कुछ साल पहले तक टेट्रा पैक का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में सिर्फ बच्चों का जूस या दूध आता था, लेकिन अब यही पैकेजिंग शराब, एनर्जी ड्रिंक, कॉफी और यहां तक कि पानी तक में दिखाई देने लगी है. हल्का, आकर्षक और आसानी से कैरी होने वाला यह पैकिंग सिस्टम कंपनियों की पहली पसंद बनता जा रहा है. लेकिन, हाल ही में शराब की ऐसी पैकेजिंग को लेकर देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं. कोर्ट ने कहा कि टेट्रा पैक या जूस जैसे दिखने वाले कंटेनरों में शराब बेचना लोगों को गुमराह कर सकता है, क्योंकि कई बार यह सामान्य जूस जैसा लगता है. इसके बाद टेट्रा पैक को लेकर लोगों की जिज्ञासा भी बढ़ गई है कि आखिर यह पैकेजिंग क्या होती है, कैसे काम करती है और इसके फायदे-नुकसान क्या हैं?
आखिर क्या होता है टेट्रा पैक?
टेट्रा पैक एक खास तरह की मल्टी-लेयर पैकेजिंग होती है, जिसे खाने-पीने की चीजों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए बनाया जाता है. इसमें पेपरबोर्ड, प्लास्टिक और एल्युमिनियम की कई पतली परतें होती हैं.
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इन परतों का काम अलग-अलग होता है:
- पेपरबोर्ड पैक को मजबूती देता है.
- प्लास्टिक लिक्विड को बाहर निकलने से रोकता है.
- एल्युमिनियम हवा, नमी और बैक्टीरिया से सुरक्षा देता है.
इसी वजह से जूस, दूध या दूसरी ड्रिंक्स लंबे समय तक खराब नहीं होतीं, यहां तक कि कई बार इन्हें फ्रिज में रखने की भी जरूरत नहीं पड़ती.

आखिर कंपनियां इसे इतना पसंद क्यों कर रही हैं?
आज के समय में कंपनियां ऐसी पैकेजिंग चाहती हैं जो सस्ती हो, हल्की हो और ट्रांसपोर्ट में आसान हो. टेट्रा पैक इन तीनों जरूरतों को पूरा करता है.
1. लंबे समय तक सामान सुरक्षित रहता है
टेट्रा पैक में बंद ड्रिंक महीनों तक खराब नहीं होती. यही वजह है कि दूध और फ्रूट जूस की बड़ी कंपनियां इसका इस्तेमाल तेजी से कर रही हैं.
2. ले जाना आसान
कांच की बोतल भारी होती है और टूटने का खतरा रहता है, जबकि टेट्रा पैक हल्का और आसानी से कैरी होने वाला होता है.
3. कम खर्च
इस पैकेजिंग में ट्रांसपोर्ट और स्टोरेज का खर्च कम पड़ता है. कंपनियों को फायदा होता है और प्रोडक्ट ज्यादा जगहों तक पहुंच जाता है.
4. आकर्षक डिजाइन
टेट्रा पैक पर रंग-बिरंगे प्रिंट और डिजाइन आसानी से किए जा सकते हैं. यही वजह है कि बच्चों से लेकर युवाओं तक को यह पैकेजिंग जल्दी आकर्षित करती है.
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शराब कंपनियां क्यों कर रही हैं इसका इस्तेमाल?
हाल के सालों में कई शराब कंपनियों ने टेट्रा पैक और छोटे सैशे में शराब बेचनी शुरू कर दी है. वजह साफ है यह पैकिंग सस्ती, पोर्टेबल और छिपाने में आसान होती है.
यही बात अब विवाद का कारण बन गई है. सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया कि कई बार शराब की पैकेजिंग इतनी साधारण होती है कि वह फ्रूट जूस जैसी दिखती है. बच्चे या आम लोग भी इसे देखकर भ्रमित हो सकते हैं.
सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की पीठ ने इस मामले को गंभीर माना और केंद्र सरकार से जवाब मांगा. कोर्ट ने कहा कि ऐसी पैकेजिंग लोगों को गुमराह कर सकती है.
हेल्थ एक्सपर्ट क्यों जता रहे चिंता?
डॉक्टर्स और हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब शराब की पैकेजिंग जूस जैसी दिखती है तो उसका मानसिक असर भी पड़ता है.
शराब नॉर्मल ड्रिंक जैसी लगने लगती है: रंगीन पैकिंग और छोटे पैक युवाओं को आकर्षित करते हैं. इससे शराब का सेवन सामान्य चीज जैसा दिखने लगता है.
बच्चों के लिए खतरा: अगर शराब का पैक जूस जैसा लगे तो छोटे बच्चे गलती से उसे पी सकते हैं. यही सबसे बड़ा खतरा माना जा रहा है.
चेतावनी की कमी: तंबाकू उत्पादों पर बड़े-बड़े चेतावनी संदेश लिखे होते हैं, लेकिन शराब की कई पैकेजिंग में ऐसी चेतावनियां साफ दिखाई नहीं देतीं. इससे लोग उसके नुकसान को गंभीरता से नहीं लेते.
- टेट्रा पैक के फायदे क्या हैं? | What are the Benefits of Tetra Pak?
- खाने-पीने की चीजें लंबे समय तक सुरक्षित रहती हैं.
- यह पैकिंग बैक्टीरिया और हवा से सुरक्षा देती है.
- फ्रिज की जरूरत कम
- कई प्रोडक्ट्स बिना फ्रिज के भी लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं.
- ट्रैवल फ्रेंडली
- यात्रा के दौरान इसे ले जाना आसान होता है.
- फूड वेस्टेज कम
- खाना और ड्रिंक जल्दी खराब नहीं होते, जिससे बर्बादी कम होती है.

लेकिन इसके बड़े नुकसान भी हैं...
रीसाइक्लिंग मुश्किल: टेट्रा पैक कई परतों से बना होता है, इसलिए इसे रिसाइकल करना आसान नहीं होता.
पर्यावरण पर असर: अगर सही तरीके से डिस्पोज न किया जाए तो यह प्लास्टिक कचरे की बड़ी समस्या बन सकता है.
हेल्थ को लेकर सवाल: कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि लंबे समय तक पैक्ड ड्रिंक्स का ज्यादा सेवन हेल्दी नहीं माना जाता, खासकर जब उनमें ज्यादा शुगर या प्रिजर्वेटिव हों.
भ्रामक पैकेजिंग: सबसे बड़ी चिंता यही है कि कई बार पैकेजिंग देखकर असली प्रोडक्ट पहचानना मुश्किल हो जाता है.
क्या बदल सकते हैं नियम?
सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि सरकार शराब की पैकेजिंग को लेकर नए नियम ला सकती है. इसमें बड़े चेतावनी संदेश, अलग रंग की पैकेजिंग या साफ पहचान जैसे नियम शामिल हो सकते हैं.
विशेषज्ञ मानते हैं कि जिस तरह सिगरेट और तंबाकू पर सख्त चेतावनी दी जाती है, उसी तरह शराब की पैकेजिंग पर भी साफ जानकारी होनी चाहिए ताकि लोग भ्रमित न हों.
टेट्रा पैक तकनीक ने खाने-पीने की चीजों को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है. दूध, जूस और दूसरी ड्रिंक्स के लिए यह पैकेजिंग काफी उपयोगी साबित हुई है. लेकिन, जब इसी तकनीक का इस्तेमाल शराब जैसी चीजों के लिए इस तरह होने लगे कि वह जूस जैसी दिखे, तब सवाल उठना स्वाभाविक है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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