- राम मंदिर में कथित चोरी मामले में SIT ने काउंटिंग सेंटर के कर्मचारियों से पूछताछ की
- कैशियर ने बताया कि काउंटिंग सेंटर में दो शिफ्ट में कर्मचारी काम करते थे
- सुरक्षा जांच में वाहन पार्किंग, पुलिस तलाशी, मोबाइल और निजी सामान लॉकर में जमा करते थे
राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले में 8 आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद SIT अब उन सभी कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है, जो पिछले कुछ सालों से काउंटिंग सेंटर में ड्यूटी कर रहे थे. इसी क्रम में एक ऐसे कैशियर का बयान दर्ज किया गया है, जिसने लंबे समय तक गिरफ्तार आरोपियों के साथ एक ही काउंटिंग रूम में बैठकर दान की गिनती की.
करीब 30 मिनट तक चली पूछताछ में SIT ने कैशियर से सिर्फ चोरी की घटना ही नहीं, बल्कि मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था, कैश काउंटिंग सिस्टम, आरोपियों के व्यवहार, ड्यूटी पैटर्न, CCTV मॉनिटरिंग और बैंक तक नकदी पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया को लेकर विस्तार से सवाल पूछे. बयान मंदिर परिसर के भीतर बने ग्रीन हाउस में दर्ज किया गया.
कैशियर ने बताया कि जिस व्यवस्था को बेहद सुरक्षित माना जाता था, उसी व्यवस्था के भीतर कथित चोरी इतने लंबे समय तक होती रही और किसी कर्मचारी को इसकी भनक तक नहीं लगी.
2025 में इंटरव्यू देकर मिली नौकरी
कैशियर ने बताया कि उसकी नियुक्ति साल 2025 में इंटरव्यू के बाद हुई थी. तब से वह लगातार ट्रस्ट के अधीन दान की गिनती का काम कर रहा है. उसने बताया कि काउंटिंग सेंटर में रोज दो शिफ्ट चलती थीं. पहली शिफ्ट सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक वहीं दूसरी शिफ्ट दोपहर 2 बजे से शाम 8 बजे तक रहती. वह स्वयं दूसरी शिफ्ट में तैनात रहता था. उसके अनुसार हर दिन बड़ी मात्रा में नकदी और सिक्के काउंटिंग सेंटर में आते थे, जिनकी पूरी प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार होती थी.

मंदिर पहुंचने से पहले ही शुरू हो जाती थी सुरक्षा जांच
कैशियर ने बताया कि काउंटिंग सेंटर तक पहुंचने से पहले कर्मचारियों को कई स्तर की सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ता था. सबसे पहले कर्मचारी अपने वाहन राम निवास गेट या अंगद टीला गेट पर पार्क करते थे. इसके बाद मुख्य प्रवेश द्वार पर पुलिस की ओर से तलाशी ली जाती थी. इसके बाद कर्मचारी हुंडी कार्यालय पहुंचते थे, जहां दोबारा उनकी जांच होती थी. यहां उपस्थिति दर्ज की जाती थी और ड्यूटी का समय रिकॉर्ड किया जाता था.
इसके बाद सभी कर्मचारियों को अपने मोबाइल फोन, पर्स, घड़ी, अंगूठी, माला और अन्य निजी सामान लॉकर में जमा करना पड़ता था. सभी को विशेष यूनिफॉर्म (डांगरी) पहननी होती थी ताकि कोई भी कर्मचारी निजी कपड़ों में अंदर प्रवेश न कर सके. उसने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया CCTV कैमरों में रिकॉर्ड होती थी. SIS सुरक्षा कर्मी कर्मचारियों की पहचान सूची से मिलान करने के बाद ही उन्हें काउंटिंग सेंटर में प्रवेश देते थे. दान पात्र खोलने से लेकर बैंक तक पहुंचाने तक हर प्रक्रिया तय नियमों के तहत होती थी.

दो शिफ्ट में काम करते थे कर्मचारी
काउंटिंग सेंटर में करीब 50 कर्मचारी दो शिफ्टों में काम करते थे. इनमें SBI के कर्मचारी, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अधिकारी, सुपरवाइजर, कैशियर और काउंटिंग स्टाफ सभी शामिल रहते थे.
नोटों को पहले मूल्य के हिसाब से अलग किया जाता था. फिर मशीन और मैनुअल दोनों तरीकों से गिनती होती थी. इसके बाद गड्डियां तैयार कर रजिस्टर में एंट्री की जाती थी और अंत में बैंक की अधिकृत गाड़ी नकदी लेकर चली जाती थी.
आरोपी रोज साथ काम करते थे, लेकिन कभी शक नहीं हुआ
कैशियर ने बताया कि गिरफ्तार अधिकांश आरोपी उसके साथ रोजाना काम करते थे. उसने कहा कि सभी आरोपी अपने काम में लगे रहते थे। वे न तो ज्यादा बातचीत करते थे और न ही किसी तरह की हलचल करते थे. उसने कहा, हम लोग रोज साथ बैठकर काम करते थे. लेकिन कभी ऐसा नहीं लगा कि ये लोग किसी गलत गतिविधि में शामिल हो सकते हैं.

अनुकल्प हमेशा अपनी आर्थिक स्थिति का जिक्र करता था
कैशियर ने बताया कि आरोपी अनुकल्प अक्सर कर्मचारियों के बीच अपनी संपन्नता की चर्चा करता था. वह कहता था कि उसका परिवार बेहद संपन्न है, उसके पिता बड़े ठेकेदार हैं और उसे धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने के साथ-साथ राजनीति में भी विशेष रुचि है. कैशियर के अनुसार उस समय किसी ने उसकी बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया क्योंकि वह अक्सर इसी तरह की बातें करता था.
टीनू यादव का नाम लेते ही रास्ता खुल जाता था
कैशियर ने बताया कि आरोपी टीनू यादव की ड्यूटी अधिकतर गर्भगृह के आसपास रहती थी. उसने दावा किया कि अगर कभी किसी कर्मचारी को सुरक्षा जांच के दौरान रोका जाता था तो केवल टीनू यादव का नाम लेने पर आगे जाने दिया जाता था. हालांकि इस दावे की जांच भी SIT कर रही है.
टी ब्रेक भी कैमरों की निगरानी में होता था
कैशियर ने बताया कि शाम करीब साढ़े पांच बजे सभी कर्मचारियों का टी ब्रेक होता था. कर्मचारी CCTV कैमरों के सामने से गुजरते हुए कैंटीन तक जाते थे, जहां ट्रस्ट की ओर से चाय और नाश्ता दिया जाता था. यानी काउंटिंग सेंटर के भीतर कर्मचारियों की लगभग हर गतिविधि कैमरों में रिकॉर्ड होती थी.
फिर चोरी कैसे होती रही?
कैशियर ने कहा कि पूरे स्टाफ के लिए यह सबसे बड़ा सवाल है. उसने कहा,हम खुद हैरान हैं कि इतने CCTV कैमरों और इतनी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद चोरी कैसे होती रही. हमें कभी इन लोगों पर शक तक नहीं हुआ. लेकिन उसने सुरक्षा व्यवस्था की एक संभावित कमजोरी की ओर भी इशारा किया. उसके मुताबिक जिस कर्मचारी की जिम्मेदारी CCTV मॉनिटरिंग रूम में बैठकर काउंटिंग सेंटर की लाइव निगरानी करने की थी, वह कई बार अपनी सीट से गायब रहता था.
यदि यह दावा सही साबित होता है तो जांच एजेंसियां यह भी पता लगाएंगी कि क्या इसी दौरान कथित चोरी को अंजाम दिया जाता था या फिर चोरी किसी अन्य तरीके से की जाती थी.
SIT ने सिर्फ घटना नहीं, कर्मचारियों की पूरी प्रोफाइल भी तैयार की. कैशियर ने बताया कि पूछताछ के दौरान SIT ने उससे केवल चोरी के बारे में सवाल नहीं पूछे. टीम ने उसका नाम, पता, मोबाइल नंबर, आधार कार्ड, बैंक खाते, परिवार के सदस्यों की जानकारी, नौकरी का रिकॉर्ड और ड्यूटी से जुड़े तमाम विवरण दर्ज किए. सूत्रों के मुताबिक इसी तरह काउंटिंग सेंटर से जुड़े सभी कर्मचारियों का विस्तृत प्रोफाइल तैयार किया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि किसी कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध तो नहीं थी.
जांच का फोकस अब सिस्टम की खामियों पर
SIT अब केवल गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका तक सीमित नहीं है. जांच एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि क्या सुरक्षा व्यवस्था में कोई ऐसी खामी थी जिसका फायदा उठाकर कथित चोरी लंबे समय तक होती रही. इसके लिए CCTV फुटेज, ड्यूटी चार्ट, कर्मचारियों की उपस्थिति, बैंक रिकॉर्ड, नकदी की एंट्री, सुपरवाइजर की भूमिका और मॉनिटरिंग सिस्टम की भी जांच की जा रही है.
कैशियर का बयान जांच के लिहाज से इसलिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह सालों तक उसी काउंटिंग सेंटर में काम करता रहा, जहां कथित तौर पर चोरी की घटनाएं हुईं.
उसके बयान से एक तरफ यह साफ होता है कि काउंटिंग सिस्टम में कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था लागू थी, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी और बड़ा हो गया है कि यदि हर गतिविधि CCTV कैमरों की निगरानी में थी, कर्मचारियों की कई बार तलाशी होती थी और नकदी की पूरी प्रक्रिया रिकॉर्ड होती थी, तो आखिर करोड़ों रुपये की कथित चोरी कैसे होती रही. यही सवाल अब SIT की जांच का सबसे अहम केंद्र बन गया है.
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