आपने ओजम्पिक (Ozempic) या वेगोवी (Wegovy) जैसी दवाइयों के नाम जरूर सुने होंगे. ये वो दवाइयां हैं जो इस समय पूरी दुनिया में वजन घटाने (Weight Loss) और डायबिटीज (Diabetes) को कंट्रोल करने के लिए सबसे ज्यादा पॉपुलर हैं. लेकिन हाल ही में इन दवाइयों को लेकर एक ऐसी खबर आई है, जिसने मेडिकल साइंस की दुनिया में खलबली मचा दी है. वैज्ञानिकों का कहना है कि ये दवाइयां सिर्फ मोटापा या शुगर ही कम नहीं करतीं, बल्कि ये कैंसर के मरीजों के लिए भी एक बड़ा वरदान साबित हो सकती हैं. जी हां, नई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि इन दवाइयों की मदद से कैंसर के मरीजों की सेहत में बहुत तेजी से सुधार देखा जा रहा है.
The world's most popular weight-loss and diabetes drugs are linked to a powerful new possible benefit: better outcomes for cancer patients. https://t.co/T9LglXOxkg
— The Wall Street Journal (@WSJ) May 21, 2026
क्या कहती है नई रिसर्च में?
हाल ही में हुई कुछ बड़ी स्टडीज में यह देखा गया कि जो लोग वजन घटाने या डायबिटीज की इन नई दवाओं (जिन्हें मेडिकल भाषा में GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट कहा जाता है) का इस्तेमाल कर रहे थे, उनमें कैंसर से जुड़े नतीजे काफी बेहतर रहे. रिसर्चर्स ने पाया कि ये दवाइयां लेने वाले कैंसर मरीजों में न सिर्फ बीमारी का खतरा कम हुआ, बल्कि उनके बचने (Survive करने) की संभावना भी काफी बढ़ गई.
विशेषज्ञों का मानना है कि मोटापा कई तरह के कैंसर (जैसे ब्रेस्ट कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर और पैंक्रियाटिक कैंसर) का एक बहुत बड़ा कारण होता है. जब ये दवाइयां शरीर का वजन और एक्स्ट्रा फैट कम करती हैं, तो शरीर में सूजन (Inflammation) कम होने लगती है. सूजन कम होने से कैंसर की कोशिकाओं (Cells) को बढ़ने का मौका नहीं मिलता.

आम आदमी के लिए इसका क्या मतलब है?
इसे ऐसे समझिए कि जब कोई इंसान कैंसर से जंग लड़ रहा होता है, तो उसका पूरा शरीर कमजोर हो जाता है. अगर उस मरीज को डायबिटीज या मोटापे की भी बीमारी है, तो इलाज और मुश्किल हो जाता है. ये नई दवाइयां एक साथ कई मोर्चों पर काम करती हैं. ये शुगर लेवल को कंट्रोल में रखती हैं, जिससे कैंसर सेल्स को बढ़ने के लिए 'ईंधन' (Glucose) नहीं मिलता. साथ ही, वजन कम होने से मरीज की ओवरऑल इम्यूनिटी यानी बीमारियों से लड़ने की ताकत भी मजबूत होती है. इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि ये दवाइयां कैंसर को पूरी तरह से ठीक करने की मुख्य दवा बन गई हैं. नहीं, कैंसर का इलाज तो कीमोथेरेपी, रेडिएशन या सर्जरी से ही होगा. लेकिन ये दवाइयां उस इलाज के असर को बहुत बेहतर बना देती हैं, जिससे मरीज की जान बचने की उम्मीद काफी बढ़ जाती है.
दिलचस्प बात यह है कि इन दवाइयों के फायदों की लिस्ट लगातार लंबी होती जा रही है. कुछ समय पहले ही रिसर्च में पता चला था कि ये दवाइयां हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे को कम करती हैं. और अब कैंसर के मरीजों के लिए आई इस रिपोर्ट ने डॉक्टरों की उम्मीदें बहुत बढ़ा दी हैं.
हालांकि, डॉक्टर अभी भी यही सलाह देते हैं कि इन दवाइयों का इस्तेमाल बिना किसी मेडिकल गाइडेंस के खुद से कभी नहीं करना चाहिए. इनके कुछ साइड इफेक्ट्स भी होते हैं, इसलिए डॉक्टर मरीज की कंडीशन देखकर ही यह तय करते हैं कि उन्हें यह दवा देनी है या नहीं.
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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