सावन का महीना चल रहा है. इस महीने श्रद्धालु सोमवार का व्रत रखते हैं. कई लोग प्रदोष और शिवरात्रि को भी उपवास करते हैं. उपवास न केवल खाना-पीना का त्याग करना है, बल्कि ये जीवन में अनुशासन भी लाता है. व्रत रखने से सेल्फ कंट्रोल, पेशेंस, डिसिप्लिन और पॉजिटिव एनर्जी का विकास होता है. व्रत रखना यूं तो सेहत के लिए भी अच्छा है, लेकिन कुछ लोगों को इससे परेशानी हो सकती है. कुछ लोगों को उपवास से परहेज करना चाहिए, या फिर इसके पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए. आइए जानते हैं वो कौन लोग हैं जिन्हें व्रत रखने के बारे में नहीं सोचना चाहिए.
किन लोगों को व्रत रखने से हो सकती है दिक्कत (Who might face difficulties by observing a fast?)
क्या प्रेग्नेंट और ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाएं व्रत रख सकती हैं?
प्रेग्नेंट महिला अगर उपवास में रहती हैं तो इससे गर्भ में पल रहे बच्चे को भी दिक्कत आ रही हैं. ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाओं के व्रत रखने से उनके शरीर में बनने वाले दूध की मात्रा बदल सकती है, इससे बढ़ते बच्चे के लिए जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है.
डायबिटीज मरीजों के लिए व्रत क्यों बन सकता है जोखिम?
अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं और व्रत करते हैं तो इससे ब्लड शुगर लेवल खतरनाक रूप से कम या ज्यादा हो सकता है. अगर आप शुगर के मरीज हैं और व्रत रख रहे हैं तो यहां हैं आपके लिए बेहद जरूरी टिप्स.
रोजाना दवाइयां लेने वालों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें रोजाना दवाइयां लेनी होती है, उनके लिए उपवास में रखना थोड़ा मुश्किल हो सकता है. कुछ दवाइयों को ठीक से काम करने या पेट दर्द से बचाने के लिए कुछ खाकर लेना जरूरी होता है, ऐसे में उपवास अगर रहते भी हैं तो फलाहार का सेवन जरूर करें.
दिल और किडनी के मरीजों के लिए उपवास कितना सुरक्षित है?
जो लोग दिल या किडनी का बीमारी से पीड़ित हैं उन्हें उपवास रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए. उपवास के दौरान कुछ न खाने से शरीर के जरूरी अंगों पर दबाव पड़ सकता है और उनकी हालत बिगड़ सकती है.
छोटे बच्चों को व्रत क्यों नहीं रखना चाहिए?
छोटे बच्चों को व्रत नहीं रखना चाहिए. उनके लिए व्रत रखना परेशानी भरा हो सकता है. बढ़ते बच्चों को पोषण तत्वों की जरूरत होती है,. इसके कम होने से उनके विकास में बाधा आ सकती है.
व्रत के दौरान किन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
व्रत के दौरान शरीर कुछ ऐसे संकेत देता है जिन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए. अगर आपको अत्यधिक कमजोरी, चक्कर आना, हाथ कांपना, ज्यादा पसीना आना, तेज सिरदर्द, धुंधला दिखना, दिल की धड़कन बढ़ना या बार-बार प्यास लगना जैसी समस्याएं महसूस हों, तो तुरंत सावधान हो जाएं. डायबिटीज, दिल या किडनी के मरीजों के लिए ये लक्षण और भी गंभीर हो सकते हैं. ऐसे में जरूरत पड़ने पर व्रत तोड़ें और डॉक्टर से सलाह लें. आस्था के साथ स्वास्थ्य की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है.
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FAQs
क्या प्रेग्नेंसी में व्रत रखना सुरक्षित है?
प्रेग्नेंसी में व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है क्योंकि इसका असर मां और बच्चे दोनों पर पड़ सकता है.
क्या डायबिटीज मरीज सावन का व्रत रख सकते हैं?
यह व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है. व्रत से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है.
क्या दिल और किडनी के मरीजों को व्रत रखना चाहिए?
ऐसे मरीजों को व्रत रखने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लेना चाहिए.
क्या बच्चों को व्रत रखना चाहिए?
छोटे बच्चों को व्रत नहीं रखना चाहिए क्योंकि उनके विकास के लिए नियमित पोषण जरूरी होता है.
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