बीमारी कब और किसके दरवाजे पर दस्तक दे, यह कोई नहीं जानता. लेकिन एक बात लगभग हर परिवार समझने लगा है कि बीमारी से ज्यादा मुश्किल उसका खर्च हो सकता है. शायद यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों में हेल्थ इंश्योरेंस को लेकर लोगों की सोच तेजी से बदली है. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6) के ताजा आंकड़े भी इसी बदलाव की कहानी बताते हैं.
सर्वे के अनुसार अब देश के 60.2 प्रतिशत परिवारों में कम से कम एक सदस्य हेल्थ इंश्योरेंस या किसी स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के दायरे में है. पिछले सर्वे में यह आंकड़ा 41 प्रतिशत था. यानी कुछ ही वर्षों में बड़ी संख्या में भारतीय परिवार स्वास्थ्य सुरक्षा की ओर बढ़े हैं.
कुछ सालों में बदली तस्वीर
NFHS-6 के आंकड़े बताते हैं कि हेल्थ इंश्योरेंस का दायरा पहले की तुलना में काफी तेजी से बढ़ा है. बढ़ते मेडिकल खर्च, सरकारी योजनाओं की पहुंच और लोगों में बढ़ी जागरूकता इसकी प्रमुख वजहों में शामिल हैं. कोरोना महामारी के बाद भी बड़ी संख्या में लोगों ने स्वास्थ्य सुरक्षा के महत्व को गंभीरता से समझा है.
देशभर के करीब 6.79 लाख परिवारों पर आधारित इस सर्वे में यह भी संकेत मिला है कि अब पहले के मुकाबले ज्यादा परिवार इलाज के दौरान आने वाले बड़े खर्च से बचाव के लिए इंश्योरेंस का सहारा ले रहे हैं.
क्यों बढ़ रही है हेल्थ इंश्योरेंस की जरूरत?

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आज के समय में अस्पताल में कुछ दिन भर्ती रहने, सर्जरी कराने या किसी गंभीर बीमारी का इलाज करवाने पर लाखों रुपये खर्च हो सकते हैं. ऐसे में हेल्थ इंश्योरेंस कई परिवारों के लिए आर्थिक सहारे का काम करता है. एक मेडिकल इमरजेंसी आपकी वर्षों की बचत पर असर डाल सकती है. यही कारण है कि अब लोग हेल्थ इंश्योरेंस को सिर्फ एक पॉलिसी नहीं, बल्कि अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग का हिस्सा मानने लगे हैं.
सिर्फ पॉलिसी होना ही काफी नहीं
हालांकि सिर्फ हेल्थ इंश्योरेंस होना ही पर्याप्त नहीं है. अलग-अलग पॉलिसियों में मिलने वाली सुविधाएं, कवरेज की सीमा, अस्पतालों का नेटवर्क और क्लेम से जुड़ी शर्तें अलग हो सकती हैं. इसलिए यह समझना भी जरूरी है कि आपकी पॉलिसी वास्तव में कितनी सुरक्षा देती है. कई मामलों में लोगों के पास इंश्योरेंस तो होता है, लेकिन इलाज के दौरान उन्हें अपनी जेब से भी अच्छी-खासी रकम खर्च करनी पड़ जाती है. इसलिए विशेषज्ञ बेहतर और पर्याप्त कवरेज चुनने की सलाह देते हैं.
टीकाकरण, अस्पतालों से प्रसव में भी सुधार
NFHS के सर्वे में स्वास्थ्य से जुड़े कई दूसरे सकारात्मक संकेत भी सामने आए हैं. रिपोर्ट के अनुसार बच्चों के टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की देखभाल और अस्पतालों में प्रसव जैसे मामलों में भी सुधार दर्ज किया गया है. हालांकि बढ़ता मोटापा और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां अब भी चिंता का विषय बनी हुई हैं.
इसमें कोई शक नहीं कि हेल्थ इंश्योरेंस का बढ़ता दायरा एक अच्छी शुरुआत है. लेकिन इसके साथ बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, आसान इलाज और लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी उतना ही जरूरी होगा, ताकि स्वास्थ्य सुरक्षा का फायदा ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सके.
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