कैंसर के लक्षणों की बात करें तो आमतौर पर लोगों के मन में गांठ, लगातार वजन घटना, खून आना या लंबे समय तक दर्द बने रहना जैसे संकेत आते हैं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि कुछ मामलों में कैंसर का पहला संकेत शरीर के किसी अंग में नहीं, बल्कि दिमाग और नसों (Nervous System) में भी दिखाई दे सकता है. इस स्थिति को पैरानियोप्लास्टिक सिंड्रोम (Paraneoplastic Syndrome) कहा जाता है. यह एक दुर्लभ लेकिन गंभीर बीमारी है, जिसमें कैंसर सीधे मस्तिष्क तक नहीं पहुंचता, बल्कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) गलती से मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी या नसों पर हमला करने लगती है.
डॉ. अनिंद्य मुखर्जी, सीनियर कंसल्टेंट, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, शारदाकेयर–हेल्थसिटी के अनुसार, पैरानियोप्लास्टिक सिंड्रोम कई बार कैंसर की पहचान होने से महीनों पहले ही न्यूरोलॉजिकल लक्षणों के रूप में सामने आ सकता है. इसलिए ऐसे मरीजों में केवल दिमाग की बीमारी मानकर इलाज शुरू करने के बजाय कैंसर की संभावना पर भी विचार करना जरूरी होता है.
क्या होता है Paraneoplastic Syndrome?
विशेषज्ञ बताते हैं कि जब शरीर में कैंसर विकसित होता है तो प्रतिरक्षा प्रणाली कैंसर कोशिकाओं से लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनाती है. कुछ मामलों में यही एंटीबॉडी गलती से मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और नसों की स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करने लगती हैं. इससे न्यूरोलॉजिकल समस्याएं पैदा हो जाती हैं, जिन्हें पैरानियोप्लास्टिक सिंड्रोम कहा जाता है.
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
डॉक्टर के अनुसार, इस बीमारी के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि मस्तिष्क या तंत्रिका तंत्र का कौन-सा हिस्सा प्रभावित हुआ है. प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं—
- अचानक याददाश्त कमजोर होना
- व्यवहार और व्यक्तित्व में बदलाव
- बोलने या समझने में कठिनाई
- चलने में असंतुलन या बार-बार गिरना
- हाथ-पैरों में कमजोरी या सुन्नपन
- मांसपेशियों में अनियंत्रित झटके
- बार-बार दौरे (सीजर)
- धुंधला दिखना या दोहरा दिखाई देना
यदि ये लक्षण बिना किसी स्पष्ट कारण के तेजी से बढ़ रहे हों, तो न्यूरोलॉजिस्ट से तुरंत सलाह लेनी चाहिए.
किन लोगों में अधिक होता है खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह सिंड्रोम अक्सर फेफड़ों के कैंसर, स्तन कैंसर, ओवरी कैंसर, लिम्फोमा और कुछ अन्य कैंसर से जुड़ा हो सकता है. हालांकि यह हर कैंसर मरीज में नहीं होता, लेकिन जिन लोगों में अचानक न्यूरोलॉजिकल लक्षण विकसित हों, उनमें इसकी संभावना को ध्यान में रखा जाता है.
कैसे होती है जांच ?
पैरानियोप्लास्टिक सिंड्रोम की पहचान के लिए मरीज की विस्तृत न्यूरोलॉजिकल जांच की जाती है. इसके अलावा MRI ब्रेन, CT स्कैन, PET-CT (जरूरत पड़ने पर), ब्लड टेस्ट, CSF जांच (लंबर पंक्चर) और विशेष एंटीबॉडी टेस्ट कराए जा सकते हैं. यदि कैंसर की आशंका हो, तो संबंधित अंगों की भी जांच की जाती है.
क्या इसका इलाज संभव है?
डॉक्टर बताते हैं कि इलाज का मुख्य उद्देश्य कैंसर का उपचार करना और प्रतिरक्षा प्रणाली की असामान्य प्रतिक्रिया को नियंत्रित करना होता है. इसके लिए मरीज की स्थिति के अनुसार सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी, स्टेरॉयड, IVIG या प्लाज्मा एक्सचेंज जैसी उपचार पद्धतियां अपनाई जा सकती हैं. समय पर इलाज शुरू होने से कई मरीजों में न्यूरोलॉजिकल समस्याओं में सुधार संभव होता है.
डॉक्टर का संदेश "Paraneoplastic Syndrome एक कम चर्चित लेकिन गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थिति है. कई बार मरीज में पहले दिमाग और नसों से जुड़े लक्षण दिखाई देते हैं और बाद में कैंसर का पता चलता है. यदि किसी व्यक्ति में अचानक याददाश्त में कमी, संतुलन बिगड़ना, दौरे पड़ना या व्यवहार में बदलाव जैसे लक्षण तेजी से विकसित हों, तो केवल न्यूरोलॉजिकल बीमारी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. समय पर जांच से कैंसर की जल्द पहचान हो सकती है और उपचार के बेहतर परिणाम मिल सकते हैं."
डॉ. अनिंद्य मुखर्जी, सीनियर कंसल्टेंट, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, शारदाकेयर–हेल्थसिटी
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