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This Article is From Sep 08, 2025

टॉयलेट में स्मार्टफोन स्क्रॉल करने से 40% तक बढ़ सकता है बवासीर का खतरा, स्टडी में खुलासा

Toilet Phone Scrolling Health Risk: आखिर दोनों में क्या संबंध है? फोन पर समय बिताने से एनल में और उसके आस-पास दर्दनाक गांठें कैसे उभर सकती हैं? आइए जानते हैं स्टीड में क्या पाया गया और किन लोगों पर की गई.

टॉयलेट में स्मार्टफोन स्क्रॉल करने से 40% तक बढ़ सकता है बवासीर का खतरा, स्टडी में खुलासा
अमेरिका में हुए नए अध्ययन में 45 साल और उससे ज्यादा उम्र के 125 एडल्ट्स को शामिल किया गया.

Toilet Phone Scrolling Health Risk: हममें से कई लोग टॉयलेट में मोबाइल स्क्रॉल करने के आदी हैं. जब भी हम टॉयलेट में जानते हैं तो अपने साथ मोबाइल जरूर रख लेते हैं. लेकिन, एक नई स्टडी में पाया गया कि इस आदत से बवासीर का खतरा 46 प्रतिशत तक बढ़ सकता है. क्या वाकई ऐसा हो सकता है? आखिर दोनों में क्या संबंध है? फोन पर समय बिताने से एनल में और उसके आस-पास दर्दनाक गांठें कैसे उभर सकती हैं? आइए जानते हैं स्टीड में क्या पाया गया और किन लोगों पर की गई.

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बवासीर क्या है?

हर स्वस्थ व्यक्ति में ऐसी गांठें होती हैं, जो बवासीर का रूप भी अख्तियार कर सकती हैं. गुदा और मलाशय के अंदर या उसके आसपास सूजी हुई और फूली हुई नसें होती हैं. ये गुदा के आसपास की ब्लड वेसल्स के बढ़ने से होती है और इसके कारण एनल से ब्लीडिंग, खुजली, दर्द और बेचैनी की शिकायत हो सकती है. जब सब कुछ ठीक होता है, तो हम उन पर ध्यान नहीं देते. लेकिन, नसों में सूजन आ सकती है और इससे दर्द, ब्लीडिंग या गुदा के अंदर एक गांठ जैसा महसूस होना (आंतरिक बवासीर) या बाहर की ओर उभरी हुई गांठ (बाहरी बवासीर) जैसे लक्षण हो सकते हैं. इसलिए जब किसी को बवासीर होती है, तो इसका मतलब है कि उनमें सूजन आ गई है या लक्षण उभर गए हैं.

बवासीर होने की आशंका ज्यादा होती है अगर:

  • आपकी उम्र ज्यादा है (45 से ज्यादा)
  • आप गर्भवती हैं
  • आपका वजन ज्यादा है
  • आपको लगातार कब्ज या दस्त की समस्या रहती है
  • आप नियमित रूप से भारी चीजें उठाना
  • आप शौचालय में बहुत ज्यादा समय बिताते हैं

शौचालय में बिताए गए समय और बवासीर के बीच संबंध

आमतौर पर लंबे समय तक बैठे रहने को बवासीर की समस्या से नहीं जोड़ा गया है. ऐसा माना जाता है कि टॉयलेट सीट पर लंबे समय तक बैठने से ‘पेल्विक फ्लोर' के अंदर दबाव बढ़ जाता है और गुदा में खून जमा हो जाता है. इससे बवासीर होने की आशंका बढ़ जाती है. पेल्विक फ्लोर मसल्स का एक जाल है, जो पुरुषों में पेट के निचले हिस्से में मूत्राशय और आंतों जबकि महिलाओं में गर्भाशय और योनि जैसे अंगों को सहारा देता है.

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नए अध्ययन में क्या देखा गया?

अमेरिका में हुए नये अध्ययन में 45 साल और उससे ज्यादा उम्र के 125 वयस्कों को शामिल किया गया, जिन्होंने बेथ इजराइल डेकोनेस मेडिकल सेंटर में कोलोनोस्कोपी कराई थी.

कोलोनोस्कोपी एक मेडिकल प्रोसेस है, जिसमें बड़ी आंत (कोलन) और मलाशय की जांच के लिए कैमरे से लैस एक लंबी, पतली, लचीली ट्यूब (कोलोनोस्कोप) का इस्तेमाल किया जाता है. यह डॉक्टर को स्क्रीन पर कोलन के अंदर झांकने और सूजन, पॉलिप्स (असामान्य टिश्यू) या कैंसर जैसी समस्याओं का पता लगाने में मदद करता है.

शोधकर्ताओं ने टॉयलेट में स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने की उनकी प्रवृत्ति का पता लगाया. उन्होंने यह जाना कि वे कितनी बार और कितनी देर तक अपना फोन देखते हैं. प्रतिभागियों ने अन्य आदतों के बारे में भी बताया, जैसे कि तनावग्रस्त महसूस करना, फाइबर का सेवन तथा उन्होंने कितनी देर कोई शारीरिक गतिविधि की.

अध्ययन से क्या पता चला?

सभी प्रतिभागियों में से दो-तिहाई (66 प्रतिशत) ने टॉयलेट में रहने के दौरान स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने की बात कही. सबसे आम एक्टिविटी समाचार पढ़ना (54.3 प्रतिशत) थी, उसके बाद सोशल मीडिया (44.4 प्रतिशत) का इस्तेमाल करना था.

जिन लोगों ने अपने स्मार्टफोन का इस्तेमाल किया, उन्होंने शौचालय में उन लोगों की तुलना में ज्यादा समय बिताया, जिन्होंने इसका इस्तेमाल नहीं किया. शौचालय में स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वालों में से एक तिहाई से ज्यादा (37.3 प्रतिशत) ने शौचालय में पांच मिनट से ज्यादा समय बिताया, जबकि स्मार्टफोन का इस्तेमाल न करने वालों में से सिर्फ 20 में से एक (सात प्रतिशत) ने ही शौचालय में पांच मिनट से ज्यादा समय बिताया.

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स्मार्टफोन का इस्तेमाल न करने वालों की तुलना में स्मार्टफोन यूजर्स में बवासीर का खतरा 46 प्रतिशत ज्यादा था. ये जानने के लिए शोधकर्ताओं ने बवासीर के अन्य ज्ञात जोखिम कारकों जैसे आयु, बॉडी मास इंडेक्स (लंबाई और वजन का अनुपात), फिजिकल एक्टिविटी, स्ट्रेस और फाइबर के सेवन को ध्यान में रखा.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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