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थैलेसीमिया को लेकर न पालें वहम, स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया क्या है Myths and Facts

Thalassemia Myths and Facts: शादी से पहले कुंडली ही नहीं, खून की जांच भी है जरूरी. इस आर्टिकल में जानें थैलेसीमिया को लेकर क्या है स्वास्थ्य मंत्रालय की नई गाइडलाइन.

थैलेसीमिया को लेकर न पालें वहम, स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया क्या है Myths and Facts
Thalassemia Myths and Facts: क्या आपके बच्चे को भी है थैलेसीमिया का खतरा.

Thalassemia Awareness In India: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अपनी सेहत को लेकर अक्सर लापरवाह रहते हैं, लेकिन कुछ बीमारियां ऐसी होती हैं जिनके बारे में सही जानकारी होना बहुत जरूरी है. थैलेसीमिया एक ऐसी ही बीमारी है, जिसे लेकर समाज में कई तरह की गलतफहमियां फैली हुई हैं. हाल ही में स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन अफवाहों को दूर करने के लिए कुछ बेहद जरूरी बातें साझा की हैं.

​आखिर क्या है थैलेसीमिया? (What Is ​Thalassemia)

सबसे पहले आसान भाषा में समझते हैं कि ये क्या है. थैलेसीमिया खून से जुड़ी एक बीमारी है. इसमें शरीर में हीमोग्लोबिन (जो ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है) ठीक से नहीं बन पाता. यह कोई इन्फेक्शन नहीं है, बल्कि एक आनुवंशिक (Genetic) बीमारी है, जो माता-पिता से बच्चों में आती है.

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​मिथक बनाम हकीकत- 

​मंत्रालय ने साफ किया है कि लोग अक्सर थैलेसीमिया को लेकर डरे रहते हैं क्योंकि उन्हें सच नहीं पता होता. 

​मिथक 1- थैलेसीमिया छूने से फैलता है

सच- यह बिल्कुल गलत है. थैलेसीमिया कोई छुआछूत की बीमारी नहीं है. यह न तो साथ खाने से फैलती है, न हाथ मिलाने से और न ही साथ रहने से. यह केवल जींस के जरिए माता-पिता से बच्चे में ट्रांसफर होती है.

​मिथक 2- जो लोग बिल्कुल फिट दिखते हैं, उन्हें जांच की क्या जरूरत?

सच- यही सबसे बड़ा धोखा है. कई लोग 'थैलेसीमिया कैरियर' होते हैं. इसका मतलब है कि उनमें बीमारी के लक्षण तो नहीं दिखते और वे पूरी तरह स्वस्थ नजर आते हैं, लेकिन उनके जींस में यह बीमारी छिपी होती है. 

​मिथक 3- यह बीमारी सिर्फ पुरुषों या सिर्फ महिलाओं को होती है

सच- थैलेसीमिया किसी का जेंडर देखकर नहीं आता. यह पुरुष और महिला दोनों को बराबर रूप से प्रभावित कर सकता है.

​मिथक 4- थैलेसीमिया से बचना नामुमकिन है

सच- यह सच नहीं है. सही जानकारी और समय पर स्क्रीनिंग (जांच) और काउंसलिंग के जरिए इसे रोका जा सकता है. अगर लोग शादी से पहले अपना एचबीए2 (HbA2) टेस्ट करवा लें, तो आने वाली पीढ़ी को इस बीमारी से बचाया जा सकता है.

​कैसे रहें सावधान?

​स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है. अगर आपके परिवार में किसी को पहले से थैलेसीमिया है, तो जांच जरूर कराएं. एक छोटा सा ब्लड टेस्ट यह तय कर सकता है कि आपका बच्चा एक स्वस्थ जीवन जिए.

​आम आदमी के लिए सलाह-

​शादी से पहले कुंडली के साथ-साथ 'ब्लड रिपोर्ट' भी मिलाएं.
​गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर की सलाह पर जरूरी टेस्ट कराएं.
​अफवाहों पर ध्यान न दें और सही जानकारी डॉक्टर से लें.
​याद रखें, थैलेसीमिया से डरने की नहीं, बल्कि जागरूक होने की जरूरत है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

लेखक के बारे में
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आराधना सिंह
Senior Sub Editor
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