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स्टेज-4 लिवर कैंसर से जंग जीत गया मासूम, मौसी बनीं फरिश्ता, अपना लिवर देकर बचाई जान

Liver Cancer Survival: मार्च 2025 में जब क्रू सिर्फ 11 महीने का था, तब डॉक्टरों ने उसे स्टेज 4 हेपेटोब्लास्टोमा नाम के दुर्लभ लिवर कैंसर से ग्रसित पाया.

स्टेज-4 लिवर कैंसर से जंग जीत गया मासूम, मौसी बनीं फरिश्ता, अपना लिवर देकर बचाई जान
Liver Cancer Survival: जब क्रू सिर्फ 11 महीने का था, तब डॉक्टरों ने उसे हेपेटोब्लास्टोमा नाम के कैंसर से ग्रसित पाया.

Liver Donation Story: परिवार और दोस्तों से घिरे छोटे से क्रू डिआर्थ ने जब बहादुरी की घंटी बजाई, तो वह सिर्फ एक घंटी नहीं थी, वह जिंदगी की जीत का ऐलान था. 'क्रू का फाइट क्लब' वाली टी-शर्ट पहने उसके अपने लोग उस पल को सेलिब्रेट कर रहे थे, जो दर्द, उम्मीद और हिम्मत से भरे लंबे सफर का अंत था. यह खुशी इसलिए और खास थी क्योंकि क्रू ने एक खतरनाक बीमारी, लिवर कैंसर को हराकर यह मुकाम हासिल किया था. उसकी मां निकोल के अनुसार, वह पल प्यार और आभार से भरा हुआ था, खासकर क्रू की मौसी टेलर (Taylor) के लिए जिन्होंने अपने लिवर का हिस्सा देकर उसे नया जीवन दिया. इंस्टाग्राम पर शेयर एक पोस्ट में बताई गई इमोशनल स्टोरी आपको भी भावुक कर देगी.

एक मासूम पर टूटा बड़ा संकट

मार्च 2025 में, जब क्रू सिर्फ 11 महीने का था, तब डॉक्टरों ने उसे स्टेज 4 हेपेटोब्लास्टोमा नाम के दुर्लभ लिवर कैंसर से ग्रसित पाया. उसका लिवर असामान्य रूप से बढ़ चुका था और पेट में गांठ बन गई थी. स्थिति और भी गंभीर थी क्योंकि कैंसर उसके फेफड़ों तक फैल चुका था. इतनी छोटी उम्र में इतनी बड़ी बीमारी, यह किसी भी परिवार के लिए बेहद कठिन समय था.

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इलाज का कठिन सफर और बड़ा फैसला

कीमोथेरेपी शुरू की गई, लेकिन जल्द ही डॉक्टरों को एहसास हुआ कि ट्यूमर की स्थिति ऐसी है कि इसे पूरी तरह हटाना संभव नहीं है. पेडियाट्रिक्स हेमेटोलॉजिस्ट, ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. स्टेफ़नी थॉमस के अनुसार, "लिवर की जरूरी नसों को नुकसान पहुंचाए बिना ट्यूमर निकालना संभव नहीं था." ऐसे में एकमात्र रास्ता था, लिवर ट्रांसप्लांट.

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मौसी बनी जीवनदाता

जहां आमतौर पर अंग मृत दाताओं से मिलते हैं, वहीं लिवर एक ऐसा अंग है जो खुद को दोबारा बना सकता है. इसका मतलब है कि एक जीवित व्यक्ति भी अपना हिस्सा दान कर सकता है.

जैसे ही क्रू की मौसी टेलर को यह पता चला, उन्होंने बिना एक पल गंवाए डोनर बनने का फैसला कर लिया. तीन बच्चों की मां टेलर ने कहा, "मुझे लगा जैसे मैं इसी काम के लिए बनी हूं." उनका यह फैसला सिर्फ एक मेडिकल प्रक्रिया नहीं था, यह प्यार और बलिदान की मिसाल थी.

नई जिंदगी की शुरुआत

जून 2025 में सफल ट्रांसप्लांट सर्जरी हुई. इसके बाद क्रू को कुछ और कीमोथेरेपी से गुजरना पड़ा. लेकिन, आखिरकार वह दिन आया, जब रिपोर्ट्स में कैंसर का कोई निशान नहीं मिला.

अक्टूबर 2025 में Crew ने Bravery Bell बजाकर अपनी जीत का जश्न मनाया, एक ऐसा पल जिसे देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं.

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उम्मीद की मिसाल बना क्रू:

29 मार्च 2026 को क्रू ने अपना दूसरा जन्मदिन मनाया. वह अब हेल्दी है, हालांकि डॉक्टर उसका रेगुलर चेकअप करते रहते हैं ताकि बीमारी दोबारा न लौटे. टेलर कहती हैं, "अंग दान किसी को सिर्फ जीवन नहीं देता, बल्कि उसे अपने प्रियजनों के साथ नई यादें बनाने का मौका भी देता है."

सीख जो दिल में बस जाए

क्रू की कहानी हमें सिखाती है कि हिम्मत, परिवार का साथ और निस्वार्थ प्यार मिलकर किसी भी मुश्किल को हरा सकते हैं. साथ ही, यह कहानी अंगदान की इंपोर्टेंस को भी उजागर करती है, एक ऐसा कदम जो किसी की पूरी जिंदगी बदल सकता है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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