जब भी फेफड़ों के कैंसर की बात होती है, ज्यादातर लोगों के दिमाग में एक ऐसे बुजुर्ग व्यक्त की तस्वीर आती है, जो लंबे समय से धूम्रपान करता रहा हो. लेकिन अब ये तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है. दुनिया भर में पिछले कुछ सालों में महिलाओं, कम उम्र के लोगों और कभी धूम्रपान न करने वालों में भी फेफड़ों के कैंसर के मामले बढ़े हैं.
हाल ही में पोप लियो XIV के फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित होने की खबर ने इस विषय को फिर चर्च में ला दिया है. रिपोर्ट्स के अनुसार, पोप धूम्रपान नहीं करते हैं. ऐसे में ये सवाल उठ रहा है कि आखिर नॉन-स्मोकर्स में फेफड़ों का कैंसर क्यों बढ़ रहा है.
महिलाओं में तेजी से बढ़ रहे हैं फेफड़ों के कैंसर के मामले
यूनिवर्सिटी ऑफ मियामी की थोरैसिक ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. एस्टेलामारी रोड्रिगेज के मुताबिक, फेफड़ों का कैंसर महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौतों का मुख्य कारण बन चुका है. हर साल फेफड़ों के कैंसर से मरने वाली महिलाओं की संख्या ब्रेस्ट, डिम्बग्रंथि और कोलोरेक्टल कैंसर से होने वाली मौतों से भी अधिक है.
अमेरिकन लंग एसोसिएशन की रिपोर्ट बताती है कि पिछले 44 वर्षों में महिलाओं में फेफड़ों के कैंसर की दर 79 प्रतिशत बढ़ी है. वहीं, पुरुषों में ये 43 प्रतिशत घटी है. पहली बार ऐसा भी देखा गया है कि कम उम्र की महिलाओं में फेफड़ों के कैंसर के मामले समान आयु वर्ग के पुरुषों से अधिक हैं.
धूम्रपान के अलावा भी हैं कई कारण
हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि सिर्फ सिगरेट पीना ही फेफड़ों के कैंसर का कारण नहीं है. इसके पीछे कई अन्य रिस्क कारक भी हो सकते हैं, जैसे-
वायु प्रदूषण
रेडॉन गैस का संपर्क
एस्बेस्टस के संपर्क में आना
कार्यस्थल पर हानिकारक रसायनों का प्रभाव
सेकेंड हैंड स्मोक
पारिवारिक या आनुवंशिक कारण
रिसर्चर्स का मानना है कि कुछ लोगों में जेनेटिक बदलाव भी फेफड़ों के कैंसर का रिस्क बढ़ा सकते हैं.
क्यों देर से पता चलता है फेफड़ों का कैंसर?
नॉन-स्मोकर्स और युवा लोगों में फेफड़ों के कैंसर की आशंका कम समझी जाती है. यही वजह है कि कई बार मरीज और डॉक्टर दोनों शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं. फेफड़ों के कैंसर के सामान्य लक्षणों में शामिल हैं, जैसे-
- लगातार खांसी
- सांस फूलना
- अत्यधिक थकान
- छाती, पीठ या कंधे में दर्द
इन लक्षणों को अक्सर दूसरी सामान्य बीमारियों से जोड़ दिया जाता है, जिससे डायग्नोज में देरी हो सकती है.
समय पर जांच से बढ़ सकती है बचाव की संभावना
विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती चरण में पकड़ा गया फेफड़ों का कैंसर सर्जरी के जरिए पूरी तरह ठीक किया जा सकता है. हालांकि, वर्तमान स्क्रीनिंग गाइडलाइंस मुख्य रूप से उन लोगों पर केंद्रित हैं, जिनका धूम्रपान का लंबा इतिहास रहा है. ऐसे में नॉन-स्मोकर्स में बीमारी अक्सर संयोग से ही पकड़ में आती है.
ये भी पढ़ें - हवा में मौजूद PM आपके शरीर में क्या करता है? डॉक्टर से समझें फेफड़ों और हार्ट को कैसे पहुंचाता है नुकसान
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं