क्या सिर्फ योग करने से पिता बनने की संभावना बढ़ सकती है? ये सवाल सुनने में भले अजीब लगे, लेकिन एम्स (AIIMS) की एक पोस्ट ने इस बारे में नई जानकारी शेयर की है. एम्स, नई दिल्ली ने अपने एक्स हैंडल @aiims_newdelhi पर मेल फर्टिलिटी और योग के संबंध में वैज्ञानिक जानकारी साझा की है. पोस्ट में बताया गया है कि नियमित योग, प्राणायाम और मेडिटेशन शरीर और दिमाग दोनों पर पॉजिटिव असर डालते हैं. खासकर जिन पुरुषों की फर्टिलिटी तनाव, खराब लाइफस्टाइल या ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से प्रभावित है, उन्हें इससे फायदा मिल सकता है.
AIIMS ने पोस्ट में क्या कहा?
एम्स की पोस्ट के मुताबिक, एनाटॉमी विभाग की प्रोफेसर डॉ. रीमा दादा के नेतृत्व में हुई साइंटिफिक स्टडी से पता चला है कि नियमित योग, प्राणायाम और मेडिटेशन पुरुषों की प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
इससे शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम होता है, स्पर्म के डीएनए को होने वाला नुकसान घट सकता है और स्पर्म की क्वालिटी में सुधार देखने को मिल सकता है.
हालांकि एम्स ने ये भी साफ किया है कि योग किसी बीमारी का इलाज नहीं है, बल्कि हेल्दी लाइफस्टाइल और मेडिकल ट्रीटमेंट के साथ एक इफेक्टिव थेरेपी साबित हो सकता है.
क्या योग से पुरुषों की प्रजनन क्षमता बढ़ सकती है?
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में तनाव लगभग हर व्यक्ति की समस्या बन चुका है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि लगातार तनाव पुरुषों की फर्टिलिटी पर भी असर डाल सकता है. तनाव बढ़ने पर शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे स्पर्म की क्वालिटी प्रभावित हो सकती है.
AIIMS की स्टडी में क्या सामने आया?
एम्स के मुताबिक अनुलोम-विलोम, भ्रामरी प्राणायाम और मेडिटेशन तनाव और चिंता को कम करने में मदद करते हैं. इसका पॉजिटिव असर हार्मोनल बैलेंस और रिप्रोडक्शन पर भी पड़ सकता है.
????♂️Yoga & Male Reproductive Health
— AIIMS, New Delhi ???????? (@aiims_newdelhi) August 4, 2026
According to scientific studies led by Dr. Rima Dada (Professor of Anatomy at AIIMS New Delhi), practicing regular Yoga, Pranayama, and Meditation can play a key role in improving male fertility.
Key Takeaways:
- Helps reduce oxidative… pic.twitter.com/raGStYH3h1
ये 5 योगासन हो सकते हैं फायदेमंद
एम्स ने पुरुषों की प्रजनन क्षमता के लिए कुछ योगासन भी बताए हैं.
• भुजंगासन- पेल्विक हिस्से में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने में मदद करता है.
• धनुरासन- रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स को सक्रिय करने में सहायक माना जाता है.
• पश्चिमोत्तानासन- तनाव कम करने के साथ हार्मोन बैलेंस रखने में मदद करता है.
• सेतु बंधासन- प्रोस्टेट और पेल्विक फ्लोर की मसल्स के लिए लाभकारी माना जाता है.
• वज्रासन- भोजन के बाद किया जा सकता है और डाइजेशन के साथ हार्मोनल हेल्थ को भी सपोर्ट करता है.
कितने दिन योग करने पर दिख सकता है असर?
एम्स की सलाह है कि हफ्ते में पांच दिन, रोजाना 30 से 45 मिनट योग, प्राणायाम और मेडिटेशन किया जाए. कम से कम तीन महीने तक नियमित अभ्यास करने पर इसका असर दिखाई दे सकता है.
इसकी वजह ये है कि नए स्पर्म बनने की पूरी साइकिल करीब 72 से 90 दिनों का होता है. अगर योग के साथ बैलेंस डाइट ली जाए, अच्छी नींद पूरी की जाए और शराब और सिगरेट से दूरी बनाई जाए तो रिजल्ट और बेहतर हो सकते हैं.
योग को इलाज नहीं, सपोर्ट सिस्टम समझें
डॉ. रीमा दादा ने साफ कहा है कि योग कोई चमत्कारी इलाज नहीं है. अगर किसी पुरुष को फर्टिलिटी से जुड़ी समस्या है तो डॉक्टर से जांच और इलाज कराना जरूरी है. लेकिन अगर मेडिकल ट्रीटमेंट के साथ नियमित योग, प्राणायाम, मेडिटेशन और हेल्दी लाइफस्टाइल को अपनाया जाए तो स्पर्म हेल्थ में सुधार की पॉसिबिलिटी बढ़ सकती है. यही वजह है कि एम्स ने भी लोगों को योग को अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बनाने की सलाह दी है.
Expert Details: Dr. Rima Dada (Professor of Anatomy at AIIMS New Delhi)
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