World Sleep Day 2026: पर्याप्त नींद लेना शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत के लिए बहुत जरूरी है. लेकिन कई लोग बिस्तर पर पर्याप्त समय बिताने के बावजूद अच्छी नींद नहीं ले पाते. इस वर्ल्ड स्लीप डे पर जानिए उन आम आदतों के बारे में जो लोगों को पता भी चलता कि उनकी नींद की क्वालिटी को खराब कर देती हैं. देर रात तक फोन चलाने से लेकर देर शाम कैफीन लेने तक, हमारी रोजमर्रा की कई आदतें शरीर के नेचुरल स्लीप साइकिल को बिगाड़ सकती हैं.
अच्छी बात यह है कि छोटी-छोटी लाइफस्टाइल में बदलाव करके नींद की आदतों को सुधारा जा सकता है और रात में बेहतर और आरामदायक नींद ली जा सकती है.

सोने से पहले फोन इस्तेमाल करना
देर रात तक फोन स्क्रॉल करना नींद खराब करने वाली सबसे बड़ी आदतों में से एक है. स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट शरीर में बनने वाले मेलाटोनिन हार्मोन को प्रभावित करती है. यही हार्मोन नींद को नियंत्रित करता है. ऐसे में थकान होने के बावजूद नींद आने में दिक्कत होती है. एक्सपर्ट भी यही सलाह देते हैं कि सोने से 30-60 मिनट पहले स्क्रीन बंद कर दें.
देर शाम कैफीन पीना
कैफीन कॉफी, चाय, एनर्जी ड्रिंक और कुछ चॉकलेट में भी पाया जाता है. दिन में यह शरीर को अलर्ट रखने में मदद करता है, लेकिन देर शाम इसे लेने से नींद की समस्या हो सकती है. कैफीन कई घंटों तक शरीर में बना रहता है, जिससे रात में सोना मुश्किल हो सकता है.
इरेग्युलर स्लीप शेड्यूल
हर दिन अलग-अलग समय पर सोना शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक को कंफ्यूज कर देता है. कभी बहुत देर से और कभी जल्दी सोना शरीर की प्राकृतिक नींद की लय को बिगाड़ देता है. इसलिए रोज लगभग एक ही समय पर सोना बेहतर नींद के लिए जरूरी माना जाता है.
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देर रात हैवी खाना खाना
सोने से ठीक पहले हैवी खाना खाने से शरीर को आराम करने में मुश्किल होती है. मसालेदार या ज्यादा खाना खाने से एसिडिटी या असहजता हो सकती है, जिससे नींद प्रभावित होती है. एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि सोने से कम से कम 2-3 घंटे पहले डिनर कर लेना चाहिए.
दिन में ज्यादा देर तक सोना
छोटी झपकी एनर्जी बढ़ाने में मदद कर सकती है, लेकिन दिन में ज्यादा देर सोने से रात की नींद पर असर पड़ सकता है. अगर झपकी 30-40 मिनट से ज्यादा हो जाए या शाम के समय ली जाए, तो रात में नींद आने में दिक्कत हो सकती है.
रात में स्ट्रेस और ज्यादा सोचना
कई लोगों को बिस्तर पर जाने के बाद भी दिमाग में बहुत सारे विचार आते रहते हैं. काम का स्ट्रेस, चिंता या लगातार सोचते रहना दिमाग को एक्टिव बनाए रखता है, जिससे नींद आने में परेशानी होती है या रात में बार-बार नींद खुल सकती है. ऐसे में पढ़ना, मेडिटेशन या ब्रीदिंग एक्सरसाइज जैसी आदतें मन को शांत करने में मदद कर सकती हैं.
अनकंफर्टेबल स्लीप एनवायरनमेंट
शोर, तेज रोशनी या असुविधाजनक गद्दा भी नींद की क्वालिटी पर असर डाल सकता है. एक्सपर्ट के मुताबिक ठंडा, शांत और अंधेरा कमरा अच्छी नींद के लिए सबसे बेहतर माना जाता है. आरामदायक माहौल बनाना अच्छी नींद की आदतों का अहम हिस्सा है.
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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