आज के समय में देश और दुनियाभर में तरह-तरह की बीमारियों के बारे में सुनने को मिलता है, जिसे सुनकर कई बार भरोसा करना मुश्किल हो जाता है. क्या आपने कभी किसी ऐसी बीमारी के बारे में सुना है जो सिर्फ जासूसों (spies) और देशों के बड़े डिप्लोमैट्स (राजनयिकों) को अपना शिकार बनाती है? सुनने में यह किसी फिल्म की कहानी लग सकती है, लेकिन यह कोई फिल्म की कहानी नहीं बल्कि, बिल्कुल सच है. इस रहस्यमयी बीमारी का नाम है 'हवाना सिंड्रोम'.
इस घटना ने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों और खुफिया एजेंसियों को हिला कर रख दिया है. नॉर्वे के एक वैज्ञानिक (साइंटिस्ट) ने यह ठान लिया था कि वह दुनिया को साबित करके रहेगा कि 'हवाना सिंड्रोम' नाम की कोई चीज नहीं होती. उसका मानना था कि यह सब बस एक वहम है. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. इस बीमारी को झूठा साबित करने की कोशिश में उस साइंटिस्ट का दिमाग ही डैमेज हो गया.
क्या है हवाना सिंड्रोम? (What is Havana syndrome)
हवाना सिंड्रोम एक रहस्यमयी न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसके मामले पहली बार 2016-17 में क्यूबा की राजधानी हवाना में तैनात अमेरिकी और कनाडाई राजनयिकों में सामने आए थे. इसमें इंसान को अचानक बहुत तेज सिरदर्द होने लगता है, भयानक चक्कर आते हैं, और दिमाग जैसे सुन्न पड़ने लगता है.

क्या है नॉर्वे का पूरा मामला? (What is the whole matter of Norway)
साल 2024 में नॉर्वे में एक बहुत ही टॉप-सीक्रेट रिसर्च प्रोजेक्ट चल रहा था. इसी प्रोजेक्ट पर काम करते हुए एक साइंटिस्ट ने एक ऐसी मशीन (डिवाइस) तैयार की जो बहुत ही पावरफुल माइक्रोवेव रेडिएशन (तरंगें) छोड़ती थी. साइंटिस्ट का सीधा सा मकसद यह साबित करना था कि ऐसी किसी भी मशीन से इंसानी दिमाग पर वो असर नहीं होता, जो हवाना सिंड्रोम के मामलों में बताया जाता है. लेकिन जैसे ही उसने इस मशीन की टेस्टिंग अपने ऊपर शुरू की, दांव उल्टा पड़ गया. उस साइंटिस्ट को खुद वही खतरनाक लक्षण महसूस होने लगे जो हवाना सिंड्रोम के मरीजों को होते हैं. 'द वाशिंगटन पोस्ट' की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, हालत इतनी ज्यादा बिगड़ गई कि नॉर्वे की सरकार को अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA से संपर्क करना पड़ा. हालांकि, इस मामले की करीब से जानकारी रखने वाले कुछ लोगों का कहना है कि साइंटिस्ट में जो लक्षण दिखे, वो पूरी तरह से 'क्लासिक' हवाना सिंड्रोम से 100% मैच नहीं करते थे.
कहां क्या स्थिति है हवाना सिंड्रोम- (Where is Havana syndrome located)
सबसे पहले यह बीमारी साल 2016 में सामने आई थी. तब क्यूबा की राजधानी 'हवाना' में मौजूद अमेरिकी एंबेसी (दूतावास) के कर्मचारियों ने अचानक ऐसे ही अजीबोगरीब लक्षणों की शिकायत की थी. क्यूबा से शुरू हुई यह रहस्यमयी बीमारी आज दुनिया के 15 से ज्यादा देशों में फैल चुकी है. इसमें रूस, चीन, यूके और यहां तक कि हमारा भारत भी शामिल है.
रिपोर्ट में बताया गया कि अमेरिकी सरकार ने एक सीक्रेट 'अंडरकवर ऑपरेशन' (खुफिया मिशन) के तहत एक खास मशीन (डिवाइस) खरीदी थी और वह पिछले एक साल से उसकी कड़ी टेस्टिंग कर रही है. अमेरिका को शक है कि यह वही मशीन हो सकती है जिसकी वजह से दुनियाभर में उनके जासूसों को यह रहस्यमयी बीमारी हो रही है. इस मशीन को बाइडन सरकार के आखिरी दिनों में कई मिलियन डॉलर्स (करोड़ों रुपये) देकर खरीदा गया था.
क्या इस मशीन के पीछे रूस का हाथ है?
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, यह जो सीक्रेट मशीन अमेरिका के हाथ लगी है, वह 'पल्स्ड रेडियो वेव' (तरंगें) छोड़ती है. एक्सपर्ट्स काफी समय से यही शक जता रहे थे कि हवाना सिंड्रोम के पीछे इन्हीं रेडियो वेव का हाथ हो सकता है.
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