कई बार शादी, पार्टी या किसी पारिवारिक समारोह में बच्चों पर सबसे ज्यादा ध्यान रहता है. रिश्तेदार और अन्य घर परिवार के लोग अक्सर बच्चों से कोई उनसे गाना गाने को कहता है, कोई मजाक करता है, तो कोई उनकी तुलना दूसरे बच्चों से करने लगता है. ये सभी बातें अक्सर लोगों को आम लगती है, लेकिन बच्चे के मन और आत्मविश्वास पर इनका गहरा असर पड़ सकता है. ऐसे में माता-पिता की जिम्मेदारी सिर्फ बच्चे को अच्छे संस्कार सिखाने की नहीं, बल्कि उसकी भावनाओं और सीमाओं की सेफ्टी करने की भी होती है. चलिए आपको बताते हैं 5 ऐसी बातें, जिन्हें किसी भी सोशल गैदरिंग में माता-पिता को अपने बच्चे से कभी नहीं करवाना चाहिए.
बच्चे को गले मिलने या किस करने के लिए मजबूर न करें
अक्सर, किसी पारिवारिक समारोह या रिश्तेदार के घर आने पर लोग बच्चों से गले मिलने या किस करने की उम्मीद करते हैं, लेकिन अगर आपका बच्चा झिझकता है, पीछे हट जाता है या मना कर देता है, तो उसे मजबूर न करें. बच्चों को यह तय करने का अधिकार होना चाहिए कि वे किसी के साथ शारीरिक स्नेह दिखाना चाहते हैं या नहीं. इसके बजाय, आप उन्हें नमस्ते करना, हाथ हिलाकर अभिवादन करना, हाई-फाइव देना या फिस्ट बंप करना जैसे दूसरे तरीके सिखा सकते हैं.
दूसरों को अपने बच्चे पर कोई भी लेबल न लगाने दें
अक्सर लोग बच्चों के बारे में कह देते हैं, ये बहुत शर्मीला है, ये बहुत शरारती है, ये आलसी है या ये तो हर बात पर रोने लगता है. बड़ों को ये बातें सामान्य लग सकती हैं, लेकिन बच्चे बार-बार ऐसी बातें सुनकर उन्हें सच मानने लगते हैं. किसी एक व्यवहार से बच्चे की पूरी पहचान तय नहीं होती. अगर कोई बच्चा किसी समारोह में कम बोल रहा है, तो इसका मतलब यह नहीं कि वह हमेशा शर्मीला है. इसी तरह अगर वह किसी खिलौने को शेयर नहीं करना चाहता, तो उसे स्वार्थी नहीं कहा जा सकता. बच्चे अभी अपनी भावनाओं को समझना और उन्हें व्यक्त करना सीख रहे होते हैं. इसलिए जब कोई आपके बच्चे को ऐसे नामों या लेबल से पुकारे, तो हंसकर बात टालने के बजाय विनम्रता से समझाएं कि बच्चे का एक व्यवहार उसकी पूरी पहचान नहीं है. इससे बच्चे का आत्मविश्वास बना रहता है और वह खुद को सकारात्मक नजरिए से देखना सीखता है.
बच्चों की दूसरों से तुलना न होने दें
पारिवारिक समारोह, शादी-ब्याह या किसी सामाजिक कार्यक्रम में अक्सर बच्चों की तुलना शुरू हो जाती है. कोई कहता है, देखो उसके कितने अच्छे नंबर आते हैं. तो कोई कहता है तुम्हारा कजिन कितना कॉन्फिडेंट है या उसका बच्चा तो अभी से तीन भाषाएं सीख रहा है. भले ही ये बातें प्रेरित करने के इरादे से कही जाएं, लेकिन बार-बार तुलना होने से बच्चे को लगने लगता है कि वह दूसरों जितना अच्छा नहीं है. इससे उसका आत्मविश्वास भी प्रभावित हो सकता है. यह समझना जरूरी है कि हर बच्चा अलग होता है और अपनी गति से सीखता व आगे बढ़ता है. इसलिए अपने बच्चे की तुलना किसी दूसरे बच्चे से करने के बजाय उसके अपने विकास और प्रयासों पर ध्यान दें.
यह भी पढ़ें:- टाइल की लाइनों की गंदगी और दाग नेचुरली कैसे साफ करें, ये है 5 आसान तरीके, एकदम चमक उठेगी टाइल्स
यह भी पढ़ें:- घर में हो गई बहुत सारी छिपकलियां, इन 5 नेचुरल तरीके से भगाएं दूर
यह भी पढ़ें:- गर्दन और पीठ के मैल को साफ करने की आसान टिप्स, घर पर बनाएं बेसन-दही का नेचुरल क्लींजर
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं