जान है तो जहान है, ये कहावत तो आपने अक्सर सुनी होगी. इसलिए अपनी सेहत और समय पर किसी भी बीमारी का इलाज बेहद जरूरी है. लेकिन आज के दौर में इलाज इतना महंगा हो गया है कि एक बार अस्पताल जाने पर पूरी जिंदगी की जमा-पूंजी खत्म हो जाती है. कई बार तो गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को इलाज के लिए कर्ज लेना पड़ता है या अपने घर-जेवर तक बेचने पड़ जाते हैं. लेकिन देश के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य सर्वे यानी 'नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6) की ताजा रिपोर्ट में एक बेहद शानदार खुलासा हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक, अब भारत के करीब 60.2% परिवारों में कम से कम एक सदस्य के पास हेल्थ इंश्योरेंस (स्वास्थ्य बीमा) या सरकार की कोई न कोई हेल्थ स्कीम की सुविधा मौजूद है. यानी देश के आधे से ज्यादा परिवार अब बीमारी के वक्त होने वाले अचानक खर्चों से काफी हद तक सुरक्षित हो चुके हैं.
कुछ सालों में आया इतना बड़ा बदलाव-
आपको जानकर हैरानी होगी कि इससे पहले जो सर्वे हुआ था (NFHS-5, साल 2019-21), उसमें केवल 41% परिवारों के पास ही हेल्थ इंश्योरेंस था. लेकिन अब यह आंकड़ा बढ़कर सीधे 60.2% पर पहुंच गया है. यानी पिछले कुछ ही सालों में लगभग 20% का भारी उछाल आया है. यह दिखाता है कि अब लोग सेहत और पैसों की सुरक्षा को लेकर कितने जागरूक हो रहे हैं. यह सर्वे कोई छोटा-मोटा सर्वे नहीं है, बल्कि देश के 715 जिलों के करीब 6.79 लाख घरों में जाकर यह डेटा जुटाया गया है.
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आखिर क्यों आई यह तेजी?
हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह सरकार की फ्री और सस्ती स्वास्थ्य योजनाएं (जैसे आयुष्मान भारत योजना और राज्यों की अपनी स्कीम) हैं. इसके अलावा, कोरोना महामारी के बाद से आम लोगों के सोचने का तरीका भी बदला है. अब लोग समझने लगे हैं कि लाइफ इंश्योरेंस जरूरी है, वैसे ही हेल्थ इंश्योरेंस भी फाइनेंशियल प्लानिंग यानी भविष्य की बचत का एक बहुत जरूरी हिस्सा है. अस्पताल का एक छोटा सा चक्कर भी आपकी सारी सेविंग्स को साफ कर सकता है, इसलिए इंश्योरेंस होना आपको कर्ज के दलदल में फंसने से बचाता है.
हेल्थ इंश्योरेंस क्यों है हर परिवार के लिए जरूरी?
हेल्थ एक्सपर्ट अरुण राममूर्ति बताते हैं कि हेल्थ इंश्योरेंस होने से जेब से होने वाला खर्च बहुत कम हो जाता है. जब किसी परिवार को अचानक इन दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, तो इंश्योरेंस उनके लिए फरिश्ता बनकर आता है.
- अचानक अस्पताल में भर्ती होना (Hospitalisation)
- कोई बड़ी सर्जरी या ऑपरेशन होना
- कैंसर या किडनी जैसी गंभीर बीमारियों का लंबा इलाज
- इमरजेंसी में एम्बुलेंस या आईसीयू का खर्च
अगर आपके पास सही पॉलिसी है, तो आप बिना पैसों की टेंशन लिए अच्छे से अच्छा इलाज करा सकते हैं. यकीनन 60% का आंकड़ा बहुत अच्छा है, लेकिन एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि सिर्फ इंश्योरेंस का कार्ड जेब में होने से ही सब कुछ ठीक नहीं हो जाता. अभी भी बहुत सी चीजों में सुधार की जरूरत है. जैसे क्लेम पास होने की रफ्तार तेज होनी चाहिए, इंश्योरेंस में कौन-कौन सी बीमारियां कवर हो रही हैं इसकी साफ जानकारी होनी चाहिए और गांवों में अच्छे अस्पतालों का नेटवर्क बढ़ना चाहिए. तभी जाकर इस इंश्योरेंस का असली फायदा हर गरीब को मिल पाएगा।.
रिपोर्ट में और क्या रहीं अच्छी बातें?
इस सरकारी सर्वे में सिर्फ इंश्योरेंस ही नहीं, बल्कि महिलाओं और बच्चों की सेहत को लेकर भी कई अच्छी खबरें मिली हैं-
अब ज्यादातर महिलाओं की डिलीवरी अस्पतालों में सुरक्षित तरीके से हो रही है.
बच्चों को समय पर टीके (Immunisation) मिलने के ग्राफ में सुधार हुआ है.
गर्भवती महिलाओं की जांच और बच्चों के खान-पान (पोषण) में भी पहले से बेहतरी देखी गई है.
हालांकि, रिपोर्ट में एक चिंता की बात भी सामने आई है कि देश में मोटापा और लाइफस्टाइल (खराब दिनचर्या) से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, जिस पर हम सबको ध्यान देने की जरूरत है.
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