केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच यह संकेत कर रही है कि बदायूं में रहस्यमयी स्थितियों में मृत पाई गईं दो चचेरी बहनों का बलात्कार 'संदिग्ध' प्रतीत हो रहा है। इन हत्याओं पर मई में राष्ट्रीय स्तर पर जनाक्रोश हुआ था।
हैदराबाद के 'सेंटर फॉर डीएनए फिंगरप्रिंटिंग ऐंड डायग्नोस्टिक्स' (सीडीएफडी) की डीएनए रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद सीबीआई ने राय बनाई है कि यह दावा संदिग्ध प्रतीत हो रहा है कि उन लड़कियों का बलात्कार हुआ था।
सीबीआई सूत्रों ने आज बताया कि एजेंसी अब शवों को खोद कर निकालने का विचार त्याग सकती है, क्योंकि सीडीएफडी की रिपोर्ट ने उन्हें पर्याप्त फॉरेंसिक साक्ष्य दे दिए हैं जो मामला हल करने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि रिपोर्ट बलात्कार की बात में छिपे अंतरविरोध की पुष्टि करती है।
पैनल ऑटाप्सी के लिए दो किशोरी पीडितों के शव खोद कर नहीं निकाल सका था, क्योंकि जाहिरा तौर पर इस संबंध में देर से फैसला किया गया। भारी बारिश के कारण गंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि होने से कब्रों के पानी में डूब जाने से फॉरेंसिक जांच के लिए शवों का निकालना संभव नहीं हो पाया था।
सूत्रों ने कहा कि उसके बाद पैनल ने एजेंसी से पीड़ितों का सामान मुहैया कराने को कहा गया था, ताकि मेडिकल और फारेंसिक विश्लेषण के लिए कुछ नमूने लिए जा सकें। बोर्ड ने अपराध के स्थान का भी दौरा किया है।
झूठ पकड़ने वाली मशीन से जांच में आरोपियों के साफ निकलने के बाद संदेह की सुई परिवार की ओर घूमने लगी। यह संदेह और बढ़ गया जब परिवार के सदस्य और एक चश्मदीद इस जांच में नाकाम रहे। सूत्रों ने कहा कि एजेंसी अब एक स्थानीय नेता की भूमिका की जांच कर रही है, जिसने कथित तौर पर पांच आरोपियों पर हत्या का दोष लगाने के लिए परिवार को प्रभावित किया। सभी पांच आरोपी पप्पू, अवधेश और उर्वेश (भाई) तथा सिपाहियों छत्रपाल यादव और सर्वेश यादव एक ही जाति के हैं।
सूत्रों ने बताया कि पांच आरोपियों- पप्पू, अवधेश एवं उर्वेश यादव (दोनों भाई), और कांस्टेबल छत्रपाल यादव एवं सर्वेश यादव - को जमानत लेने की इजाजत दी जाएगी, क्योंकि उनके खिलाफ कोई स्पष्ट साक्ष्य नहीं है।
मई के आखिरी सप्ताह में दो चचेरी बहनों के शव बदायूं में एक पेड़ से लटकते मिले थे। इस घटना पर देश भर में रोष जताया गया था और कानून व्यवस्था के मुद्दे पर राज्य की सपा सरकार निशाने पर थी।
सूत्रों ने कहा कि एजेंसी का संदेह परिवार पर और बढ़ गया, क्योंकि जिस पेड़ से शव लटके हुए थे, वह लगभग 12 फुट लंबा है और बड़ी बहन के कथित पुरुष मित्र पप्पू यादव के घर के पास है। परिवार के अनुसार वह मुख्य आरोपी है। जांचकर्ता इस बात पर आश्चर्य कर रहे हैं कि क्यों कोई संदिग्ध हत्या कर शव को उस 12 फुट ऊंचे पेड़ से लटकाएगा जो उसके घर के पास है। यह भी पता लगा कि वह उस समय घर में था जब कथित तौर पर घटना हुई।
सूत्रों ने कहा कि इसके अलावा अगर आरोपियों ने लड़कियों की हत्या की थी तो वे इस तरह लटकाने के बदले शवों का निपटारा कर सकते थे। इसके अलावा उस पेड़ से दो शवों को लटकाना आसान नहीं था। सूत्रों ने कहा कि सीडीएफडी से मिले डीएनए सबूत से एजेंसी को आधार बनाने में मदद मिलेगी जिसके सहारे आगे जांच की जा सकेगी। पीड़ितों के परिवार ने उत्तर प्रदेश की आलोचना करते हुए आरोप लगाया है कि वह संदिग्धों का बचाव कर रही है क्योंकि वे एक खास जाति के हैं।
इस मामले ने बड़ा रूप ले लिया था और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं ने वहां का दौरा किया। हालांकि उत्तर प्रदेश के डीजीपी एएल बनर्जी ने दावा किया था कि पीड़ितों में से एक के साथ दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई और अपराध के पीछे संपत्ति भी मकसद हो सकता है।
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