Why Is Yawning Contagious: आप किसी मीटिंग में बैठे हों या दोस्तों के साथ बातचीत कर रहे हों, तभी अचानक कोई व्यक्ति जम्हाई लेता है और कुछ ही सेकंड में आपको भी उबासी आने लगती है. यह एक आम एक्सपीरियंस है, लेकिन इसके पीछे का कारण काफी दिलचस्प है. कई बार तो सिर्फ जम्हाई के बारे में सुनना या पढ़ना भी हमें उबासी (Yawning) दिला देता है. दरअसल, यह हमारे दिमाग (Brain) की एक खास प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में “कन्टेजियस यॉनिंग” (Contagious Yawning) कहा जाता है. यानी एक व्यक्ति की उबासी दूसरे व्यक्ति में अपने आप फैल जाती है.
इन कारणों से आती है जम्हाई या उबासी- (Causes Of Contagious Yawning)
दिमाग का नकल करने वाला सिस्टम
हमारे दिमाग में कुछ खास न्यूरॉन्स (Neurons) होते हैं जिन्हें “मिरर न्यूरॉन्स” (Mirror Neurons) कहा जाता है. ये तब सक्रिय होते हैं जब हम किसी को कोई काम करते हुए देखते हैं. जब हम किसी को जम्हाई लेते देखते हैं, तो ये न्यूरॉन्स उसी क्रिया की नकल करने के लिए हमारे दिमाग को संकेत देते हैं. यही वजह है कि हमें भी उबासी आने लगती है.
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इमोशनल कनेक्शन का असर
उबासी सिर्फ एक शारीरिक क्रिया नहीं है, इसका संबंध हमारी भावनाओं (Feelings) से भी होता है. रिसर्च बताती है कि हम उन लोगों को देखकर ज्यादा उबासी लेते हैं जिनसे हमारा भावनात्मक जुड़ाव (Emotional Relation) होता है. जैसे परिवार के सदस्य या करीबी दोस्त. यह हमारे दिमाग का एक तरीका है जिससे वह सामने वाले की स्थिति से तालमेल बैठाता है.

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दिमाग को ठंडा रखने का तरीका
उबासी लेना शरीर का एक नेचुरल कूलिंग सिस्टम (Cooling System) भी माना जाता है. जब हम उबासी लेते हैं, तो ज्यादा मात्रा में हवा अंदर जाती है. इससे ब्लड सर्कुलेशन (Blood Circulation) बढ़ता है और दिमाग का तापमान संतुलित रहता है.
अलर्ट रहने का संकेत
उबासी लेने से शरीर में ऑक्सीजन (Oxygen) की मात्रा बढ़ती है और दिमाग ज्यादा सक्रिय (Active) हो जाता है. यही कारण है कि कई बार थकान के बीच उबासी हमें थोड़ी राहत भी देती है.
तो अगली बार अगर किसी को देखकर आपको भी उबासी आए, तो इसे अजीब समझने की जरूरत नहीं है. यह आपके दिमाग और भावनाओं के बीच काम करने वाली एक सामान्य प्रक्रिया है, जो हमें दूसरों से जोड़ने का काम भी करती है.
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