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मध्य प्रदेश में दूषित पेयजल से एक और मौत, अनीता कुशवाहा ने तोड़ा दम, इंदौर में कहां पहुंचा डेथ टोल?

Dirty Water Death In Indore: हाई कोर्ट में पेश की गई मध्य प्रदेश सरकार की स्टेट्स रिपोर्ट के मुताबिक भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त के प्रकोप के दौरान स्थानीय अस्पतालों में कुल 454 मरीजों को भर्ती किया गया, जिनमें से 441 लोगों को उपचार के बाद छुट्टी दी जा चुकी है और फिलहाल 11 रोगी अस्पतालों में भर्ती हैं.

मध्य प्रदेश में दूषित पेयजल से एक और मौत, अनीता कुशवाहा ने तोड़ा दम, इंदौर में कहां पहुंचा डेथ टोल?
INDORE CONTAMINATED DRINKING WATER DEATH TOLL RISING

 Contaminated Water Death: इंदौर में दूषित पेयजल से रविवार को और पीड़ित की मौत का दावा किया जा रहा है. दावा है कि इंदौर में दूषित पानी से हुई यह 32वीं मौत है. दूषित पानी की त्रासदी की शिकार हुई मृतका अनीता कुशवाहा का पिछले कई दिनों से अस्पताल में इलाज चल रहा था, लेकिन रविवार देर रात उन्होंने अंततः दम तोड़ दिया. 

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से मृतकों का सिलसिला थम नहीं पा रहा है. रविवार को त्रासदी की शिकार हुई 65 वर्षीय अनीता कुशवाहा जिंदगी की जंग हार गई. दावा है इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से हुई मौत का आंकड़ा अब 32 पहुंच चुका है. हालाकि मौत के आंकड़ों को लेकर अभी भी प्रशासन की चुप्पी कायम है

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भागीरथपुरा में हुई 16 मौतों की वजह दूषित पेयजल

गौरतलब है इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से हुए मौतों के संबंध में मध्य प्रदेश सरकार ने बीते मंगलवार को हुई सुनवाई में उच्च न्यायालय को बताया था कि महीने भर पहले भागीरथपुरा इलाके में हुई 16 मौतों की वजह दूषित पेयजल के कारण फैली उल्टी-दस्त का प्रकोप हो सकता है.

एमपी हाई कोर्ट ने दिया है न्यायिक जांच का आदेश 

उल्टी-दस्त के प्रकोप में इंदौर में हुई कई लोगों की मौत के मामले में बीते मंगलवार को हुई सुनवाई में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने न्यायिक जांच का आदेश दिया. कोर्ट ने इसके लिए उच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश की अगुवाई में एक सदस्यीय जांच आयोग गठन किया है, जो चार हफ्ते में अंतरिम रिपोर्ट पेश करेगी.

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उच्च न्यायालय ने सुनवाई के बाद जारी आदेश में कहा था कि आरोपों की गंभीरता और पेयजल त्रासदी के कारण लोगों के जीवन के अधिकार पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए हाई कोर्ट की राय है कि इस मामले में एक स्वतंत्र और विश्वसनीय प्राधिकरण द्वारा जांच की आवश्यकता है

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चार हफ्ते में अंतरिम रिपोर्ट पेश करने का निर्देश

उल्लेखनीय है दूषित पेयजल त्रासदी को लेकर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि ‘एक स्वतंत्र और विश्वसनीय प्राधिकरण' द्वारा इस मामले की 'तुरंत न्यायिक जांच' किए जाने की आवश्यकता है. कोर्ट ने न्यायिक आयोग को कार्यवाही शुरू होने की तारीख से चार हफ्ते के भीतर अंतरिम रिपोर्ट पेश करने का भी निर्देश दिया है.

दिसंबर के आखिर में शुरू हुआ दूषित जल का प्रकोप

उल्लेखनीय है भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से उल्टी दस्त का प्रकोप दिसंबर के आखिर में शुरू हुआ था और अब तक कम से कम 28 लोगों की मौत का दावा किया गया है. हालांकि राज्य सरकार की ओर से उच्च न्यायालय में कुल 23 मृतकों के 'डेथ ऑडिट' की रिपोर्ट पेश की गई है. जिसमें से सिर्फ 16 लोगों की मौत का संबंध दूषित पेयजल माना गया है.

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