अमित शाह ने आतंकवाद और कट्टरता पर अधिकारियों से मांगे जवाब, जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा पर कड़े सवाल

5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित होने के बाद शाह की यह पहली यात्रा है. इससे पहले शाह ने 2019 में गृह मंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के ठीक बाद राज्य का दौरा किया था.

नई दिल्ली:

अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद पहली बार जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के दौरे पर आए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah)  ने केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षा स्थितियों पर बुलाई उच्च स्तरीय बैठक में सख्त रुख दिखाया है. उन्होंने आतंकवाद, कट्टरता और नागरिकों की बेरहमी से हो रही हत्याओं पर जवाब मांगा है. इससे पहले श्रीनगर हवाई अड्डे पर उप राज्यपाल मनोज सिन्हा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने उनकी अगवानी की. 

शाह की तीन दिवसीय यात्रा ऐसे समय पर हो रही है जब कश्‍मीर में आतंकियों ने हाल के दिनों में आम नागरिकों को हमलों का निशाना बनाया है. अपने दौरे की शुरुआत करते हुए शाह सबसे पहले नौगाम में शहीद इंस्पेक्टर के घर पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे. शाह ने इंस्पेक्टर परवेज़ अहमद के घर जाकर परिज़नों से मुलाक़ात की, जिनकी आतंकियों द्वारा हत्या कर दी गई थी. जून में नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद जा रहे इंस्पेक्टर परवेज की आतंकियों ने हत्या कर दी थी.

Nowgam | HM Amit Shah visits residence of slain Insp Parvez Ahmed, who was killed by terrorists last month. During his visit, HM met Ahmed's wife Fatima Akhter & gave her official papers for a govt job

J&K LG Manoj Sinha, Union Min Jitendra Singh & DGP Dilbag Singh also present pic.twitter.com/5MCm7v4lWl

5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित होने के बाद शाह की यह पहली यात्रा है. इससे पहले शाह ने 2019 में गृह मंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के ठीक बाद राज्य का दौरा किया था. उन्होंने तब अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा की समीक्षा की थी और केंद्रीय योजनाओं की प्रगति का जायजा लिया था.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, गृह मंत्री के केंद्र शासित प्रदेश के दौरे से पहले, श्रीनगर में कई यातायात प्रतिबंध लगाए गए थे, जिनमें दोपहिया वाहन चलाने वालों को भी कड़ी सुरक्षा जांच का सामना करना शामिल था. इसके अलावा, सुरक्षा उद्देश्यों के लिए कुल 50 केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की टीमों को तैनात किया गया था.

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हाल ही में, जम्मू और कश्मीर में गैर-स्थानीय लोगों की हत्याओं के बाद, केंद्र शासित प्रदेश में लगभग 700 लोगों को हिरासत में लिया गया है, कुछ को कड़े सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (PSA) के तहत हिरासत में लिया गया है. इस बीच, जन सुरक्षा अधिनियम 1978 के तहत जम्मू-कश्मीर से कुल 26 बंदियों को आगरा की केंद्रीय जेल में स्थानांतरित किया गया है.

सूत्रों के मुताबिक शाह सुबह करीब 11 बजे श्रीनगर पहुंचे. इसके बाद उन्होंने राजभवन में सुरक्षा को लेकर एक एकीकृत कमान की बैठक की अध्यक्षता की. बैठक में चार कोर कमांडर, जम्मू-कश्मीर पुलिस के शीर्ष अधिकारी और अन्य शीर्ष अधिकारियों के अलावा खुफिया ब्यूरो और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के प्रमुख शामिल थे. इसके बाद वह कई राजनीतिक कार्यक्रमों में शरीक हुए.

अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर युवा क्लब के लोगों से वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के जरिए बातचीत की. इसके अलावा शाम को श्रीनगर-शारजाह इंटरनेशनल फ्लाइट का शुभारंभ भी किया. यह श्रीनगर से शारजाह के बीच डायरेक्‍ट फ्लाइट है.

सूत्रों के मुताबिक, शाह सुरक्षा बलों के शहीदों और हाल ही में आतंकी हमलों में मारे गए नागरिकों को श्रद्धांजलि देने भी गए. जम्मू-कश्मीर प्रशासन के एक सूत्र ने कहा, "वह एक सिख शिक्षक और एक मुस्लिम नागरिक माखन लाल बिंदू के परिवारों से मिलने भी गए, जो हाल ही में आतंकियो के शिकार हुए थे."

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शाह दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के लेथपोरा भी गए, जहां फरवरी 2019 में एक आतंकी हमले में 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए थे. वहां गृह मंत्री ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी. 

सूत्रों ने कहा कि अमित शाह ने केंद्र शासित प्रदेश के दौरे के दौरान जम्मू-कश्मीर प्रशासन के साथ भी बैठक की और विकास परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लिया.

रविवार को शाह जम्मू जाएंगे, जहां वो IIT के दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे, उसके बाद दिन में एक रैली को संबोधित करेंगे. श्रीनगर के लिए उड़ान भरने से पहले वह कश्मीरी पंडितों के दल से भी वहां मुलाकात कर सकते हैं. सोमवार को अमित शाह SKICC में सिविल सोसायटी के प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात करेंगे. उसके बाद वो नई दिल्ली लौट जाएंगे.

शाह की कश्मीर घाटी की पहली यात्रा को लेकर पूरे कश्मीर में सुरक्षा बढ़ाई गई है. विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों ने शुक्रवार को केंद्र शासित प्रदेश की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करने के लिए एक उच्च-स्तरीय बैठक में हिस्सा लिया. सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता 16 कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) लेफ्टिनेंट जनरल एमवी सुचींद्र कुमार ने की और इसमें पुलिस, अर्द्धसैनिक बल और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे. अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक मुकेश सिंह भी बैठक में शामिल हुए.

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इस बीच, बीएसएफ की पश्चिमी कमांड के अतिरिक्त महानिदेशक एन एस जामवाल ने भी शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा हालात का जायजा लिया. सीमा सुरक्षा बल के जनसंपर्क अधिकारी डीआईजी एस पी एस संधू ने कहा कि जामवाल ने सांबा और कठुआ के संवेदनशील सीमा क्षेत्रों का दौरा किया और अभियान संबंधी तैयारियों का जायजा लिया.


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