2जी घोटाले और कोलगेट घोटाले के बाद एक और बड़ा घोटाला सामने आया है। महाराष्ट्र में आंगनबाड़ी कार्यक्रम के तहत गरीब बच्चों को दिए जाने वाले अनाज में बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ है। यह घोटाला करीब एक हजार करोड़ रुपये का है।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट कमिश्नर ऑफिस ने एक रिपोर्ट भी जमा की है। रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में राज्य सरकार ने जानबूझ कर तीन महिला मंडलों को ठेका दिया। आंगनबाड़ी के इस घोटाले में यह ठेका एक हजार करोड़ सालाना का है।
घोटाले में शामिल तीन महिला मंडल हैं- वेंकटेश्वरा महिला औद्योगिक सहकारी संस्था, महालक्ष्मी महिला ग्रामोद्योग और महाराष्ट्र महिला सहकारी गृह उद्योग संस्था। इसके अलावा इस मामले में जिन पांच निजी कंपनियों का नाम आया है, वे हैं- स्वप्निल एग्रो, पारस एग्रो, इडो अलाइड प्रोटीन फूड, साई फूड एंड साई फूड प्रोडक्ट्स और कोटा दाल मिल।
इसके अलावा इस बात का भी खुलासा हुआ है कि ये महिला मंडल निजी कंपनियों के लिए काम करते हैं और इन्हीं मंडलों ने वे कमेटियां बनाईं, जिन्होंने फिर निजी कंपनियों को काम दिया।
सुप्रीम कोर्ट में दी गई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आंगनबाड़ी कार्यक्रम के तहत देश भर में सप्लाई किए जाने वाले करीब आठ हजार करोड़ रुपये के राशन में गड़बड़ी हो रही है और ये गड़बड़ी ठेकेदार और निजी कंपनियां मिलकर कर रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि महाराष्ट्र के अलावा उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और मेघालय में भी गड़बड़ियां हो रही हैं।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट कमिश्नर ऑफिस ने एक रिपोर्ट भी जमा की है। रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में राज्य सरकार ने जानबूझ कर तीन महिला मंडलों को ठेका दिया। आंगनबाड़ी के इस घोटाले में यह ठेका एक हजार करोड़ सालाना का है।
घोटाले में शामिल तीन महिला मंडल हैं- वेंकटेश्वरा महिला औद्योगिक सहकारी संस्था, महालक्ष्मी महिला ग्रामोद्योग और महाराष्ट्र महिला सहकारी गृह उद्योग संस्था। इसके अलावा इस मामले में जिन पांच निजी कंपनियों का नाम आया है, वे हैं- स्वप्निल एग्रो, पारस एग्रो, इडो अलाइड प्रोटीन फूड, साई फूड एंड साई फूड प्रोडक्ट्स और कोटा दाल मिल।
इसके अलावा इस बात का भी खुलासा हुआ है कि ये महिला मंडल निजी कंपनियों के लिए काम करते हैं और इन्हीं मंडलों ने वे कमेटियां बनाईं, जिन्होंने फिर निजी कंपनियों को काम दिया।
सुप्रीम कोर्ट में दी गई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आंगनबाड़ी कार्यक्रम के तहत देश भर में सप्लाई किए जाने वाले करीब आठ हजार करोड़ रुपये के राशन में गड़बड़ी हो रही है और ये गड़बड़ी ठेकेदार और निजी कंपनियां मिलकर कर रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि महाराष्ट्र के अलावा उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और मेघालय में भी गड़बड़ियां हो रही हैं।
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