Bashir Badr Death Reason: उर्दू शायरी की दुनिया के चमकते सितारे बशीर बद्र अब हमारे बीच नहीं रहे. 91 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली. लंबे समय से वे डिमेंशिया जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. उनकी शायरी ने जहां लोगों को मोहब्बत, रिश्तों और जिंदगी के मायने समझाए, वहीं उनका आखिरी समय एक ऐसी बीमारी के साथ बीता, जो धीरे-धीरे इंसान की याददाश्त, सोचने की क्षमता और पहचान तक छीन लेती है.
बढ़ती उम्र के साथ डिमेंशिया के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं. यह केवल भूलने की बीमारी नहीं, बल्कि दिमाग से जुड़ी एक गंभीर स्थिति है, जो मरीज के साथ-साथ पूरे परिवार को मानसिक और भावनात्मक रूप से प्रभावित करती है. बशीर बद्र के निधन ने एक बार फिर इस बीमारी को लेकर जागरूक होने की जरूरत को सामने ला दिया है.
क्या है डिमेंशिया? | What is Dementia?
डॉ. संतोष लोगनाथन (NIMHANS में मनोरोग विज्ञान के एडिशनल प्रोफेसर) कहते हैं डिमेंशिया कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि कई लक्षणों का समूह है. इसमें इंसान की याददाश्त कमजोर होने लगती है, चीजें याद रखने में दिक्कत होती है और रोजमर्रा के काम इफेक्ट होने लगते हैं. कई बार मरीज अपने करीबी लोगों को पहचानना भी भूल जाता है.
डिमेंशिया का सबसे सामान्य प्रकार अल्जाइमर रोग माना जाता है. हालांकि स्ट्रोक, दिमाग की चोट, पार्किंसन या उम्र से जुड़ी दूसरी समस्याएं भी इसका कारण बन सकती हैं.
कैसे डिमेंशिया छीन लेता है यादें?
प्रोटीन का जमाव: अल्जाइमर जैसे डिमेंशिया में दिमाग में असामान्य प्रोटीन जमा होने लगते हैं. इससे न्यूरॉन्स के बीच संदेश पहुंचाने की प्रक्रिया प्रभावित होती है.
हिप्पोकैम्पस पर असर: दिमाग का हिप्पोकैम्पस हिस्सा नई यादें बनाने में मदद करता है. डिमेंशिया में यही हिस्सा सबसे पहले प्रभावित हो सकता है, इसलिए मरीज हाल की बातें जल्दी भूलने लगते हैं.
कनेक्शन कमजोर होना: धीरे-धीरे दिमाग के अलग-अलग हिस्सों के बीच तालमेल कमजोर होने लगता है। इस वजह से नाम, चेहरे और जगहों को पहचानने में दिक्कत हो सकती है.
पहचान और भाषा पर असर: बीमारी बढ़ने पर भाषा, सोचने-समझने और पहचानने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। कई मरीज अपने करीबी लोगों को पहचानने में परेशानी महसूस करते हैं.
सामान्य भूलने और डिमेंशिया में क्या फर्क है?
बढ़ती उम्र में कभी-कभी चीजें भूलना सामान्य हो सकता है. लेकिन, डिमेंशिया में भूलने की समस्या इतनी बढ़ सकती है कि व्यक्ति चीजों का इस्तेमाल या उनका उद्देश्य भी भूलने लगे.

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डिमेंशिया के शुरुआती संकेत जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:
अक्सर लोग इसे सामान्य बढ़ती उम्र का असर मानकर टाल देते हैं, लेकिन कुछ संकेत गंभीर हो सकते हैं. जैसे:
- बार-बार एक ही बात भूलना.
- बातचीत के दौरान सही शब्द याद न आना.
- रास्ते या जगह भूल जाना.
- मूड और व्यवहार में अचानक बदलाव.
- रोजमर्रा के काम करने में परेशानी.
- लोगों से दूरी बनाना या चिड़चिड़ापन बढ़ना.
अगर ये लक्षण लगातार दिखाई दें तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है.
क्यों बढ़ रहा है खतरा?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक बढ़ती उम्र डिमेंशिया का सबसे बड़ा कारण है, लेकिन आज की लाइफस्टाइल भी जोखिम बढ़ा रही है. हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, धूम्रपान, तनाव और नींद की कमी दिमाग की सेहत पर असर डालते हैं.
इसके अलावा अकेलापन और सामाजिक दूरी भी बुजुर्गों में मानसिक गिरावट को तेज कर सकती है. यही वजह है कि डॉक्टर बुजुर्गों को एक्टिव रहने, लोगों से जुड़े रहने और ब्रेन एक्टिविटी में हिस्सा लेने की सलाह देते हैं.
क्या डिमेंशिया का इलाज संभव है? | Is a Cure For Dementia Possible?
फिलहाल डिमेंशिया का पूरी तरह इलाज मौजूद नहीं है, लेकिन सही देखभाल और समय पर इलाज से इसके असर को धीमा किया जा सकता है. दवाइयों, थेरेपी और हेल्दी लाइफस्टाइल से मरीज की स्थिति बेहतर रखने में मदद मिलती है.
मरीज को प्यार, धैर्य और भावनात्मक सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत होती है. परिवार की भूमिका यहां बेहद जरूरी हो जाती है क्योंकि कई बार मरीज खुद अपनी स्थिति को समझ नहीं पाता.
दिमाग को हेल्दी रखने के लिए क्या करें? | What Should You Do to Keep Your Brain Healthy?
डॉ. सुधीर कुमार, MD, DM न्यूरोलॉजिस्ट, अपोलो हॉस्पिटल्स, हैदराबाद, के अनुसार कुछ आदतें डिमेंशिया के खतरे को कम करने में मदद कर सकती हैं:
- रोजाना हल्की एक्सरसाइज या वॉक करें
- बैलेंस और पौष्टिक डाइट लें.
- पर्याप्त नींद लें
- किताबें पढ़ें, पहेलियां हल करें और ब्रेन एक्टिविटीज करें.
- ब्लड प्रेशर और शुगर कंट्रोल में रखें.
- परिवार और दोस्तों के साथ जुड़े रहें.
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