Noida Water Crisis: गौतमबुद्ध नगर जिले में 10 लाख से ज्यादा लोग ऐसे भूजल पर निर्भर हैं, जिसमें इंडस्ट्रियल केमिकल, सीवेज और जहरीले तत्व मिले हुए हैं. इसका सीधा असर लोगों की सेहत पर दिखने लगा है टाइफाइड, हेपेटाइटिस, पेट के गंभीर संक्रमण और यहां तक कि कैंसर जैसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. देश की राजधानी से सटे शहर नोएडा को आईटी हब, हाई-राइज सोसायटी और तेज विकास के लिए जाना जाता है. लेकिन, इसी चमक-दमक के पीछे एक डरावनी सच्चाई छिपी है. हालिया रिपोर्ट्स और स्थानीय जमीनी हालात बताते हैं कि नोएडा और आसपास के इलाकों में लाखों लोग ऐसा पानी पीने को मजबूर हैं, जो रसायनों और मल-मूत्र से बुरी तरह दूषित है.
यह सिर्फ गंदे पानी की समस्या नहीं, बल्कि एक धीमा जहर है जो रोज-रोज लोगों के शरीर में जा रहा है और बड़े स्वास्थ्य संकट को जन्म दे रहा है. गौतमबुद्ध नगर जिले में 10 लाख से ज्यादा लोग ऐसे भूजल पर निर्भर हैं, जिसमें इंडस्ट्रियल केमिकल, सीवेज और जहरीले तत्व मिले हुए हैं. इसका सीधा असर लोगों की सेहत पर दिखने लगा है टाइफाइड, हेपेटाइटिस, पेट के गंभीर संक्रमण और यहां तक कि कैंसर जैसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है.
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कैसे जहरीला हुआ नोएडा का पानी?
जागरण में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, नोएडा और गौतमबुद्ध नगर के कई इलाकों में अवैध डाइंग और केमिकल इंडस्ट्री लंबे समय से सक्रिय हैं. ये फैक्ट्रियां बिना किसी ट्रीटमेंट के रासायनिक अपशिष्ट पास की नदियों और खुली जमीन में छोड़ देती हैं. खासकर हिंडन नदी (स्थानीय तौर पर हरनंदी भी कही जाती है) और आसपास की जमीन इसका सबसे बड़ा शिकार बन रही है.
जब जहरीला कचरा जमीन में जाता है, तो वह धीरे-धीरे भूजल में मिल जाता है. यही भूजल हैंडपंप, बोरवेल और ट्यूबवेल के जरिए लोगों के घरों तक पहुंचता है. ऊपर से देखने में पानी साफ लग सकता है, लेकिन उसमें मौजूद रसायन और बैक्टीरिया शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचाते हैं.
कौन-कौन सी बीमारियों का बढ़ रहा खतरा?
1. टाइफाइड और हेपेटाइटिस
दूषित पानी में मौजूद बैक्टीरिया और वायरस सीधे पेट और लिवर पर असर डालते हैं. यही वजह है कि टाइफाइड और हेपेटाइटिस ए व ई के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं.
2. पेट और आंतों की बीमारियां
लगातार गंदा पानी पीने से डायरिया, पेट दर्द, उल्टी और आंतों में सूजन जैसी समस्याएं आम हो गई हैं, खासकर बच्चों और बुजुर्गों में.
3. स्किन और एलर्जी की दिक्कतें
रसायनों से दूषित पानी त्वचा के संपर्क में आने पर खुजली, रैशेज और एलर्जी पैदा करता है.
4. कैंसर का खतरा
लंबे समय तक हैवी मेटल्स और जहरीले केमिकल्स वाले पानी का सेवन कैंसर के खतरे को भी बढ़ा सकता है. यह सबसे खतरनाक और डराने वाला पहलू है.
आम लोग क्या कर सकते हैं?
जब तक सरकारी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक लोगों को खुद सावधानी बरतनी होगी:
- पीने के लिए RO या उबला हुआ पानी इस्तेमाल करें
- बच्चों को बाहर का पानी पीने से रोकें.
- पानी की समय-समय पर जांच कराएं.
- सामूहिक रूप से प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बनाएं.
समाधान क्या है?
इस संकट का समाधान सिर्फ लोगों की सावधानी से नहीं होगा. इसके लिए जरूरी है कि अवैध डाइंग और केमिकल इंडस्ट्री पर सख्त कार्रवाई हो, सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट के ट्रीटमेंट की व्यवस्था हो, भूजल की नियमित मॉनिटरिंग की जाए, दोषी अधिकारियों और उद्योगों को जवाबदेह बनाया जाए.
नोएडा और गौतमबुद्ध नगर में जहरीला पानी सिर्फ पर्यावरण की समस्या नहीं, बल्कि एक बड़ा पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी बन चुका है. अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह धीमा जहर आने वाली पीढ़ियों की सेहत पर भी भारी पड़ेगा.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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