New Delhi:
भ्रष्टाचारियों के खिलाफ अधिकतम सजा की वकालत करते हुए विदेशी बैंकों में जमा काले धन को वापस लाने की मांग को लेकर योग गुरु बाबा रामदेव अनशन के अपने फैसले पर अड़े हैं। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे से भी उन्हें समर्थन मिला, लेकिन उन्होंने बाबा रामदेव को सरकार के इरादों के प्रति चेताया भी। गुरुवार को गुड़गांव में अपने एक निकट सहयोगी से मुलाकात के बाद बाद पत्रकारों से बातचीत में बाबा रामदेव ने कहा, "वैश्विक भूख सूचकांक के मुताबिक 70 लाख से अधिक लोग हर साल भूख से मर जाते हैं। लेकिन जो अप्रत्यक्ष रूप से इन 70 लाख से अधिक लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार हैं, उनके लिए क्या सजा होनी चाहिए?"उन्होंने कहा, "कोई भी 70 लाख लोगों को मरते नहीं देखता, लेकिन यदि एक भी भ्रष्ट को फांसी पर लटकाया जाता है तो सभी कहते हैं, 'उसे बचाओ।" कालेधन के बारे में बाबा रामदेव ने कहा, "विदेश ले जाए गए काले धन को राष्ट्रीय सम्पत्ति घोषित किया जाना चाहिए और काला धन रखने को राजद्रोह के समान समझा जाना चाहिए।" बाबा रामदेव के समर्थन में गुरुवार को सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे भी सामने आए। उन्होंने सरकार पर लोकपाल विधेयक को लेकर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया और बाबा रामदेव को आगाह किया कि वह 'सरकार के झांसे' में न आएं। अपने गांव रालेगांव सिद्धि में पत्रकारों से बातचीत में अन्ना हजारे ने कहा, "उन्हें लेने चार मंत्री गए। एक या दो जाते तो ठीक था। यदि बहुत से मंत्री जाते हैं तो इसका मतलब यह है कि वे बाबा रामदेव को मूर्ख बनाना चाहते हैं। मामले को टालने के लिए वे आवश्वासन देंगे।" अन्ना हजारे ने कहा, "मैं बाबा रामदेव से बात करूंगा ताकि वह सरकार के झांसे में न आएं। सरकार को बाबा रामदेव के साथ वह नहीं करना चाहिए जो उन्होंने हमारे साथ किया।" उन्होंने बाबा रामदेव के साथ किसी तरह के मतभेद से इंकार किया और कहा कि वह रविवार को उनके आंदोलन में शामिल होंगे। उन्होंने हालांकि साफ किया कि वह अनशन नहीं करेंगे, बाबा रामदेव का सिर्फ समर्थन करेंगे।
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