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This Article is From Dec 13, 2021

12वीं कक्षा बोर्ड परीक्षा मामला : सुप्रीम कोर्ट ने CBSE के वकीलों से कहा - अधिकारियों को "मनाएं" और जवाब दाखिल करें

CBSE 12वीं कक्षा बोर्ड परीक्षा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने CBSE से कहा है कि वो उन छात्रों पर फिर से विचार करे जिन्हें या तो फेल घोषित कर दिया गया या सुधार परीक्षा में बहुत कम अंक मिले. सुप्रीम कोर्ट ने CBSE के वकीलों को कहा कि वो अधिकारियों को "मनाएं" और जवाब दाखिल करें.

12वीं कक्षा बोर्ड परीक्षा मामला : सुप्रीम कोर्ट ने CBSE के वकीलों से कहा - अधिकारियों को "मनाएं" और जवाब दाखिल करें
याचिका में यह तर्क दिया गया था कि सीबीएसई कानूनों का पालन करने के लिए बाध्य है
नई दिल्‍ली:

CBSE 12वीं कक्षा बोर्ड परीक्षा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने CBSE से कहा है कि वो उन छात्रों पर फिर से विचार करे जिन्हें या तो फेल घोषित कर दिया गया या सुधार परीक्षा में बहुत कम अंक मिले. सुप्रीम कोर्ट ने CBSE के वकीलों को कहा कि वो अधिकारियों को "मनाएं" और जवाब दाखिल करें. सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 12वीं के उन छात्रों की याचिका पर सुनवाई की, जिन्हें या तो फेल घोषित कर दिया गया या सुधार परीक्षा में बहुत कम अंक मिले. याचिका में सीबीएसई को निर्देश जारी करने की मांग की गई कि वह मूल परिणाम को रद्द न करें, जिसमें उन्हें पास किया गया था. वकील ममता शर्मा ने पीठ से कहा कि मुद्दा उन छात्रों का है, जिन्होंने कम अंक प्राप्त किए हैं और एक बार और परीक्षा का प्रयास किया है, उन्हें अपनी मूल मार्कशीट बनाए रखने की अनुमति दी जानी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुधार कम अंकों के साथ समाप्त हुआ या असफल रहा, अब दाखिले प्रभावित होंगे. मामले की अगली सुनवाई 7 जनवरी को होगी. जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेंच में इस मामले की सुनवाई चल रही है. याचिका में सुधार परीक्षा के परिणाम के बजाय याचिकाकर्ताओं के मूल परिणाम बनाए रखने के लिए CBSE को निर्देश जारी करने की मांग की गई है.

याचिका में यह तर्क दिया गया था कि सीबीएसई कानूनों का पालन करने के लिए बाध्य है और 30:30:40 के फॉर्मूले को लागू करके पहले ही उत्तीर्ण घोषित होने वाले छात्रों के अधिकार को नहीं खो सकता है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने पहले के फैसले में प्रतिपादित किया था. पीठ ने CBSE के वकील से कहा कि सुधार में छात्रों को कम अंक मिले हैं या फेल भी हुए हैं. उनका दाखिला प्रभावित होगा. यह कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है बल्कि एक बार की नीति है. उस पर भी विचार करें. अपने अधिकारियों को समझाएं. ये छात्र और कुछ नहीं मांग रहे हैं, लेकिन उनके मूल परिणामों का भी कुछ न कुछ सही असर होगा.

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