Tracheoesophageal Fistula: हर माता-पिता का सपना होता है कि उनका बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ जन्म ले. लेकिन कुछ मामलों में जन्म के समय ही कुछ गंभीर परेशानी सामने आ जाती है. ट्रेकियोसोफेगल फिस्टुला (TEF) एक ऐसी ही स्थिति है जो बहुत कम बच्चों में देखने को मिलती है, लेकिन अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो यह जानलेवा हो सकती है. आइए जानते हैं आज के इस आर्टिकल में ट्रेकियोसोफेगल फिस्टुला के बारे में विस्तार से.
ट्रेकियोसोफेगल फिस्टुला (Tracheoesophageal Fistula)
TEF क्या होता है?
शरीर में दो अलग-अलग नलियां होती हैं एक जिससे खाना पेट में जाता है (जिसे अन्ननली कहा जाता है) और दूसरी जिससे हवा फेफड़ों में जाती है (जिसे सांस की नली कहा जाता है). ट्रेकियोसोफेगल फिस्टुला में इन दोनों नलियों के बीच एक ग़लत रास्ता बन जाता है, जिसकी वजह से खाना या दूध फेफड़ों में चला जाता है. इससे शिशु को सांस लेने में परेशानी होने लगती है.
-
NDTV WORLD SUMMIT 2026 : कृति सेनन को बिकिनी सीन करने में क्यों लगे 12 साल? -
ब्रिटेन के हरियाणवी मेयर तुषार कुमार ने बताया कैसे गरीबों की मदद ने जिताया चुनाव -
टैक्स सिर्फ कमाई पर लगे, पूरी रकम पर नहीं..."F&O ट्रेडर्स के नुकसान पर बोले Zerodha को-फाउंडर निखिल कामत -
जिस शशि थरूर को सुनती है पूरी दुनिया, संसद में वह किसे सुनना पसंद करते हैं? खुद खोला राज -
रुपये की गिरती कीमत पर RBI गवर्नर का बड़ा बयान, कोई फिक्स लेवल नहीं, जानिए क्या है रिजर्व बैंक का एक्शन प्लान -
टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग अनिवार्य? RBI गवर्नर ने NDTV समिट में बताया ये क्यों है जरूरी -
AI से बुलेट ट्रेन तक... अश्विनी वैष्णव ने बताया भारत का फ्यूचर प्लान -
NDTV World Summit 2026: वेजिटेरियन खिलाड़ियों को कौन सी दिक्कतें होती हैं? Savita, Neeru ने बताया -
NDTV World Summit 2026 के मंच पर भारत की 'गोल्डन गर्ल्स' ने बताया जीत का मंत्रा! | Asian Games 2026 -
NDTV World Summit 2026: Lovlina Borgohain ने बताया जीवन का सबसे बड़ा चैलेंज! क्यों लगने लगे ठहाके?
ये भी पढ़ें- फेफड़ों में चला जाता है खाना तो पैदा होती है Aspiration की स्थिति, सांस लेना होता है मुश्किल, जानें क्या है ये समस्या

यह परेशानी कैसे दिखती है?
-दूध पिलाते समय खांसी या घुटन.
-मुंह से बार-बार झाग या लार निकलना.
-सांस लेते समय आवाज़ आना.
-खाना निगलने में परेशानी.
-त्वचा का नीला पड़ जाना.
-बार-बार फेफड़ों में संक्रमण होना.
अगर इनमें से कोई भी लक्षण नजर आए तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए. शुरुआत में लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है.
TEF किस कारण होता है?
TEF जन्म से होता है, यानी बच्चा इसे गर्भ में ही लेकर आता है. यह कोई संक्रमण या बीमारी के कारण नहीं होता बल्कि भ्रूण के विकास के समय कोई गड़बड़ी होने पर ऐसा हो सकता है. कई बार यह दूसरी समस्याओं जैसे दिल में छेद, पेट की बनावट में गड़बड़ी या रीढ़ की हड्डी की बनावट से भी जुड़ा होता है.
इसके कितने प्रकार होते हैं?
TEF के अलग-अलग प्रकार होते हैं, जो इस पर निर्भर करते हैं कि दोनों नलियां कहां और कैसे जुड़ी हैं. इनमें सबसे आम है टाइप C, जिसमें ऊपरी अन्ननली बंद होती है और निचली हिस्सा सांस की नली से जुड़ जाता है. इस वजह से बच्चा न तो सही से खाना निगल पाता है और न ही सांस ले पाता है.
इसका इलाज क्या है?
इसका इलाज सिर्फ सर्जरी से ही संभव है. डॉक्टर सबसे पहले बच्चे को सांस की मदद और दूध पिलाने के लिए विशेष ट्यूब लगाते हैं ताकि फेफड़ों में दूध न जाए. इसके बाद सर्जरी करके दोनों नलियों को अलग किया जाता है और सही से जोड़ा जाता है. सर्जरी के बाद बच्चे को कुछ दिन तक गहन निगरानी में रखा जाता है. डॉक्टर नियमित जांच करते हैं ताकि यह देखा जा सके कि बच्चा ठीक से खाना निगल पा रहा है या नहीं. कई बार फीडिंग थेरेपी की ज़रूरत भी होती है.
क्या लिवर खराब होने से हार्ट डिजीज होती हैं? डॉक्टर ने बताया...
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं