How to Use Glucometer Correctly: आजकल डायबिटीज मैनेजमेंट के लिए घर पर ग्लूकोमीटर का इस्तेमाल आम हो गया है. उंगली में हल्की सी चुभन और कुछ सेकंड में शुगर की रीडिंग, इतना आसान तरीका लोगों को राहत देता है. लेकिन राजस्थान में सामने आए मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में 20 करोड़ के खराब ग्लूकोमीटर की सप्लाई से बड़ा घोटाला सामने आया है. इन उपकरणों ने करीब 15 हजार स्वस्थ लोगों को डायबिटीज का मरीज बता दिया. जांच में गलत रीडिंग की पुष्टि हुई है. बावजूद इसके अब तक कंपनी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जबकि सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं. तो सवाल ये उठता है कि क्या हर ग्लूकोमीटर पर आंख बंद करके भरोसा करना सही है?
जब खराब मशीनें हजारों लोगों को गलत रिपोर्ट दे सकती हैं, तो जरूरी हो जाता है कि हम इन डिवाइस को सही तरीके से इस्तेमाल करना सीखें. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि थोड़ी सी सावधानी न सिर्फ सही रीडिंग देती है, बल्कि गलत इलाज से भी बचा सकती है. एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. संदीप खरब (Dr Sandeep Kharb) ने बताया इस्तेमाल करने का सही तरीका.
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ग्लूकोमीटर का इस्तेमाल करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
1. सही मशीन का चुनाव करें
हर ग्लूकोमीटर एक जैसा नहीं होता. हमेशा प्रमाणित और भरोसेमंद ब्रांड का ही चुनाव करें. सस्ता और अनजान डिवाइस कभी-कभी गलत रीडिंग दे सकता है, जिससे आपकी हेल्थ पर सीधा असर पड़ सकता है.
2. स्ट्रिप्स की एक्सपायरी और स्टोरेज पर ध्यान दें
ग्लूकोमीटर की रीडिंग काफी हद तक टेस्ट स्ट्रिप्स पर निर्भर करती है. एक्सपायर्ड स्ट्रिप्स या नमी में रखी स्ट्रिप्स गलत रिजल्ट दे सकती हैं. हमेशा स्ट्रिप्स को ठंडी और सूखी जगह पर रखें और इस्तेमाल से पहले उनकी एक्सपायरी जरूर चेक करें.
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3. टेस्ट करने से पहले हाथ साफ रखें
अगर हाथ गंदे हैं या उन पर कुछ मीठा लगा है, तो रीडिंग गलत आ सकती है. टेस्ट से पहले साबुन और पानी से हाथ धोकर अच्छी तरह सुखाना बहुत जरूरी है. यह छोटी सी आदत आपकी रिपोर्ट की सटीकता बढ़ा देती है.
4. सही समय पर टेस्ट करें
शुगर टेस्ट का समय भी बहुत मायने रखता है. फास्टिंग, खाने के बाद (Post Meal) या रैंडम टेस्ट, हर एक का अलग महत्व होता है. गलत समय पर टेस्ट करने से रीडिंग कन्फ्यूजिंग हो सकती है, इसलिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही टाइमिंग फॉलो करें.

5. रीडिंग को क्रॉस-चेक करना न भूलें
अगर कभी रीडिंग असामान्य लगे, जैसे अचानक बहुत ज्यादा या बहुत कम, तो उसे तुरंत सही मान लेना सही नहीं है. ऐसी स्थिति में दोबारा टेस्ट करें या किसी लैब में जाकर कन्फर्म करें. समय-समय पर लैब टेस्ट (जैसे HbA1c) भी करवाते रहना चाहिए.
ग्लूकोमीटर एक बेहद उपयोगी डिवाइस है, लेकिन यह तभी भरोसेमंद है जब आप इसे सही तरीके से इस्तेमाल करें. छोटी-छोटी गलतियां बड़ी परेशानी बन सकती हैं.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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