- कैमोर में 10 लाख टन जहरीला एस्बेस्टस कचरा, ब्रिटिश रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा
- ब्रिटिश कंपनी की फैक्ट्री बंद हुई, लेकिन खतरा अब भी बरकरार
- 1970 के दशक में दी गई थी चेतावनी, अब भी भुगत रहे लोग परिणाम
मध्य प्रदेश के कैमोर (Kymore) कस्बे में वर्षों पहले स्थापित एक एस्बेस्टस फैक्ट्री का असर आज भी हजारों लोगों की जिंदगी पर दिखाई दे रहा है. ब्रिटिश मीडिया की एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ब्रिटेन की कंपनी टर्नर एंड न्यूअल से जुड़ा करीब 10 लाख टन एस्बेस्टस कचरा अब भी इलाके में फैला हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक यह जहरीला पदार्थ खेल मैदानों, रिहायशी इलाकों और खुले स्थानों तक में मौजूद है. डॉक्टरों का कहना है कि इसके कारण लोगों में फेफड़ों और सांस संबंधी गंभीर बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है.
ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
ब्रिटेन के समाचार चैनल ITV News की जांच में दावा किया गया है कि मध्य प्रदेश का कैमोर कस्बा आज भी एस्बेस्टस प्रदूषण से जूझ रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन की कभी बड़ी और लाभदायक औद्योगिक कंपनी मानी जाने वाली टर्नर एंड न्यूअल से जुड़ा लगभग 10 लाख टन एस्बेस्टस कचरा अब भी इलाके में फैला हुआ है. बताया गया है कि एस्बेस्टस युक्त मिट्टी, धूल और कचरे के अवशेष आज भी खेल के मैदानों, खेल परिसरों, बस्तियों और खुले क्षेत्रों में देखे जा सकते हैं.
डॉक्टर ने जताई गंभीर चिंता
न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार वर्षों से स्थानीय लोगों की जांच और इलाज कर रहे विशेषज्ञ डॉक्टर मुरलीधर वेंकटेश्वरन ने रिपोर्ट में कहा कि कस्बे में बड़ी संख्या में लोग एस्बेस्टोसिस जैसी बीमारियों से प्रभावित दिखाई देते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे मरीजों को केवल मृत्यु का ही नहीं, बल्कि लंबे समय तक श्वसन संबंधी गंभीर परेशानी, महंगे इलाज और फेफड़ों के कैंसर जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. डॉक्टर के अनुसार, बीमारी से पीड़ित लोगों और उनके परिवारों पर इसका भारी आर्थिक और सामाजिक प्रभाव पड़ रहा है.
रिपोर्टर ने सुरक्षा उपकरण पहनकर की जांच
आईटीवी न्यूज की जांच के दौरान रिपोर्टर को विशेष श्वसन सुरक्षा उपकरण पहनने की सलाह दी गई थी. रिपोर्ट में कहा गया कि इलाके में चलते समय जगह-जगह एस्बेस्टस के टूटे हुए टुकड़े दिखाई देते हैं. देखने में ये सामान्य पत्थरों जैसे लगते हैं, लेकिन वास्तव में ये ऐसे पदार्थ हैं जिनसे जानलेवा रेशे हवा में फैल सकते हैं. रिपोर्टर ने कहा कि ब्रिटेन में यदि ऐसी स्थिति दिखाई दे तो इसे तुरंत गंभीर पर्यावरणीय खतरे के रूप में लिया जाएगा.
पीड़ित परिवारों की कहानी
रिपोर्ट में उन परिवारों की स्थिति भी दिखाई गई है जो स्वयं को एस्बेस्टस के संपर्क का शिकार मानते हैं. ऐसे ही एक व्यक्ति सोमेश का उल्लेख किया गया है, जिन्हें बचपन में स्कूल के खेल मैदान में एस्बेस्टस के संपर्क में आने के बाद कैंसर होने का पता चला. डॉक्टरों के अनुसार कैंसर उनके शरीर में काफी फैल चुका है और उनके जीवित रहने की संभावना बेहद कम बताई जा रही है.
1970 के दशक के दस्तावेजों में चेतावनी
जांच में कंपनी के पुराने दस्तावेज भी सामने आए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, 1970 के दशक में कंपनी से जुड़े एक डॉक्टर ने प्रबंधन को भारतीय कर्मचारियों को एस्बेस्टस के खतरों से बचाने के लिए बेहतर सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी थी. एक दस्तावेज में चेतावनी दी गई थी कि कर्मचारियों को एस्बेस्टस के जोखिमों के बारे में बताया जाना चाहिए, ताकि दुनिया के अन्य हिस्सों में हुई त्रासदी भारत में दोबारा न दोहराई जाए.
कंपनी का पतन लेकिन कचरा रह गया
टर्नर एंड न्यूअल कभी ब्रिटेन की प्रमुख औद्योगिक कंपनियों में गिनी जाती थी, लेकिन ब्रिटेन और अमेरिका में एस्बेस्टस से जुड़े मुकदमों के बाद वर्ष 2001 में कंपनी का पतन हो गया. रिपोर्ट के मुताबिक कुछ पीड़ितों के लिए मुआवजे की व्यवस्था की गई थी, लेकिन कैमोर में फैले एस्बेस्टस कचरे को हटाने के लिए कोई विशेष फंड या योजना नहीं बनाई गई.
ब्रिटिश सरकार की प्रतिक्रिया
रिपोर्ट सामने आने के बाद ब्रिटिश सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि ये दावे बेहद चिंताजनक हैं और उन सभी लोगों के प्रति संवेदना है जिन्होंने अपने परिजनों को खोया है. प्रवक्ता ने कहा कि ब्रिटेन की सभी कंपनियों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने संचालन और सप्लाई चेन में मानवाधिकारों तथा पर्यावरणीय मानकों का सम्मान करें. साथ ही सरकार जिम्मेदार कारोबारी आचरण से जुड़े अपने दृष्टिकोण की समीक्षा रिपोर्ट के निष्कर्षों पर भी विचार कर रही है.
कैमोर पर अब भी मंडरा रहा खतरा
रिपोर्ट के अनुसार, फैक्ट्री बंद होने के वर्षों बाद भी कैमोर के लोग उसके प्रभाव से मुक्त नहीं हो सके हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि एस्बेस्टस कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में भी स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं सामने आती रह सकती हैं. कैमोर का यह मामला औद्योगिक प्रदूषण और कॉरपोरेट जिम्मेदारी पर बड़े सवाल खड़ा कर रहा है.
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