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डेंगू रोकने के लिए सिंगापुर का अनोखा प्रयोग, लाखों मच्छरों को जानबूझकर किया जा रहा है रिलीज,क्या है Wolbachia तकनीक

सिंगापुर सरकार ने डेंगू जैसी बीमारी से लड़ने के लिए Wolbachia तकनीक की मदद ली है. जिसके जरिए मच्छरों की मदद से ही मच्छरों को कम किया जा रहा है. जानिए क्या है पूरी प्रोसेस और कैसे करती है काम.

डेंगू रोकने के लिए सिंगापुर का अनोखा प्रयोग, लाखों मच्छरों को जानबूझकर किया जा रहा है रिलीज,क्या है Wolbachia तकनीक
सिंगापुर में Wolbachia तकनीक के जरिए हो रहा मच्छरों का सफाया. ( Image NDTV)

मच्छरों का आतंक गर्मी हो, सर्दी हो या फिर बरसात हमेशा बना ही रहता है. ये न सिर्फ काटकर इरिटेट करते हैं बल्कि कई तरह की बीमारियों को भी बुलावा देते हैं. मच्छरों से निपटने के लिए देशों के सरकारें भी नई गाइडलाइंस को लोगों के साथ शेयर करती है और उनको सेफ रहने की अपील करती है. लेकिन सिंगापुर में ऐसा नहीं होता है. 

अगर आप भी सिंगापुर जाएं और आपको अचानक से लगे कि वहां पर मच्छरों की संख्या बढ़ गई है तो ये आपका कोई भ्रम नहीं है. दरअसल सिंगापुर में हर हफ्ते जानबूझकर कई मच्छरों को छोड़ा जाता है. ये आपको सुनने भी अजीब भले ही लग रहा हो, लेकिन ये कोई बेवकूफी नहीं है बल्कि बहुत ही सोच-समझकर और सावधानीपूर्वक उठाया गया एक कदम है. जो सार्वजनिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की रणनीति के चलते लिया गया है. 

Channel News Asia की रिपोर्ट के अनुसार, सिंगापुर द्वारा उठाए गए इस कदम का मकसद मच्छरों को आबादी को कम करना है. इसका उद्देश्य मच्छरों की कुल आबादी को बढ़ाना नहीं बल्कि कम करना है. ये सभी  Wolbachia तकनीक के जरिए किया जाता है. तो चलिए जानते हैं कि ये कैसे काम करता है.

सिंगापुर की मच्छर रणनीति क्या है?

रिपोर्ट्स की मानें तो सिंगापुर में हर हफ्ते लाखों मच्छरों को छोड़ा जाता है ताकि उनकी आबादी को कम किया जा सके. ये मच्छर काटते नहीं हैं. दरअसल जिन मच्छरों को छोड़ा जाता है वो नर मच्छर होते हैं. इंसानो का खून केवल मादा मच्छर ही चूसती हैं और वहीं इंसानों को काटती भी हैं. 

इन नर मच्छरों में Wolbachia नाम का एक नेचुरल बैक्टीरिया होता है. जब इससे संक्रमित मच्छर किसी नादा मच्छर के साथ प्रजनन करता है तो उनसे बनने वाले अंडे फूटते नहीं हैं. समय के साथ ये प्रक्रिया मच्छरों के प्रजनन को रोकने में मदद करती है. यही तकनीक उनकी संख्या को कम करने में भी मदद करते हैं. इसके साथ ही डेंगू जैसे मच्छर से होने वाले रोगों से बचाव में भी मदद मिलती है.

Wolbachia रणनीति कैसे काम कर रही है?

ये कदम गूगल के समर्थन से चलाई जा रही है, रिसर्चर्स का ऐसा मानना है कि Wolbachia से संक्रमित मच्छर इनसे होने वाली बीमारियों से लड़ने के लिए सबसे प्रभावी तरीकों में से एक है. Wolbachia एक नेचुरल बैक्टीरिया होता है जो तितलियों, मधुमक्खियों जैसे कीट में पाया जाता है.

सबसे जरूरी बात है कि इसका इंसानों या जानवरों पर कोई असर या खतरा नहीं होता है, लेकिन मच्छरों में इनका असर देखने को मिलता है.

Aedes Aegypti मच्छर डेंगू, जीका और चिकनगुनिया जैसी मच्छर जनित रोगों का वाहक होता है. हालांकि वैज्ञानिक कंट्रोल्ड कंडीशन्स में इस बैक्टीरिया को इन मच्छरों में डाल सकते हैं. नियंत्रित परिस्थितियों में इस बैक्टीरिया को इन मच्छरों में डाल सकते हैं।

मच्छर के अंदर Wolbachia के मौजूद होने के बाद ये मच्छरों की बॉडी में वायरस की संख्या बढ़ाने की क्षमता को कम करने में मदद करता है. जिसके चलते संक्रमित मच्छरों द्वारा इंसानों में कोई भी बीमारी फैलने की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश एक रिसर्च में भी  Wolbachia की मदद से मच्छरों से होने वाली बीमारियों को रोकने में काफी हद तक कम किया जा सकता है. 

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में ही छपी दूसरी एक रिसर्च में भी डेंगू से लड़ने में भी वोल्बाकिया-युक्त एडीस मच्छर मदद करते हैं. 

कैसे होती है पूरी प्रोसेस ?

ये प्रोसेस हाई स्पीड स्क्रीनिंग सिस्टम से शुरू होती है, हर मच्छर को छोड़ने से पहले उनकी जांच होती है. हर दिन लाखों की संख्या में मच्छर AI बेस्ड सेक्स-सॉर्टिंग मशीन से प्रोसेस किया जाता है, जिसमें हर मच्छर अलग-अलग लेन से गुजरता है. इस प्रोसेस के दौरान हाई-रेजोल्यूशन फोटोज ली जाती है और उनका रियल टाइम पर विश्लेषण किया जाता है. ताकि मेल और फीमेल मच्छरों की पहचान की जा सके. 

इसके बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा उन मच्छरों की पहचान करता है जो काटते नहीं हैं, उनको ही छोड़ा जाता है. जहां पर ये फीमेल मच्छरों के साथ प्रजनन करते हैं. क्योंकि इन मच्छरों में Wolbachia मौजूद होता है, इसलिए इनसे बनने वाले अंडे फूट नहीं पाते और अगली पीढ़ी विकसित नहीं हो पाती.

समय के साथ इस तकनीक की मदद से मच्छरों की आबादी को कम करने में और इनसे होने वाली बीमारियों के प्रसार को रोकने में मदद करती है.

परिणामों की बात करें तो Channel News Asia के अनुसार, इस प्रोसेस के बाद सिंगापुर के कुछ हिस्सों में मच्छरों की संख्या 90 प्रतिशत से ज्यादा कम हो गई है.

संदर्भ

pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC11005084/
pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC12264603/

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