Why Japan Has No Obesity: आज पूरी दुनिया में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है. छोटे बच्चे भी जंक फूड, मोबाइल और कम एक्टिव लाइफस्टाइल की वजह से मोटापे का शिकार हो रहे हैं. लेकिन अगर जापान की बात करें, तो वहां मोटापे की दर दुनिया के कई देशों के मुकाबले काफी कम है. जापानी लोग लंबे समय तक फिट, एक्टिव और हेल्दी रहते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह उनका खानपान या जिम नहीं, बल्कि बचपन से सिखाई जाने वाली छोटी-छोटी हेल्दी आदतें हैं. जापान में बच्चों को स्कूल से लेकर घर तक ऐसी लाइफस्टाइल सिखाई जाती है, जिससे वे खुद ही हेल्दी रहना सीख जाते हैं. वहां बच्चे केवल पढ़ाई नहीं करते, बल्कि खाने का सही तरीका, शरीर को एक्टिव रखना और अनुशासन भी सीखते हैं. यही कारण है कि जापान में मोटापा और कई लाइफस्टाइल बीमारियां कम देखने को मिलती हैं. जापान में मोटापे की दर दुनिया में सबसे कम देशों में गिनी जाती है, जबकि इंडिया में पिछले कुछ सालों में मोटापा तेजी से बढ़ा है.
हाल के ग्लोबल हेल्थ डेटा के अनुसार:
- जापान में एडल्ट ओबेसिटी रेट लगभग 4–5% के आसपास माना जाता है.
- भारत में यह आंकड़ा औसतन 7–9% के करीब पहुंच चुका है, लेकिन शहरों में यह काफी ज्यादा है.
- बच्चों और टीनएजर्स में भी भारत में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है, खासकर स्क्रीन टाइम और जंक फूड की वजह से.
OECD जापान हेल्थ रिपोर्ट में जापान की मोटापे का प्रसार लगभग 4.6% बताया गया है.
जापानी बच्चों को स्कूल में कौन सी आदतें सिखाई जाती हैं?
1. पॉर्शन कंट्रोल की आदत
जापान में बच्चों को बचपन से ही जरूरत के हिसाब से खाना सिखाया जाता है. वहां प्लेट में खाना बहुत ज्यादा नहीं परोसा जाता. छोटे-छोटे हिस्सों में बैलेंस मील दिया जाता है, जिससे बच्चे जरूरत से ज्यादा खाने की आदत नहीं डालते.
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जापानी लोग हारा हाची बु नाम के नियम को मानते हैं, जिसका मतलब है पेट 80% भरने तक खाना. इससे ओवरईटिंग की समस्या कम होती है और वजन कंट्रोल में रहता है.

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2. स्कूल में हेल्दी और बैलेंस्ड खाना
जापानी स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक भोजन दिया जाता है. वहां लंच में तली-भुनी चीजों की बजाय चावल, मछली, सूप, सब्जियां और फल शामिल होते हैं. खास बात यह है कि बच्चों को खाने की न्यूट्रिशन वैल्यू भी समझाई जाती है.
कई स्कूलों में बच्चे खुद खाना सर्व करते हैं और बाद में सफाई भी करते हैं. इससे उनमें खाने के प्रति सम्मान और अनुशासन की भावना आती है. यही आदतें आगे चलकर हेल्दी लाइफस्टाइल बनाती हैं.
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3. रोज एक्टिव रहने की ट्रेनिंग
जापान में बच्चों को केवल पढ़ाई पर फोकस नहीं कराया जाता, बल्कि उन्हें एक्टिव रहना भी सिखाया जाता है. वहां बच्चे स्कूल पैदल या साइकिल से जाते हैं. कई स्कूलों में सुबह एक्सरसाइज और फिजिकल एक्टिविटी भी कराई जाती है.
इसके अलावा जापानी बच्चे बाहर खेलना ज्यादा पसंद करते हैं. इससे उनका शरीर एक्टिव रहता है और कैलोरी आसानी से बर्न होती रहती है. कम उम्र से एक्टिव रहने की यही आदत उन्हें फिट रखती है.
4. जंक फूड की सीमित आदत
जापान में फास्ट फूड पूरी तरह बंद नहीं है, लेकिन वहां लोग इसे रोज की आदत नहीं बनाते. बच्चों को घर का ताजा खाना खाने पर ज्यादा जोर दिया जाता है. जापानी डाइट में मौसमी सब्जियां, सीफूड, चावल और फर्मेंटेड फूड ज्यादा शामिल होते हैं. प्रोसेस्ड और बहुत ज्यादा मीठे खाने की मात्रा कम होती है. इससे मोटापा, डायबिटीज और हार्ट डिजीज का खतरा भी कम हो जाता है.

5. खाने के साथ अनुशासन और माइंडफुलनेस
जापान में खाना जल्दी-जल्दी या मोबाइल देखते हुए खाने की आदत कम है. वहां बच्चों को आराम से बैठकर और ध्यान लगाकर खाना सिखाया जाता है. धीरे-धीरे खाने से पेट जल्दी भरने का एहसास होता है और ओवरईटिंग नहीं होती. साथ ही परिवार के साथ बैठकर खाना खाने की परंपरा बच्चों की मानसिक और शारीरिक सेहत दोनों के लिए अच्छी मानी जाती है.
छोटी आदतें बनाती हैं बड़ा फर्क
जापान का उदाहरण बताता है कि फिट रहने के लिए केवल डाइटिंग या जिम जरूरी नहीं है. अगर बचपन से सही खानपान, एक्टिव लाइफस्टाइल और अनुशासन सिखाया जाए, तो मोटापा काफी हद तक रोका जा सकता है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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