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This Article is From Sep 12, 2025

प्रेगनेंसी में क्यों रोज 3 बार पति से गले मिलना भी प्रिसक्राइब करती हैं मुंबई की गायनि, जानें

मुंबई की बेस्ट गायनि डॉ. रंजना धनु ने प्रेगनेंसी से जुड़े कई सवालों के जवाब दिए हैं. इतना ही नहीं उन्होंने ये भी बताया कि वो अपने हर पेशेंट के प्रिस्क्रिप्शन में ये भी लिखती हैं कि रोज अपने पति से 3 बार गले मिलना जरूरी है.

प्रेगनेंसी में क्यों रोज 3 बार पति से गले मिलना भी प्रिसक्राइब करती हैं मुंबई की गायनि, जानें
  • प्रेगनेंसी की शुरुआत में 5वें हफ्ते के बाद सोनोग्राफी होती है ताकि ट्यूबल प्रेगनेंसी जैसी समस्याओं का पता चले
  • शुरुआती 3 महीने संवेदनशील होते हैं क्योंकि बच्चे के सभी अंगों का विकास इसी दौरान शुरू होता है
  • शुरुआती 3 महीनों में रेडिएशन से बचना चाहिए क्योंकि इससे बच्चे के विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है
नई दिल्ली:

प्रेगनेंसी किसी भी महिला के लिए ये एक बहुत ही खास वक्त होता है लेकिन इसी के साथ आते हैं कई सारे सवाल, एन्जाइटी, खुशी, उम्मीद और सबसे अहम... जिम्मेदारी का एहसास. मां बनने का एहसास वाकई में दुनिया के सबसे खूबसूरत एहसासों में से है लेकिन इस दौरान 9 महीने का वक्त कई बार एक महिला के लिए कन्फ्यूजिंग, कॉम्प्लेक्स और कभी-कभी अकेलेपन से भरा हुआ भी हो सकता है और इस वजह से हम यहां आपको कुछ ऐसी चीजें बताने वाले हैं जो प्रेगनेंसी की आपकी इस जर्नी में आपकी कुछ मदद कर सकती हैं. 

दरअसल, हाल ही में एक्ट्रेस सोहा अली खान के पोडकास्ट में आईं मुंबई की बेस्ट गायनि डॉ. रंजना धनु ने प्रेगनेंसी से जुड़े कई सवालों के जवाब दिए हैं. इतना ही नहीं उन्होंने ये भी बताया कि वो अपने हर पेशेंट के प्रिस्क्रिप्शन में ये भी लिखती हैं कि रोज अपने पति से 3 बार गले मिलना जरूरी है. तो चलिए आपको बताते हैं कि आज के वक्त में प्रेगनेंसी की जर्नी को लेकर उनका क्या कहना है और आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए. 

कंसेप्शन से इंप्लांटेशन तक

डॉ. धनु ने बताया कि, "कंसेप्शन आखिरी मेंस्ट्रुअल पीरियड के बाद 11वें दिन से 17वें दिन के बीच होता है और जब एक महिला को पता चलता है कि वो प्रेगनेंट है, तब तक 5 हफ्ते हो चुके होते हैं. इस वजह से अगर आप प्रेगनेंसी की प्लानिंग नहीं कर रहे हैं तो भी और प्लानिंग कर रहे हैं तो भी इस चीज का ध्यान रखना चाहिए." 

शुरुआत के तीन महीने बहुत सावधान रहना है जरूरी

डॉ. धनु ने कहा, "शुरुआत के तीन महीनों में बेबी के सभी ऑर्गन फॉर्म होने शुरू होते हैं और इस वजह से प्रेगनेंट महिलाओं को बहुत सावधान रहने की जरूरत होती है. ऐसे में अगर आप किसी भी डॉक्टर के पास जा रहे हैं और कोई भी दवा ले रहे हैं तो उससे भी बच्चे पर जिंदगी भर का असर रह सकता है. इस वजह से सावधान रहना बहुत जरूरी है क्योंकि एक गायनि को ये नहीं पता चलता है कि पेशेंट ने इस दौरान कौन सी दवाइयां ली हैं. इस वजह से जैसे ही आपको पता चले कि आप प्रेगनेंट है आपको सबसे पहले एक गाजनि से मिलना चाहिए." 

रेडिएशन एक्सपोजर से बचें 

डॉ. धुन ने कहा, "शुरुआत के तीन महीनों में महिलाओं को रेडिएशन एक्सपोजर से बचना चाहिए क्योंकि इससे बच्चे की डेवल्पमेंट पर असर हो सकता है. खासकर जो महिलाएं कॉरपोरेट में हैं और रोज स्कैनर को क्रॉस करती हैं या फिर एयरपोर्ट पर जो महिलाएं काम करती हैं उन्हें भी इस दौरान सावधान रहना चाहिए. 12वें हफ्ते तक कुछ हद तक ऑर्गन डेवल्प हो जाते हैं लेकिन 24वें हफ्ते तक सावधानी बरतनी जरूरी है. इस दौरान महिलाओं को किसी भी तरह की सेक्शुअल एक्टिविटी से भी बचना चाहिए."

कौन से स्कैन करना है जरूरी 

डॉ. धनु ने बताया, "5 हफ्ते के बाद आपको सोनोग्राफी करानी चाहिए क्योंकि कुछ महिलाओं को ट्यूबल प्रेगनेंसी भी होती है, जिसमें एग ट्यूबल से यूट्रस तक नहीं आता है और 6 से 7 हफ्तों में वो ट्यूबल फट सकता है. ऐसे में 5 हफ्तों के बाद ये स्कैन बेहद जरूरी हो जाता है. इसके बाद अगर जिन पेशेंट का पहले मिस कैरेज या अबोर्शन हुआ है वो 8वें हफ्ते में एक स्कैन कराते हैं ताकि वो जान सकें कि उनका बच्चा ठीक है. इसके बाद 11वें या 12वें हफ्ते में एक स्कैन किया जाता है. इसके साथ ही एक ब्लड मार्कर भी होता है, जो बताता है कि बेबी इमैच्योर है या नहीं. इसके बाद 16वें हफ्ते में एक स्कैन किया जाता है. इसके बाद 19वें या 20वें हफ्ते में एक बहुत जरूरी एनोमली स्कैन किया जाता है, जो बताता है कि बच्चे के सभी ऑर्गन सही से डेवल्प हुए हैं या नहीं. फिर 28वें हफ्ते में स्कैन किया जाता है, जिससे पता चलता है कि बच्चा सही से बढ़ रहा है और फिर 32वें हफ्ते में एक स्कैन होता है". 

प्रेगनेंसी के लिए कपल्स गाइड

डॉ. धनु ने कहा, मैं अपने पेशेंट्स को ये प्रिसक्राइब करती हूं कि पति और पत्नी को आपस में टच कर के बात करनी है या फिर वर्बली रोज बात करनी है और रोज 3 बार पति और पत्नी को गले मिलना है. आज के वक्त में स्ट्रेस से जुड़े बहुत ईशू होते हैं और इस वजह से जब रोज पति और पत्नी गले मिलते हैं तो उससे बच्चे को भी अपने पिता की एनर्जी का एहसास होता है और पिता को भी बच्चे से जुड़ाव होता है. 

कॉस्मेटिक केयर 

डॉ. धनु ने कहा, "12वें हफ्ते के बाद मैं अपने पेशेंट्स को उनकी स्किन का बहुत ध्यान रखने की सलाह देती हूं. मैं उन्हें कहती हूं कि वो अपनी स्ट्रेच मार्क क्रीम का इस्तेमाल करना शुरू कर दें और बहुत ज्यादा मॉइश्चर वाले साबुन का नहाते वक्त इस्तेमाल करें. इसके बाद सेकेंड और थर्ड ट्राइमेस्टर में स्ट्रेच मार्क क्रीम का दिन में दो-तीन बार इस्तेमाल करें. इससे प्रेगनेंसी के बाद स्ट्रेच मार्क्स नहीं होते हैं." 

कौन से सप्लीमेंट्स हैं जरूरी 

डॉ. धनु ने बताया, "प्रेगनेंसी की शुरुआत में या फिर अगर कोई महिला प्रेगनेंसी का ट्राई कर रही है तो हम उन्हें फॉलिक एसिड और बी कॉम्प्लेक्स आदी की सलाह देते हैं. अगर उनमें होर्मन डिफिशिएंसी है तो हम उन्हें होर्मन सप्लीमेंट्स भी देते हैं. सेकेंड ट्राइमेस्टर शुरू होने पर उन्हें आयरन और कैल्शीयम, जिंक, ओमेगा आदि की सलाह दी जाती है". 

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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