
नई दिल्ली:
सीएजी हाल ही में सरकार द्वारा की गई 22 खदानों के ई-ऑक्शन का ऑडिट करेगा। इस बारे में सीएजी ने सरकार से फाइलें मांगी है।
गौरतलब है कि सरकार ने 22 कोयला खदानों का ई-ऑक्शन किया था और दावा किया था कि इस नीलामी से दो लाख करोड़ मिलेंगे। बताया गया है कि सरकार ने बाद में तीन खदानों की नीलामी रद्द कर दी थी। जिन कंपनियों की नीलामी रद्द हुई वे कोर्ट चली गई हैं।
कंपनियों का कहना है कि उन्हें बोली जीतने के बाद भी सरकार ने रद्द किया। कंपनियों ने कोर्ट में कहा कि ई-ऑक्शन में जो भी कीमत मिली है उसे सरकार को लेना चाहिए। वहीं, सरकार का कहना है कि जिन खदानों के आवंटन को रद्द किया गया है कि वहां पर नीलामी से पर्याप्त कीमत नहीं मिली है।
आम तौर सीएजी सरकार की हर नीलामी का ऑडिट करता है, लेकिन अब दूसरे दौर की ई-नीलामी होना बाकी है, ऐसे में इस ऑडिट के परिणाम का सभी को इंतजार रहेगा। सीएजी के इस ऑडिट के नतीजे साल के अंत तक आ जाएंगे।
गौरतलब है कि सरकार ने 22 कोयला खदानों का ई-ऑक्शन किया था और दावा किया था कि इस नीलामी से दो लाख करोड़ मिलेंगे। बताया गया है कि सरकार ने बाद में तीन खदानों की नीलामी रद्द कर दी थी। जिन कंपनियों की नीलामी रद्द हुई वे कोर्ट चली गई हैं।
कंपनियों का कहना है कि उन्हें बोली जीतने के बाद भी सरकार ने रद्द किया। कंपनियों ने कोर्ट में कहा कि ई-ऑक्शन में जो भी कीमत मिली है उसे सरकार को लेना चाहिए। वहीं, सरकार का कहना है कि जिन खदानों के आवंटन को रद्द किया गया है कि वहां पर नीलामी से पर्याप्त कीमत नहीं मिली है।
आम तौर सीएजी सरकार की हर नीलामी का ऑडिट करता है, लेकिन अब दूसरे दौर की ई-नीलामी होना बाकी है, ऐसे में इस ऑडिट के परिणाम का सभी को इंतजार रहेगा। सीएजी के इस ऑडिट के नतीजे साल के अंत तक आ जाएंगे।
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