैक्सीन की खुराक नहीं है, पिछले कुछ दिनों से मैं इस अस्पताल के चक्कर लगा रहा हूं. पहले मुझे पहले 100 लोगों में जगह नहीं मिली थी लेकिन आज सुबह 5 बजे मैं लाइन में लगा था, इसलिए आज पहले 100 लोगों में जगह बना पाया. 

प्राप्त जानकारी के मुताबिक राज्य के कई प्राइवेट अस्पताल में को-वैक्सीन की डोज दी जा रही है लेकिन इसके एवज में 1200 रुपये लिए जा रहे हैं, जिसके कारण कई लोग इससे अछूते रह जा रहे हैं. गुवाहाटी एयरपोर्ट पर लोडर का काम करने वाले अजय कहते हैं कि मेरी को-वैक्सीन की दूसरी खुराक की समय सीमा अगले हफ्ते खत्म होने जा रही है, मुझे सरकार की मदद चाहिए क्योंकि मैं वैक्सीन के लिए 1200 से 1300 रुपये खर्च करने की स्थिति में नहीं हूं. 

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गुवाहाटी से करीब 300 किलोमीटर दूर जोराहट के रहने वाले दीपांकर सैकिया आज दुखी हैं, क्योंकि उनके माता-पिता वैक्सीन की दूसरी डोज तय समय में लेने से चूक गए. वह प्राइवेट अस्पताल में इसकी कीमत अदा करने को भी तैयार थे लेकिन उनके इलाके में यह प्राइवेट अस्पतालों में भी उपलब्ध नहीं है. वह कहते हैं लॉकडाउन के दौरान एक जिले से दूसरे जिले में जाना भी एक समस्या थी, इसी कारण वो डोज लगवाने में चूक गए. उन्होंने कहा कि अभी तक प्रशासन की तरफ कोई भी मदद नहीं मुहैया कराई गई है. हमने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य समेत कई लोगों को टैग करते हुए ट्विटर पर इसकी मांग की लेकिन अभी तक कोई मदद नहीं मिली और आगे भी स्थिति अनिश्चित है. 

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इतना ही नहीं, कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को भी वैक्सीन की खुराक नहीं मिल पाई, जिन पर संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा है. वरिष्ठ नागरिक मिताली रॉय बताती हैं कि वह एक किडनी की मरीज हैं, 27 अप्रैल को को-वैक्सीन की पहली डोज ली थी और करीब 40 दिन पूरे हो चुके हैं. मैने अपने जिले बोंगईगांव और पड़ोसी जिले चिरांग के लगभग सभी सेंटरों पर वैक्सीन पर पता किया है लेकिन कहीं भी वैक्सीन उपलब्ध नहीं है. 


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वैक्सीनेशन की शुरुआत में असम ने राज्य में 1.78 करोड़ लोगों को वैक्सीन की खुराक देने का लक्ष्य रखा था लेकिन अब तक कुल 34.36 लाख लोगों को ही टीका लग पाया है जोकि तय टारगेट का 19.30 फीसदी है. राज्य में अब तक कुल 8.45 लाख लोगों को दोनो खुराक लगी है जोकि 5 फीसदी से भी कम है. प्राप्त जानकारी के अनुसार 4 जून तक असम में कोविशील्ड और कोवैक्सिन की 42.81 लाख खुराकें दी जा चुकी हैं, जिनमें से 80.82 प्रतिशत से अधिक कोविशील्ड की खुराकें शामिल हैं, जबकि मात्र 18.69 फीसदी लोगों को ही को वैक्सीन लगाई गई है.